बड़हरा में गंगा का जलस्तर घटने की रफ्तार थमी, खतरे के निशान से 89 सेंटीमीटर ऊपर; बढ़ी बाढ़ प्रभावितों की चिंता
केशोपुर सरैंया मुख्य सड़क पर ट्रैक्टर से जाते लोग
गंगा के जलस्तर में पिछले दो दिनों से जारी कमी की रफ्तार शुक्रवार को काफी धीमी पड़ गई, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की चिंता बढ़ गई है. हालांकि, नदी अभी भी खतरे के निशान से 89 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे लोगों को आगे भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.
गंगा के जलस्तर में पिछले दो दिनों से जारी कमी की रफ्तार शुक्रवार को काफी धीमी पड़ गयी. शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे के बाद नदी का जलस्तर लगभग स्थिर बना रहा. बाढ़ नियंत्रण विभाग के अनुसार, शुक्रवार की शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 53.97 मीटर दर्ज किया गया. सुबह छह बजे की तुलना में शाम तक करीब चार सेंटीमीटर की कमी हुई. हालांकि, सुबह करीब 10 बजे के बाद जलस्तर में कोई विशेष बदलाव नहीं हुआ. गंगा अभी भी खतरे के निशान 53.08 मीटर से करीब 89 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है.
दो दिनों की तुलना में शुक्रवार को काफी धीमी रही कमी
जलस्तर घटने की रफ्तार धीमी पड़ने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गयी है. बुधवार को 12 घंटे में गंगा के जलस्तर में करीब आठ सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी थी. गुरुवार को भी 12 घंटे में करीब आठ सेंटीमीटर पानी घटा था. वहीं, शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक महज करीब चार सेंटीमीटर की कमी दर्ज हुई.
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, शुक्रवार दोपहर तक जलस्तर में करीब तीन सेंटीमीटर की कमी हुई थी. इसके बाद नदी का जलस्तर लगभग स्थिर हो गया.
ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ोतरी का असर
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले दो दिनों में जलस्तर बढ़ने का असर भोजपुर में भी पड़ा है. इलाहाबाद और कानपुर क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में हुई बढ़ोतरी के कारण बड़हरा में नदी के घटने की रफ्तार प्रभावित हुई है.
अधिकारियों के अनुसार, ऊपरी क्षेत्रों से आया पानी आगे निकलने के बाद अगले एक-दो दिनों में गंगा के जलस्तर में फिर धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है.
केशोपुर-बखोरापुर सड़क पर बाइक परिचालन बंद
इधर, बड़हरा में केशोपुर से बखोरापुर होते हुए सरैया जाने वाली सड़क पर अब भी बाढ़ का पानी जमा है. पानी अधिक होने के कारण इस सड़क पर बाइक का परिचालन बंद है. सुरक्षा को देखते हुए पुलिस की तैनाती की गयी है और बाइक सवारों को पानी वाले हिस्से से आगे जाने से रोका जा रहा है. हालांकि, ट्रैक्टर के जरिये लोग आवागमन कर रहे हैं. कई स्थानों पर नाव भी ग्रामीणों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन बनी हुई है.
बाजार और इलाज के लिए नाव-ट्रैक्टर का सहारा
जरूरी काम, बाजार और इलाज के लिए लोगों को अब भी नाव और ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर में कमी से उन्हें बाढ़ का पानी जल्द उतरने की उम्मीद जगी थी, लेकिन शुक्रवार को पानी घटने की रफ्तार धीमी पड़ने से उनकी चिंता फिर बढ़ गयी है.
पानी उतरने के बाद ही सामान्य होगा आवागमन
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क से पानी पूरी तरह उतरने और जलस्तर में लगातार कमी आने के बाद ही बाइक समेत छोटे वाहनों का परिचालन सामान्य हो सकेगा. फिलहाल बाढ़ का पानी कई इलाकों में जमा रहने के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित है. प्रशासन और बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है.
फिलहाल गंगा का जलस्तर 53.97 मीटर पर है और खतरे के निशान से 89 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. घटने की रफ्तार थमने के बावजूद नदी में फिलहाल बढ़ोतरी दर्ज नहीं हुई है. अगले एक-दो दिनों में जलस्तर में फिर कमी आने की उम्मीद से बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत की आस है.
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