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'कपिल के डेविल्स को सलाम', प्रो वशिष्ठ ने 1983 वर्ल्ड कप के 40 साल पर लिखी कविता, कैलेंडर भी निकाला

Updated at : 06 May 2023 6:35 PM (IST)
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'कपिल के डेविल्स को सलाम', प्रो वशिष्ठ ने 1983 वर्ल्ड कप के 40 साल पर लिखी कविता, कैलेंडर भी निकाला

पूरा भारत 1983 वर्ल्ड कप की जीत के 40 साल का जश्न मना रहा है. क्रिकेटप्रेमियों के लिए यह एक खास दिन था. इस वर्ल्ड कप में भारत की जीत ने देश में क्रिकेट की दशा और दिशा बदल दी. जिस समय भारत वर्ल्ड कप जीता था, उस समय देश में क्रिकेट का उतरा क्रेज नहीं था जितना आज है.

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साल 1983 को भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है. 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार वर्ल्ड कप जीता था. 2023 में पूरा देश भारत की ऐतिहासिक विश्व कप जीत की 40वीं वर्षगांठ मना रहा है. महान कपिल देव की अगुवाई में टीम इंडिया ने 25 जून 1983 को लंदन के लॉर्ड्स के मैदान में उस समय की धाकड़ टीम वेस्टइंडीज को फाइनल में 43 रन से हराकर वर्ल्ड कप का खिताब जीता था.

1983 वर्ल्ड कप जीत पर लिखी कविता

1983 की विश्व कप विजेता भारतीय क्रिकेट टीम को 40 साल बाद याद करते हुए मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज कालीकट के इतिहास विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो वशिष्ठ ने एक गीत की रचना की है. इसका शीर्षक ‘Kapil’s Devils’ है. प्रो वशिष्ट ने इस शीर्षक पर कहा कि ब्रिटिश अखबारों ने उस समय इसे हेडलाइन्स बनाया था, वहीं से इसकी प्रेरणा मिली. उन्होंने एक कैलेंडर भी निकाला है, जिसमें 1983 के हीरोज की तस्वीरें हैं. प्रो वशिष्ठ के इस गीत को सुरों में सजाया है उनके एक पूर्व छात्र ने. प्रो वशिष्ठ के पूर्व छात्र साईं गिरिधर ने इस कविता को गाया और संगीत दिया है.

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प्रो वशिष्ठ हैं क्रिकेट के बहुत बड़े फैन

अपनी इस रचना पर प्रो. वशिष्ठ का कहना है कि उन्हें शुरू से खेलों से काफी लगाव रहा है. जब मैं सात साल का था तब मेरे पिता ने मुझे क्रिकेट के बारे में बताया था. उसके बाद से मैं इस खेल का कट्टर प्रशंसक बन गया. मैं कोझिकोड, केरल में रहता था और वहां काफी संख्या में क्रिकेट के प्रशंसक नहीं थे, लेकिन इससे क्रिकेट के प्रति मेरा प्रेम कम नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि क्रिकेट पूरे देश को एक सूत्र में जोड़ता है. लोगों में देशभक्ति की भावना जगाता है.

क्रिकेट देश को एक सूत्र में जोड़ता है

प्रो. वशिष्ठ ने क्रिकेट पर 18 कविताओं का एक संग्रह तैयार किया है और उसका नाम दिया है नाइट वाचमैन. उन्होंने खास बातचीत में बताया कि जब भी मैं टीम इंडिया को खेलते हुए देखता था या देखता हूं तो मैं शुद्ध देशभक्त बन जाता हूं. मैं उस क्रिकेट को भी महसूस करता हूं जो दो देशों के बीच दोस्ती को बढ़ावा देने का सबसे अच्छा माध्यम है. उन्होंने कहा कि मेरी कविताएं क्रिकेट के प्रति मेरे प्रेम को दर्शाता है. गीत और कैलेंडर का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता के लिए क्रिकेट संदेश को बढ़ावा देना है.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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