नक्सल क्षेत्र के मतदाताओं ने बुलेट का जबाव दिया बैलेट से
Updated at : 12 Apr 2019 12:46 AM (IST)
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विनय कुमार सिंह, मदनपुर : देश के लोकतंत्र ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि बुलेट पर बैलेट की चोट से करारा जबाव दिया जा सकता है.मदनपुर प्रखंड क्षेत्र के अतिनक्सल नक्सल प्रभावित इलाके के बूथों पर जिस तरह से बहां के मतदाताओं ने निर्भीक होकर मुखरता से मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा […]
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विनय कुमार सिंह, मदनपुर : देश के लोकतंत्र ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि बुलेट पर बैलेट की चोट से करारा जबाव दिया जा सकता है.मदनपुर प्रखंड क्षेत्र के अतिनक्सल नक्सल प्रभावित इलाके के बूथों पर जिस तरह से बहां के मतदाताओं ने निर्भीक होकर मुखरता से मतदान में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है वह निश्चित रूप से लोकतंत्र की विजय है.
खासबात यह कि यह सबसे अधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बूथ जुडाही,चिल्मी, मध्य विद्यालय छाली दोहर की बूथों पर मतदाताओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और मतदान का प्रतिशत 50 फीसदी को पार कर दिया. नक्सल प्रभावित क्षेत्र में 50 प्रतिशत मतदान मायने रखता है .
सही मायने में देखा जाये तो इसका सारा श्रेय इस क्षेत्र के आम मतदाताओं को जाता है जिन्होंने नक्सलियों की लाख चेतावनियों को सिरे से खारिज कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि क्षेत्र का विकास अशांति फैलाने से नहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनी हुई सरकार के माध्यम से ही हो सकता है.
चुनाव आयोग,सुरक्षा बलों को भी इस मायने में धन्यवाद देना होगा कि लाख चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक मतदान संपन्न कराया गया.दरअसल नक्सलियों ने इस बार अधिक भय का वातावरण बनाकर चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास किया.लगातार नक्सली पोस्टर छोड़कर लोगों को चुनाव में भाग लेने के गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दे रहे थे. नक्सली इस बार अधिक आक्रामक होकर चुनावों को प्रभावित करना चाहते थे. गंभीर परिणाम भुगतने को तैयार रहने को कहा गया.
पर ना सुरक्षा बलों ने हार मानी और ना ही मतदाताओं ने. चुनावों से पहले नक्सलियों ने जबरदस्त भय का वातावरण बनाने के प्रयास किए. पर जनता ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर बुलेट को बैलेट से करारा जबाव दिया है.
लोगों की समझ में आने लगा है कि उनका हित हिंसा का साथ देने में या हिंसक प्रवृतियों के आगे नतमस्तक होने में नहीं अपितु लोकतांत्रिक तरीके से अपना नेता चुन कर भेज कर विकास की गंगा का प्रवाह क्षेत्र में लाने में है. शिक्षा,स्वास्थ्य, सहज आवागमन के लिए सड़कों और आवागमन के साधनों की सहज उपलब्धता उन्हें मुख्य धारा से जोड़ सकती है.
देखा जाए मदनपुर प्रखंड के दक्षणि इलाके के लोगों ने जिस तरह से घर से निकल कर मतदान केन्द्र आकर अपने मताधिकार के प्रयोग से साहस का परिचय दिया है वह काबिले तारीफ है. वहीं हिंसक ताकतों को साफ संदेश दिया गया है कि बुलेट का जबाव बैलेट से आसानी से दिया जा सकता है.
सतसंग से भाग जाती है कलह
हसपुरा. प्रखंड के जलपुरा गांव स्थित देवी मंदिर के प्रांगण में श्रीमदभागवत कथा सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़़ उमड़ पड़ी . पांचवें दिन आचार्य श्री अखिलेश पांडेय ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई. श्री शुकदेव जी महाराज ने राजा परिछित को सुनाया. कहा वासुदेव जी का स्थान जिनके हृदय में आ जाय तो वे धन्य हो जाते है. माता -पिता के भावार्थ को भी समझाया.
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