औरंगाबाद : भादो के अंतिम रविवार देव सूर्य मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, सूर्यकुंड में स्नान कर की पूजा

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भादो मास के अंतिम रविवार देव सूर्य मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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औरंगाबाद के देव स्थित त्रेतायुगीन और पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर में भादो मास के अंतिम रविवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. उमस भरी गर्मी के बीच भक्तों ने सूर्यकुंड में स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना की और मन्नतें मांगीं.

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विश्व प्रसिद्ध सौर तीर्थस्थल देव स्थित त्रेतायुगीन ऐतिहासिक सूर्य मंदिर में रविवार को दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. उमस भरी गर्मी के बीच दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर की आराधना की, जिससे पूरे परिसर में भक्ति और आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिला. भादो मास के अंतिम रविवार को भक्तों का सैलाब उमड़ने के कारण अहले सुबह से ही श्रद्धालु कतारों में खड़े नजर आए.

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इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने प्रसिद्ध सूर्यकुंड तालाब में पवित्र स्नान भी किया. इस सूर्यकुंड तालाब को कुष्ठ निवारक तालाब के रूप में भी जाना जाता है. श्रद्धालुओं का कहना था कि भादो माह में इस पवित्र जल में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व है. वैसे भी समय के साथ भगवान सूर्य के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती जा रही है.

देश का एकमात्र पश्चिमाभिमुख सूर्य मंदिर

ज्ञात हो कि देव स्थित यह सूर्यमंदिर देश का इकलौता ऐसा सूर्य मंदिर है जो पूर्वाभिमुख न होकर पश्चिमाभिमुख है. यहां भगवान सूर्य अपने तीनों स्वरूपों में विराजमान हैं. मंदिर के गर्भ गृह में भगवान सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में विद्यमान हैं. सात रथों से उत्कीर्ण प्रस्तर मूर्तियां अपने तीनों रूपों—उदयाचल (प्रातः काल), मध्याचल (दोपहर) और अस्ताचल (संध्या) सूर्य के रूप में स्थापित हैं.

इस मंदिर का सर्वाधिक आकर्षक भाग इसके गर्भ गृह के ऊपर बना भव्य गुंबद है, जिस पर चढ़ पाना असंभव माना जाता है. गर्भ गृह के मुख्य द्वार पर बाईं ओर भगवान सूर्य की प्रतिमा और दाईं ओर भगवान शंकर की गोद में बैठी मां पार्वती की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा सुसज्जित है. इस प्रकार की अनूठी प्रतिमाएं देश के अन्य सूर्य मंदिरों में देखने को नहीं मिलती हैं.

चैत्र और कार्तिक छठ पर जुटते हैं लाखों श्रद्धालु

यहां कार्तिक और चैत्र मास के छठ महापर्व पर देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु व्रत करने पहुंचते हैं, जिससे यह छोटा सा कस्बा पूरी तरह भक्तों की भीड़ से पट जाता है. झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र समेत देश के अन्य राज्यों से भी भारी संख्या में लोग यहां अर्घ्य देने आते हैं. ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान सूर्य की आराधना करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा भारी संख्या में पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की जाती है.

फोटो सूर्य मंदिर में एवंप्रांगण में श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network
सूर्य मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network

न्यास समिति के सचिव विश्वजीत राय, कोषाध्यक्ष सुधीर सिंह और सदस्य योगेंद्र सिंह ने बताया कि श्रद्धालुओं से निरंतर अपील की जाती है कि वे मंदिर की पूजा व्यवस्था में सहयोग करें और कतारबद्ध होकर भगवान सूर्य के दर्शन प्राप्त करें. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक देव सूर्य मंदिर बिहार की गौरवशाली विरासत है और न्यास समिति श्रद्धालुओं की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहती है.

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मुख्य पुजारी राजेश पाठक और मृत्युंजय पाठक ने बताया कि इस सूर्य मंदिर में वर्षभर देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने का तांता लगा रहता है, लेकिन विशेषकर रविवार के दिन दूर-दूर से लोग हवन और पूजन करने पहुंचते हैं.

ऐसी अटूट मान्यता है कि आज तक इस दरबार से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटा है. मनोवांछित फल की प्राप्ति के बाद श्रद्धालु कार्तिक या चैत्र छठ पर्व पर यहां आकर सूर्य देव को पुनः अर्घ्य समर्पित करते हैं.

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