अरवल में सोन नदी में बह रहा शहर का गंदा पानी, वर्षों से अटकी ट्रीटमेंट प्लांट योजना पर उठे सवाल

Published by : Karuna Tiwari Updated At : 06 Jun 2026 9:53 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Arwal News: अरवल नगर परिषद क्षेत्र का गंदा पानी बिना शोधन के सीधे सोन नदी में गिर रहा है, जिससे प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है. वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन और एनओसी मिलने के बावजूद परियोजना को अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है.

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Arwal News: अरवल शहर में नालों के गंदे पानी के शोधन की समुचित व्यवस्था नहीं होने से पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है. नगर परिषद क्षेत्र का अपशिष्ट जल सीधे सोन नदी में गिर रहा है, जिससे नदी का जल प्रदूषित हो रहा है और स्वच्छता को लेकर प्रशासनिक दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं.

बिना शोधन के सोन नदी में गिर रहा गंदा पानी

नगर परिषद क्षेत्र से निकलने वाला गंदा पानी सीधे सोन नदी में प्रवाहित किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है, जिससे नदी के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की चिंता बढ़ रही है.

जमीन मिली, फिर भी आगे नहीं बढ़ी योजना

नगर परिषद द्वारा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना के लिए बुडको को जमीन उपलब्ध करा दी गई है। वर्ष 2023 में अरवल अंचल अधिकारी ने जनकपुर घाट के समीप पांच एकड़ सरकारी भूमि के लिए एनओसी भी जारी कर दी थी, लेकिन इसके बावजूद परियोजना को अब तक अंतिम स्वीकृति नहीं मिल सकी है.

25 वार्डों की समस्या का हो सकता था समाधान

अरवल नगर परिषद क्षेत्र के 25 वार्डों का गंदा पानी इस प्रस्तावित संयंत्र में एकत्र कर शोधन किया जाना था. योजना लागू होने पर शुद्ध जल का उपयोग कृषि कार्यों में किया जा सकता था, जबकि शोधन प्रक्रिया से निकलने वाली गाद का उपयोग खाद के रूप में भी संभव था.

पर्यावरण संरक्षण के दावों पर उठ रहे सवाल

जिला मुख्यालय होने के बावजूद सोन नदी के तटीय इलाकों में गंदे पानी का सीधा प्रवाह जारी है. पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इससे नदी की स्वच्छता प्रभावित हो रही है और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सरकारी प्रयासों की प्रभावशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं.

प्रशासन ने बताई मौजूदा व्यवस्था

नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि फिलहाल नालों के नदी में गिरने वाले स्थानों पर केमिकल ड्रॉप आधारित उपकरण लगाए गए हैं. उनका दावा है कि इन उपकरणों के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर पानी के प्रभाव को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है.

ट्रीटमेंट प्लांट का इंतजार बरकरार

हालांकि अस्थायी उपायों के बावजूद शहरवासियों को अब भी स्थायी समाधान का इंतजार है. स्थानीय लोगों का मानना है कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना से न केवल प्रदूषण पर नियंत्रण मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और कृषि उपयोग के नए रास्ते भी खुलेंगे.

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लेखक के बारे में

By Karuna Tiwari

करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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