नेत्र सहायक की हुई तैनाती, लेकिन उपकरण नदारद, दाउदनगर पीएचसी में आंख जांच सेवा शुरू होने से पहले ही खड़ी हुई चुनौती

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नेत्र सहायक की हुई तैनाती, लेकिन उपकरण नदारद, दाउदनगर पीएचसी में आंख जांच सेवा शुरू होने से पहले ही खड़ी हुई चुनौती

Aurangabad News: नेत्र सहायक की हुई तैनाती, सरकार की पहल से ग्रामीण मरीजों को मिलेगी राहत , उपकरण और दवाओं के अभाव में फिलहाल सीमित रह सकती है सेवा

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Aurangabad News: (ओम प्रकाश) ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रखंड स्तरीय सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेत्र सहायकों की पदस्थापना शुरू की है. इसी क्रम में औरंगाबाद जिले के दाउदनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में नेत्र सहायक पलक कुमारी ने योगदान दे दिया है.

हालांकि स्वास्थ्य विभाग की इस पहल पर उस समय सवाल खड़े होने लगे हैं, जब पीएचसी में आंखों की जांच से संबंधित आवश्यक उपकरणों और दवाओं का अभाव बना हुआ है. ऐसे में सेवा शुरू होने से पहले ही कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आ गई हैं.

प्रारंभिक जांच और स्कूलों में स्क्रीनिंग की जिम्मेदारी

जानकारी के अनुसार नेत्र सहायक का मुख्य कार्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों की आंखों की प्रारंभिक जांच करना है. इसमें दृष्टि परीक्षण, मोतियाबिंद की पहचान, सामान्य नेत्र रोगों की जांच तथा आवश्यक परामर्श शामिल है.

इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत विद्यालयों में जाकर स्कूली बच्चों की आंखों की जांच भी नेत्र सहायक को करनी होगी. इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्थानीय स्तर पर नेत्र जांच की सुविधा मिलने की उम्मीद है.

जरूरी उपकरणों के बिना कैसे होगी प्रभावी जांच

विडंबना यह है कि इन कार्यों के लिए जरूरी उपकरण फिलहाल पीएचसी में उपलब्ध नहीं हैं. स्वास्थ्य केंद्र के सूत्रों का कहना है कि बिना उपकरणों के नेत्र सहायक केवल सीमित स्तर पर ही कार्य कर पाएंगे.

आंखों की सटीक जांच के लिए विजन चार्ट, टॉर्च, रेटिनोस्कोप, ऑटो-रेफ्रैक्टोमीटर, स्लिट लैम्प समेत कई आवश्यक उपकरणों की जरूरत होती है, जिनकी उपलब्धता अभी नहीं है. ऐसे में मरीजों और स्कूली बच्चों की प्रभावी जांच कैसे होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है.

विभाग को भेजी गई है मांग

इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनमोल कुमार ने बताया कि नेत्र सहायक की ड्यूटी पीएचसी में निर्धारित कर दी गई है. आंखों की जांच से संबंधित उपकरणों और आवश्यक दवाओं की मांग विभागीय स्तर पर भेजी गई है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिसके बाद पीएचसी में नियमित रूप से नेत्र जांच की सुविधा शुरू हो सकेगी.

अनुमंडलीय अस्पताल में भी संसाधनों की कमी

यदि दाउदनगर में सरकारी स्तर पर नेत्र चिकित्सा सुविधाओं की बात करें तो अनुमंडलीय अस्पताल में नेत्र रोग विशेषज्ञ और नेत्र परीक्षक की व्यवस्था है. यहां प्रतिदिन औसतन दो दर्जन मरीजों की आंखों की जांच की जाती है.

हालांकि वहां भी कई महत्वपूर्ण उपकरणों का अभाव है, जिसके कारण केवल सामान्य जांच ही संभव हो पाती है. मोतियाबिंद ऑपरेशन समेत अन्य उन्नत नेत्र उपचार की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं.

संसाधन मिलने के बाद ही मिलेगी योजना को गति

दाउदनगर पीएचसी में नेत्र सहायक की तैनाती निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन उपकरणों और दवाओं की अनुपलब्धता के कारण यह पहल फिलहाल अधूरी नजर आ रही है.

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि स्वास्थ्य विभाग जल्द ही संसाधनों की कमी दूर करेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को उनके घर के नजदीक बेहतर और सुलभ नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी.

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विवेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By विवेक पाण्डेय

विवेक रंजन पाण्डेय पिछले 8 वर्षों से टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने Aryabhatta Knowledge University, Patna से BJMC की पढ़ाई की है.

उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत Network 10 टीवी चैनल से की. इसके बाद News India, News18 Digital सहित कई राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और कंटेंट राइटिंग का अनुभव प्राप्त किया.

वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में Content Writer के रूप में कार्यरत हैं. यहां बिहार की राजनीति, चुनाव, शिक्षा, कृषि, रोजगार, सरकारी योजनाओं, सामाजिक सरोकारों और विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों पर तथ्यपरक और विश्वसनीय खबरें पाठकों तक पहुंचाते हैं.

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