देव सूर्य मंदिर में भादो के रविवार पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब: हजारों श्रद्धालुओं ने किए भगवान भास्कर के दर्शन, मंदिर परिसर में गूंजे जयकारे

Updated:
विज्ञापन
WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

भादो के रविवार पर ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर में हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर की पूजा की. मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.

विज्ञापन

Aurangabad News: जिले के ऐतिहासिक एवं पौराणिक तीर्थस्थल देव सूर्य मंदिर में भादो मास के रविवार को आस्था का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा. रविवार के पावन अवसर पर भगवान भास्कर के दर्शन, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया था. स्थानीय जिले के साथ-साथ गया, रोहतास, अरवल, जहानाबाद और पड़ोसी राज्य झारखंड के पलामू प्रमंडल से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु देव पहुंचे. पूरा मंदिर परिसर और आसपास का इलाका दिनभर 'भगवान सूर्य की जय' और 'दीनानाथ की जय' के उद्घोष से गुंजायमान रहा.

विज्ञापन

सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के कड़े प्रबंध

सूर्य मंदिर न्यास समिति और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं को सुगमता से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग कर कतारबद्ध तरीके से गर्भगृह में प्रवेश कराया. श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर की विधिवत पूजा-अर्चना कर अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ में महिला श्रद्धालुओं की संख्या विशेष रूप से अधिक रही. भीड़ को नियंत्रित करने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए देव थाना की पुलिस बल के साथ-साथ महिला पुलिसकर्मियों की भी विशेष तैनाती की गई थी. अत्यधिक भीड़ और वाहनों के दबाव के चलते देव की मुख्य सड़कों पर रुक-रुक कर जाम की स्थिति भी बनी रही.

भादो के रविवार का विशेष धार्मिक महत्व

मंदिर के मुख्य पुजारी राजेश पाठक, मृत्युंजय पाठक एवं दिलीप पाठक ने भादो रविवार के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सनातन परंपरा में भाद्रपद मास के रविवार को भगवान सूर्य की आराधना का विशेष फल मिलता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य देव समस्त नवग्रहों के अधिपति हैं. भादो के रविवार को भगवान सूर्य के साथ-साथ भगवान श्रीहरि विष्णु की संयुक्त पूजा का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजन करने से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है तथा घर-परिवार में धन, यश, तेज और समृद्धि का संचार होता है.

तीन स्वरूपों में विराजमान हैं भगवान भास्कर

ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर अपनी वास्तुकला और धार्मिक महत्ता के लिए पूरे देश में विख्यात है, जहां भगवान सूर्य उदय, मध्याह्न और अस्त के तीन स्वरूपों (बाल्यावस्था, युवावस्था और वृद्धावस्था) में साक्षात विराजमान हैं. श्रद्धालुओं में यह अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में सच्चे मन से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

प्रबंधन और व्यवस्थाओं को लेकर न्यास समिति के सचिव विश्वजीत राय एवं कोषाध्यक्ष सुधीर सिंह ने कहा-

"श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की कठिनाई न हो, इसके लिए समिति और स्वयंसेवकों द्वारा पेयजल, कतार प्रबंधन और छाया की हरसंभव व्यवस्था की गई थी. पुलिस और प्रशासन के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से सभी श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन और पूजन संपन्न किए."

Also Read: WATCH VIDEO : औरंगाबाद में बिहार-झारखंड बॉर्डर पर एक ही रात 3 वारदात, दो दुकानों में चोरी

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन