'गाली देना कूल नहीं', मनु भाकर का युवाओं को खास मैसेज; सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हुई पोस्ट
मनु भाकर (फोटो- सोशल मीडिया)
स्टार शूटर मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर युवाओं को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है. उन्होंने अपील की है कि युवा अपनी भाषा और व्यवहार पर ध्यान दें, क्योंकि यही उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है.
Manu Bhaker: भारत की स्टार निशानेबाज और ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर ने सोशल मीडिया पर एक खास संदेश शेयर करते हुए युवाओं से अपनी भाषा और व्यवहार पर ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने कहा कि गाली-गलौज करना या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना 'कूल' नहीं है.
मनु भाकर की यह पोस्ट ऐसे समय सामने आई है, जब हाल के दिनों में अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज है. हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किए गए थे. हालांकि, मनु भाकर ने अपनी पोस्ट में किसी घटना, व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके संदेश को मौजूदा बहस के संदर्भ में देखा जा रहा है.
मनु भाकर ने अपनी पोस्ट में लिखा, "हम जिस भाषा का इस्तेमाल करते हैं, वही हमारे व्यक्तित्व और हमारे चरित्र को दर्शाती है. इसलिए अपने शब्द सोच-समझकर चुनिए, क्योंकि समय के साथ आप वही बन जाते हैं, जो सोचते हैं, बोलते हैं और अभ्यास करते हैं. बुरी भाषा का इस्तेमाल करना कूल नहीं है. गाली देना भी कूल नहीं है."
'मेहनत, सम्मान और ईमानदारी ही असली कूल'
मनु ने कहा कि 'कूल' होने का मतलब दूसरों का सम्मान करना, खुद का सम्मान करना, कड़ी मेहनत करना और ईमानदारी से सफलता हासिल करना है.
कूल होने की परिभाषा सरल होनी चाहिए- मेहनती बनना, दयालु होना, दूसरों और खुद का सम्मान करना, ईमानदारी से सफलता पाने की कोशिश करना और अपने माता-पिता व देश का नाम रोशन करना. यही असली कूल है.
'गाली देना अब सामान्य माना जाने लगा है'
मनु भाकर ने चिंता जताई कि पिछले कुछ वर्षों में समाज में अपमानजनक भाषा को लेकर लोगों की सोच बदल गई है.
मैं इस बारे में इसलिए बात कर रही हूं क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में गाली-गलौज को देखने का नजरिया बदल गया है. कई लोगों के लिए इसका इस्तेमाल इतना सामान्य हो गया है कि इसे 'कूल' समझा जाने लगा है. बिना एहसास किए लोग रोजमर्रा की बातचीत में अपमानजनक और सम्मान घटाने वाले शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
मनु की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी सराहा जा रहा है. कई यूजर्स ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं के बीच सम्मानजनक भाषा और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने की जरूरत है.
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By उज्जवल सिन्हा
उज्जवल कुमार सिन्हा | स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट
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