औरंगाबाद में आद्रा नक्षत्र सिर पर, फिर भी माली रजवाहा नहर सूखी
Published by : Vivek Pandey Updated At : 04 Jun 2026 7:48 AM
Aurangabad News: औरंगाबाद में पानी के इंतजार में किसान, खरीफ खेती की तैयारी पर मंडराया संकट,लोगो को हो रही परेशानी,पढ़िए नीचे पूरी खबर.
(औरंगाबाद से मणिकांत पांडेय की रिपोर्ट)
Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के हसनपुर प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली माली रजवाहा नहर में अब तक पानी नहीं छोड़े जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. जून का पहला सप्ताह बीत चुका है और कुछ ही दिनों बाद आद्रा नक्षत्र शुरू होने वाला है, जिसे किसान खरीफ खेती की शुरुआत का सबसे महत्वपूर्ण समय मानते हैं. इसके बावजूद नहर पूरी तरह सूखी पड़ी है.
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो धान की बिचड़ा तैयार करने, खेतों की जुताई कराने और अन्य कृषि कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. क्षेत्र के अधिकांश किसान धान की खेती पर निर्भर हैं और खरीफ मौसम में सिंचाई के लिए नहर का पानी ही उनका प्रमुख सहारा होता है.
सिंचाई व्यवस्था ठप, बढ़ी किसानों की चिंता
किसानों के अनुसार इस वर्ष अब तक नहर में पानी नहीं पहुंचने से खेती की तैयारी प्रभावित हो रही है। कई किसानों ने बताया कि डीजल पंप से सिंचाई करना काफी महंगा पड़ता है. ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों के सामने खेती का संकट खड़ा हो सकता है.
आद्रा नक्षत्र के दौरान खेतों की तैयारी और धान की नर्सरी लगाने का कार्य शुरू हो जाता है, लेकिन नहर में पानी नहीं रहने के कारण कई किसान अब तक अपनी तैयारी शुरू नहीं कर सके हैं. किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही तो खेती का पूरा चक्र प्रभावित हो सकता है.
समय पर पानी नहीं मिला तो बढ़ेगी खेती की लागत
स्थानीय किसानों का कहना है कि नहर का पानी नहीं मिलने पर उन्हें निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ेगी, जिससे खेती की लागत कई गुना बढ़ जाएगी. बढ़ती डीजल कीमतों के बीच यह किसानों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा.
किसानों ने की तत्काल पानी छोड़ने की मांग
किसानों ने सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन से अविलंब माली रजवाहा नहर में पानी छोड़ने की मांग की है. उनका कहना है कि सरकार कृषि को बढ़ावा देने की बात करती है, लेकिन समय पर सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
किसानों की जुबानी
नरेंद्र ठाकुर (किसान) ने कहा, “हर साल इस समय तक नहर में पानी आ जाता था, लेकिन इस बार अभी तक नहर सूखी है. आद्रा नक्षत्र आने वाला है और हम लोग खेती की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं
मुन्ना कुमार सिंह (किसान) ने कहा, “डीजल की कीमत लगातार बढ़ रही है. नहर का पानी नहीं मिलने से निजी साधनों से सिंचाई करना मजबूरी बन जाएगा, जिससे खेती की लागत काफी बढ़ जाएगी.

शत्रुघ्न सिंह (किसान) ने कहा, “धान की खेती पानी के बिना संभव नहीं है. यदि समय पर पानी नहीं मिला तो बिचड़ा तैयार करने में देरी होगी और पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.

चंद्रशेखर प्रसाद (किसान) ने कहा, “सिंचाई विभाग को किसानों की समस्या समझनी चाहिए. खेती का समय निकलता जा रहा है, लेकिन नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है.

सतीश कुमार (किसान) ने कहा, “छोटे किसान सबसे अधिक परेशान हैं. जिनके पास निजी बोरिंग नहीं है, वे पूरी तरह नहर के पानी पर निर्भर रहते हैं, लेकिन अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है.

रामजीत कुमार (किसान) ने कहा, “सरकार और प्रशासन को तत्काल पहल करनी चाहिए. यदि अगले कुछ दिनों में पानी नहीं आया तो धान की खेती पर गंभीर असर पड़ेगा और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

आंदोलन की चेतावनी
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो वे सामूहिक रूप से सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या उठाएंगे. किसानों की मांग है कि खरीफ मौसम को देखते हुए माली रजवाहा नहर में अविलंब पानी छोड़ा जाए, ताकि समय पर खेती की तैयारी पूरी हो सके.
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लेखक के बारे में
By Vivek Pandey
विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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