सोनपुर मेला में इस बार दिखेगा बिहार के विकास का मॉडल, एडवेंचर और वॉटर स्पोर्ट्स का भी होगा आयोजन

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Nov 2023 4:45 PM

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सोनपुर मेला में इस बार पैरासेलिंग, वाटर क्लाइम्बिंग, हॉट एयर बैलून राइड, आर्चरी जैसे एक्टिविटी प्रमुख आकर्षण बनेंगे. इसके अलावा वाटर स्पोर्ट्स के अंतर्गत स्पीड बोट, वाटर बोट, बनाना सर्फिंग भी का भी लोग मजा ले सकेंगे.

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बिहार के सारण जिले के सोनपुर में 32 दिनों तक चलने वाला विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक एवं धार्मिक हरिहर क्षेत्र मेला का उद्घाटन 25 नवंबर को राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव करेंगे. इस दौरान बिहार सरकार के आधा दर्जन मंत्री, सांसद, विधायक, विधान पार्षद मौजूद रहेंगे. मेला में विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी. जिसके लिए स्टॉल लगाया जा रहा है. मेले में इस बार एडवेंचर स्पोर्ट्स एक्टिविटी तथा वाटर स्पोर्ट्स एक्टिविटी का नजारा भी देखने को मिलेगा. कला संस्कृति विभाग तथा पर्यटन विभाग भी तैयारियां को अंतिम रूप देने में लगा है.

इन एक्टिविटी का ले सकेंगे मजा

सोनपुर मेला में दूसरी बार एडवेंचर स्पोर्ट्स आयोजित होंगे. पैरासेलिंग, वाटर क्लाइम्बिंग, हॉट एयर बैलून राइड, आर्चरी जैसे एक्टिविटी इस बार मेले का प्रमुख आकर्षण बनेंगे. इसके अलावा वाटर स्पोर्ट्स के अंतर्गत स्पीड बोट, वाटर बोट, बनाना सर्फिंग भी का भी लोग मजा ले सकेंगे. कृषि विभाग, आपदा विभाग, रेलवे, पर्यटन, एसडीआरएफ, कला संस्कृति विभाग, जनसम्पर्क विभाग आदि के द्वारा भी आकर्षक प्रदर्शनी लगायी जायेगी. वहीं इस बार मेले का थीम भी बिहार की विकास की योजनाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. इस साल मुख्य सांस्कृतिक मंच से देश के नामचीन कलाकारों को देखने और सुनने का अवसर भी लोगों को मिलेगा.

50 लाख से अधिक लोगों के जुटने का अनुमान

सोनपुर मेले में हर साल लाखों की संख्या में विभिन्न जिलों से लोग पहुंचते हैं. वहीं दूसरे प्रदेशों के अलावा कुछ पड़ोसी देशों से भी इस बार बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचेंगे. जानकार बता रहे हैं कि एक दशक पहले जहां मेले में बुजुर्गों व महिलाओं की संख्या अधिक होती थी. वहीं अब ज्यादातर स्टॉल पर युवाओं की संख्या बढ़ी है. 2022 में कृषि प्रदर्शनी व आपदा विभाग के स्टाल पर दो लाख से अधिक युवाओं ने अपने नाम की इंट्री करा कर प्रदर्शनी का आकलन किया था. इसके अलावा मेले में लगे थिएटर के प्रति भी आकर्षण बढ़ा है. पिछले साल सोनपुर मेले में तीन थिएटर लगाये गये थे. पिछले साल करीब 40 लाख लोग मेले में आये थे. इस बार 50 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है.

23 डॉक्टरों को किया गया तैनात

सोनपुर मेला में स्वास्थ्य विभाग ने मेला स्टाल और स्टाल में जांच के लिए आने वाले रोगियों की जांच के लिए 23 डाक्टरों की प्रतिनियुक्ति कर दी है. मेले में मेडिसिन, गाइनी , शिशु रोग, सर्जन, ईएनटी, नेत्र रोग के चार-चार डाक्टर प्रतिनियुक्ति की गयी है. इनमें आध डाक्टर सारण जिले से और आधा तिरहुत प्रमंडल से भेजे गये हैं. डाक्टरों में तीन सर्जन भी हैं. यह सभी डाक्टर सोनपुर मेला अवधि 25 नवंबर से 26 दिसंबर तक मेला स्टाल में सेवा देंगे.

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एशिया के सबसे बड़े पशु मेला के रूप में है ख्याति

विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला की तैयारी अंतिम चरण में है. राजधानी पटना से सटे सारण जिले के सोनपुर में लगने वाला यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला के रूप मे जाना जाता था. यह मेला हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है. इस मेले को कभी छतर मेला के नाम से भी जाना जाता था. लेकिन अब लोग इस मेले को हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला के नाम से भी जानते है. हरिहर क्षेत्र सोनपुर में प्रसिद्ध और ऐतिहासिक हरिहरनाथ मन्दिर है. हरिहरनाथ मंदिर के बगल में स्थित लोक सेवा आश्रम परिसर में भगवान सूर्य एवं शनि का भव्य मंदिर भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला यह मेला आध्यात्मिक रूप से देवस्थान से शुरू होकर करीब एक महीने तक चलता है. इस मेले की शुरुआत गंगा एवं गंडक नदी में स्नान के बाद हरिहरनाथ पर जलाभिषेक एवं मंदिर में पूजा-पाठ से होती है.

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मिथिला जाने के क्रम में आये थे प्रभु राम

राजधानी पटना से लगभग 15 किमी तथा हाजीपुर से 4 से 5 किलोमीटर दूर सोनपुर में लगने वाले इस मेले ने देश दुनिया में पशु मेलों को एक अलग पहचान दी है. यहां हाथियों व घोडों की खरीद हमेशा से सुर्खियों में रहती थी. लेकिन अब हाथी के खरीद बिक्री पर पूर्ण रोक है. कहा जाता है कि मिथिला जाने के क्रम में भगवान राम ने इस स्थान पर शिव की आराधना की थी और एक मंदिर की स्थापना की. लोगों की आस्था है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहां नदी में स्नान करने वाले को मोक्ष मिलता है. चूंकि दो पशुओं के युद्ध के कारण भगवान प्रकट हुए इसलिए यहां पशुओं की खरीदी-बिक्री को शुभ माना जाता है. मेले में पशुओं का कारोबार केवल व्यापार नहीं है बल्कि यह परंपरा और आस्था दोनों का मिलाजुला स्वरूप भी है.

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