अटल बिहारी वाजपेयी का राजधर्म अब नहीं पढ़ सकेंगे 12वीं के छात्र, एनसीइआरटी ने पाठ हटाया

सीबीएसइ के 12वीं के छात्र अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का राजधर्म नहीं पढ़ सकेंगे. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) ने 12वीं की पुस्तकों पाठ्यक्रम से गुजरात दंगों से जुड़ा अध्याय हटा दिया है. इसी अध्याय में अटलजी के राजधर्म संबंधी संदेश का जिक्र किया गया है.
मुजफ्फरपुर. सीबीएसइ के 12वीं के छात्र अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का राजधर्म नहीं पढ़ सकेंगे. राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीइआरटी) ने 12वीं की पुस्तकों पाठ्यक्रम से गुजरात दंगों से जुड़ा अध्याय हटा दिया है. इसी अध्याय में अटलजी के राजधर्म संबंधी संदेश का जिक्र किया गया है.
सीबीएससी स्कूल के एक वरीय शिक्षक का कहना है कि एनसीआरटी ने कई बदलावों की घोषणा इस साल के शुरुआत में की थी, जब सीबीएसइ ने अप्रैल में अपने पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाया था. बता दें कि सीबीएसइ के अलावा कई राज्यों के बोर्ड भी एनसीइआरटी की पुस्तकों का इस्तेमाल करते हैं.
12वीं के राजनीति विज्ञान की किताब में भारतीय राजनीति के नवीनतम घटनाक्रम अध्याय के तहत वर्ष 2002 के गुजरात दंगों से जुड़ी सामग्री को हटाया जायेगा. पेज संख्या 187 से 189 को किताब से हटा दिया गया है. इस पाठ में लिखा था कि ‘गुजरात दंगों से पता चलता है कि सरकारी तंत्र भी सांप्रदायिक भावनाओं के प्रति संवेदनशील हो जाता है. यह लोकतांत्रिक राजनीति के लिए खतरा पैदा करता है. इसी पाठ में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस बयान को भी शामिल किया गया था, जिसमें उन्होंने राज धर्म का पालन करने की सलाह दी थी.
एनसीइआरटी की ओर से कहा गया है कि ये विषय अन्य सिलेबस में भी शामिल हैं, जिससे यह पाठ ओवरलैप हो रहा था. साथ ही कोरोना महामारी को देखते हुए छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करना जरूरी है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी इसी पर जोर देती है. एनसीइआरटी ने सभी किताबों को युक्तिसंगत बनाने का निर्णय लिया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट के साथ ही दलित आंदोलन पर आधारित कविता और शीत युद्ध से जुड़ी सामग्री भी हटाई जा रही है.
12वीं के ही इतिहास की किताब से मुगल दरबार को हटाया गया है. वहीं 10वीं कक्षा की पुस्तकों में से धर्म से संप्रदायवाद और राजनीति से कवि फैज अहमद फैज की कविता औरर लोकतांत्रिक राजनीति किताब से सांप्रदायवाद, धर्म निरपेक्ष राज वाले अंशों को हटाया जा रहा है. वहीं, लोकतंत्र और विविधता, लोकप्रिय संघर्ष और आंदोलन और लोकतंत्र की चुनौतियां जैसे पाठ भी पाठ्यक्रम का हिस्सा नही रहेंगे.
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