फिर फंस सकती है भारत-पाक क्रिकेट श्रृखंला

नयी दिल्ली : लोकसभा में आज भाजपा के एक सदस्य ने सरकार से भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट श्रृंखला आयोजित नहीं करने की मांग करते हुए सवाल किया कि भारत में हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को शरण देने वाले देश के साथ खेल संबंध रखने की जरुरत ही क्या है ? पूर्व […]
नयी दिल्ली : लोकसभा में आज भाजपा के एक सदस्य ने सरकार से भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट श्रृंखला आयोजित नहीं करने की मांग करते हुए सवाल किया कि भारत में हमलों को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को शरण देने वाले देश के साथ खेल संबंध रखने की जरुरत ही क्या है ?
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और भाजपा सांसद आर के सिंह ने आज लोकसभा में शून्यकाल में यह मामला उठाते हुए कहा कि ऐसे समय में जब आतंकवादी सरगना हाफिज सईद पाकिस्तान में आजाद घूम रहा है और एक अन्य आतंकवादी जकीउर रहमान लखवी को फिर से जमानत दे दी गयी है , सरकार को क्रिकेट श्रृंखला के आयोजन संबंधी फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.
उन्होंने कहा, उनके साथ क्रिकेट खेलने का क्या मतलब है. मुझे समझ नहीं आता. उनके द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने पर अधिकतर भाजपा सदस्य जहां चुप रहे वहीं विपक्षी सदस्यों ने उनका समर्थन किया. ऐसी रिपोर्टे हैं कि भारत दिसंबर में लगभग एक दशक में पहली बार द्विपक्षीय श्रृंखला में पाकिस्तान के साथ खेल सकता है.
भारत और पाकिस्तान के बीच दोबारा द्विपक्षीय क्रिकेट संबंध शुरु करने की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के प्रमुख शहरयार खान ने कल कोलकाता में कहा था कि उनका देश दिसंबर में यूएई में श्रृंखला की मेजबानी के लिए तैयार है.
इस श्रृंखला में तीन टेस्ट, पांच वनडे और दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे और दोनों देशों के बीच 2014 में जिस सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए थे ये श्रृंखला उसका हिस्सा है. शहरयार अब इस समझौते को पूरा करना चाहते हैं.
बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया के साथ यहां बैठक के बाद शहरयार ने कहा, हम यूएई में भारत-पाक श्रृंखला दोबारा शुरु करेंगे. यह भारत-पाक क्रिकेट की दोबारा शुरुआत होगी.
शहरयार के साथ 30 मिनट की बैठक के बाद डालमिया ने भी दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंध दोबारा शुरु होने की उम्मीद जताई लेकिन साथ ही गेंद सरकार के पाले में डाल दी.
डालमिया ने कहा, हमें श्रृंखला दोबारा शुरु होने की उम्मीद है. सिर्फ कुछ चीजों का समाधान निकालने की जरुरत है और बेशक आम सहयोग के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते. गृह मंत्रालय और सरकार के समर्थन के बिना हम आगे नहीं बढ़ सकते.
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