कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली स्वर्वेद संदेश यात्रा पहुंची औरंगाबाद, 25 हजार कुंडीय महायज्ञ के लिए लिया सेवा-संकल्प
प्रवचन करते संत विज्ञानदेव कार्यक्रम में उमड़ा जन सैलाब | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद के अंबा प्रखंड स्थित दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर में 'समर्पण दीप स्वर्वेद संदेश यात्रा' का भव्य स्वागत किया गया. संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आगामी 14-15 दिसंबर 2026 को वाराणसी में होने वाले 25 हजार कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं ने सेवा का संकल्प लिया.
Aurangabad News : कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकली ‘समर्पण दीप स्वर्वेद संदेश यात्रा’ सोमवार को औरंगाबाद पहुंची. अंबा प्रखंड अंतर्गत दोमुहान सड़सा स्थित सूर्य मंदिर परिसर में विहंगम योग से जुड़े श्रद्धालुओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया.
सुपूज्य संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज के नेतृत्व में पहुंची यात्रा के दौरान पूरा परिसर आध्यात्मिक माहौल में सराबोर रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. वैदिक मंत्रोच्चार, ध्वजारोहण और अखंड दीप प्रज्ज्वलन के साथ अध्यात्म और सेवा का संदेश दिया गया.

बिहार प्रांत के अध्यक्ष युवा संत समाज सह कार्यवाहक महामंत्री संजय कुमार सिंह ने बताया कि ‘समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव’ के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी स्वर्वेद संदेश यात्रा निकाली गयी है.
बिहार के विभिन्न जिलों से होते हुए यात्रा सोमवार को दोमुहान सड़सा सूर्य मंदिर की पावन भूमि पर पहुंची. इसके साथ ही बिहार में यात्रा का समापन हुआ और अब यह यात्रा ओडिशा के लिए रवाना होगी.
ध्वजारोहण और अखंड दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ ध्वजारोहण के साथ किया गया. इसके बाद संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने अभ्यास सिद्ध सद्गुरु अनंत श्री सदाफल देव जी महाराज एवं प्रथम परंपरा सद्गुरु श्री धर्मचंद देव जी महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया.
वर्तमान सद्गुरु आचार्य श्री स्वतंत्र देव जी महाराज के चरणों में पुष्प अर्पित किए गए. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अखंड दीप प्रज्ज्वलित किया गया. तत्पश्चात राष्ट्रगान हुआ.

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का समझाया मर्म
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए संत प्रवर श्री विज्ञान देव जी महाराज ने मानवीय चेतना की सार्थक दिशा तथा पुरुषार्थ चतुष्टय धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के गूढ़ मर्म को सहज रूप में समझाया.
उन्होंने आत्मिक उन्नति और परम पुरुषार्थ की दिशा में आगे बढ़ने के लिए साधना एवं सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला. उनके प्रवचन में आध्यात्मिक जीवन की सार्थकता और मानवीय चेतना के विकास का संदेश प्रमुख रहा. संत प्रवर की दिव्य वाणी सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे.
वाराणसी में होगा 25 हजार कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वैदिक पुरोहित आचार्य मयंक शास्त्री ने बताया कि यात्रा की सार्थक परिणति सेवा-संकल्प के रूप में हुई. आगामी 14 एवं 15 दिसंबर 2026 को स्वर्वेद महामंदिर धाम, वाराणसी में वार्षिक उत्सव के अवसर पर 25 हजार कुंडीय विश्वशांति वैदिक महायज्ञ आयोजित होगा.
इस आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं ने सेवा करने और अधिक से अधिक लोगों को महायज्ञ एवं समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव से जोड़ने का संकल्प लिया.
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रहे उपस्थित
कार्यक्रम में क्षेत्रीय कार्यालय निदेशक बिहार पीएन सिंह, संरक्षक डीएन सिंह, रामचंद्र तिवारी, पटना प्रमंडल मंत्री नवल सिंह, जिला सचिव उमेश सिंह, संयोजक विनोद वर्मा, अनुज प्रसाद, डॉ. श्याम नारायण प्रसाद, सुनील संगम, प्रदीप शास्त्री, पूर्व जिला पार्षद दीनानाथ विश्वकर्मा, राजगीर विश्वकर्मा, दिनेश यादव, लालमोहन प्रजापति, रामचंद्र पांडेय, योगेंद्र यादव, अजय यादव, भृगुनाथ सिंह, उषा देवी, प्रभा देवी, कलावती देवी और मुनी देवी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे.
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