पिता के बाद बेटे ने संभाली वर्दी की विरासत, औरंगाबाद के अमित कुमार बने लेफ्टिनेंट ; उमरचक में सम्मान के साथ गूंजा भारत माता का जयघोष

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लेफ्टिनेंट अमित कुमार का स्वागत करते स्थानीय नागरिक

दाउदनगर के उमरचक में लेफ्टिनेंट अमित कुमार का पैतृक घर आते ही जश्न का माहौल बन गया. पिता की तरह ही भारतीय सेना में अफसर बनकर उन्होंने देश सेवा के लिए वर्दी संभाली है.

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Amit Kumar Becomes Lieutenant : मेहनत, लगन और बचपन से देखे गए सपने को हकीकत में बदलकर इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट बने अमित कुमार जब अपने शहर दाउदनगर लौटे, तो उमरचक इलाका देशभक्ति के रंग में डूब गया. एनएच-139 स्थित दाउदनगर-पटना मुख्य पथ पर उमरचक के पास स्थानीय नागरिकों, सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व सैनिक संघ की अनुमंडल इकाई के सदस्यों ने उनका भव्य स्वागत किया. जैसे ही अमित वहां पहुंचे, भारत माता की जय के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा. खुशी में जमकर आतिशबाजी भी की गई.

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अमित कुमार की सफलता सिर्फ उनके परिवार की खुशी नहीं थी, बल्कि यह पूरे इलाके के लिए गर्व का मौका बन गई. वार्ड संख्या 26 स्थित उनके पैतृक इलाके उमरचक में उनके स्वागत के लिए मोहल्ले को आकर्षक तरीके से सजाया गया था. लोगों में अपने बीच के बेटे की उपलब्धि को लेकर खास उत्साह नजर आया.

घर पहुंचते ही बहन ने उतारी आरती, काटा गया केक

अमित जैसे ही अपने घर पहुंचे, परिवार के लोगों की आंखों में खुशी साफ दिखाई दे रही थी. बहन ने आरती उतारकर भाई का स्वागत किया. इसके बाद केक काटकर उनकी सफलता का जश्न मनाया गया.

स्थानीय लोगों ने अमित को माला पहनाकर और बुके देकर सम्मानित किया. हर कोई उन्हें आगे की सैन्य सेवा के लिए शुभकामनाएं दे रहा था. किसी के चेहरे पर खुशी थी, तो कोई अमित की सफलता को इलाके के दूसरे युवाओं के लिए मिसाल बता रहा था.

स्वागत समारोह में लगी लोगों की

स्वागत समारोह में पूर्व सैनिक संघ के अनुमंडल अध्यक्ष जनेश्वर सिंह सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, राजद प्रखंड अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह, युवा राजद नेता अजीत यादव, कांग्रेस के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष आरपी यादव, अंकोढ़ा पैक्स अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह उर्फ चुन्नू यादव समेत बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे.

पिता से मिली सेना में जाने की प्रेरणा

लेफ्टिनेंट अमित कुमार ने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि 24 सितंबर 2025 से वे गया स्थित सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे. सेना में जाने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली.

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अमित ने बेंगलुरु से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में अधिकारी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया. उन्होंने परीक्षा दी और एनडीए की परीक्षा उत्तीर्ण कर सैन्य प्रशिक्षण हासिल किया.

बचपन से ही इंडियन आर्मी का देखा था सपना

अमित ने कहा कि बचपन से ही उनका सपना इंडियन आर्मी में अफसर बनने का था. इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत और लगन के साथ तैयारी की. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और वे भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने में सफल रहे.

उनकी कहानी यह बताती है कि सपने सिर्फ देखने से पूरे नहीं होते, बल्कि उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत, अनुशासन और धैर्य की जरूरत होती है. अमित ने लंबे समय तक अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और हर चुनौती का सामना करते हुए सफलता हासिल की.

रिटायर्ड सूबेदार मेजर पिता ने कहा, बेटे ने बढ़ाया मान

अमित के पिता रिटायर्ड सूबेदार मेजर मनोज कुमार सिंह खुद भी भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं. उन्होंने बताया कि अमित के मन में बचपन से ही आर्मी अफसर बनने की इच्छा थी.

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उन्होंने कहा कि बेटे ने अपने लक्ष्य को लेकर लगातार मेहनत की और आखिरकार वह मुकाम हासिल कर लिया, जिसका सपना उसने बचपन से देखा था. अमित की सफलता ने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है.

पिता के बाद बेटे ने भी पहनी वर्दी

पिता के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि जिस वर्दी को उन्होंने खुद सम्मान के साथ पहना, उसी वर्दी में अब उनका बेटा भी देश की सेवा करेगा. यह पल पूरे परिवार के लिए भावुक और गर्व से भरा रहा.

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा की कहानी

अमित कुमार की सफलता को स्थानीय लोग इलाके के युवाओं के लिए प्रेरणा मान रहे हैं. युवा राजद नेता अजीत यादव ने कहा कि अमित ने लेफ्टिनेंट बनकर पूरे औरंगाबाद जिले को गौरवान्वित किया है.

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कांग्रेस के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष आरपी यादव ने कहा कि अमित की उपलब्धि पूरे जिले के लिए खुशी और गौरव का विषय है. उनकी बहन ने भी भाई को बधाई देते हुए कहा कि अमित का लेफ्टिनेंट बनना पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है.

पूर्व सैनिक संघ के अनुमंडल अध्यक्ष का बयान

पूर्व सैनिक संघ के अनुमंडल अध्यक्ष जनेश्वर सिंह ने कहा कि अमित की सफलता पर पूरा पूर्व सैनिक संघ गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उन्होंने कहा कि अमित की उपलब्धि क्षेत्र के युवाओं को भारतीय सेना में जाने और देशसेवा के लिए आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी.

दाउदनगर का यह सम्मान समारोह सिर्फ एक युवा अधिकारी के स्वागत तक सीमित नहीं रहा. यह उस सपने और संघर्ष की कहानी बन गया, जिसमें एक छोटे से इलाके का बेटा कड़ी मेहनत के दम पर भारतीय सेना में अधिकारी बना. अमित कुमार ने साबित कर दिया कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो रास्ते की मुश्किलें मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं.

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