फीफा वर्ल्ड कप के आयोजन में नंबर-1, प्रदर्शन में पीछे; अमेरिका की फुटबॉल क्रांति को अभी और इंतजार
मेजबानी में अव्वल में अमेरिका (फोटो-सोशल मीडिया)
फीफा विश्व कप 2026 में अमेरिका ने मेजबानी में नंबर-1 साबित हुआ, लेकिन टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. बड़े निवेश और टॉप कोच के बावजूद अमेरिकी टीम अंतिम-16 में हारकर बाहर हो गई. जानिए क्या रही वजह.
फीफा विश्व कप 2026 अमेरिका के लिए सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं था, बल्कि यह दुनिया के सामने अपनी फुटबॉल ताकत दिखाने का अवसर भी था. पिछले तीन दशकों में अमेरिका ने फुटबॉल को लोकप्रिय बनाने और राष्ट्रीय टीम को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर निवेश किया. इसके बावजूद अपनी ही मेजबानी में अमेरिकी टीम अंतिम-16 से आगे नहीं बढ़ सकी.
बेल्जियम के खिलाफ 1-4 की हार के साथ अमेरिका का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया. इस हार ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या भारी निवेश और बेहतरीन ढांचे के बावजूद अमेरिका अभी भी विश्व फुटबॉल की शीर्ष टीमों से पीछे है.
फुटबॉल पर 11 अरब डॉलर से अधिक का निवेश
1994 विश्व कप की मेजबानी के बाद अमेरिका ने फुटबॉल को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की रणनीति अपनाई. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार स्टेडियमों, प्रशिक्षण केंद्रों, अकादमियों और युवा विकास कार्यक्रमों पर 11 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए गए. मेजर लीग सॉकर (MLS) का तेजी से विस्तार हुआ, नए क्लब जुड़े और युवा खिलाड़ियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित की गईं. लक्ष्य था कि अमेरिका भविष्य में विश्व कप जीतने की क्षमता वाली टीम तैयार कर सके.
पोचेटिनो को सौंपी गई थी बड़ी जिम्मेदारी
विश्व कप 2026 से पहले अमेरिकी फुटबॉल महासंघ ने अर्जेंटीना के प्रसिद्ध कोच मॉरिसियो पोचेटिनो को राष्ट्रीय टीम की कमान सौंपी. पोचेटिनो इससे पहले टोटेनहैम, पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) और चेल्सी जैसे बड़े क्लबों को कोचिंग दे चुके हैं. उनसे उम्मीद थी कि वह अमेरिकी टीम को विश्व फुटबॉल की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे, लेकिन टीम नॉकआउट चरण में ही बाहर हो गई.
यूरोप में तैयार खिलाड़ियों पर भरोसा
अमेरिकी टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी यूरोप की शीर्ष लीगों में खेलते हैं. क्रिश्चियन पुलिसिक, टायलर एडम्स, वेस्टन मैकेनी, फोलारिन बालोगुन और सेर्जिन्यो डेस्ट जैसे खिलाड़ी यूरोपीय फुटबॉल संस्कृति में विकसित हुए हैं. अमेरिका ने केवल घरेलू प्रतिभाओं पर निर्भर रहने के बजाय विदेशों में तैयार खिलाड़ियों को भी राष्ट्रीय टीम में शामिल किया. इसके बावजूद टीम बड़े मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी.
लोकप्रियता बढ़ी, लेकिन नतीजे नहीं बदले
हालांकि विश्व कप 2026 ने अमेरिका में फुटबॉल की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है. स्टेडियम दर्शकों से भरे रहे, टीवी रेटिंग्स ने रिकॉर्ड बनाए और टिकटों की मांग लगातार बनी रही. मेजबानी के स्तर पर अमेरिका ने दुनिया को प्रभावित किया, लेकिन मैदान पर उसकी टीम वह सफलता हासिल नहीं कर सकी जिसकी उम्मीद की जा रही थी. अमेरिका ने साबित कर दिया कि वह विश्व कप का शानदार आयोजक बन सकता है, लेकिन विश्व फुटबॉल की महाशक्ति बनने का उसका सपना अभी अधूरा है.
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