घर के मंदिर में भूलकर भी न रखें भगवान की ऐसी मूर्तियां, बढ़ सकता है वास्तु दोष

Updated:
विज्ञापन

वास्तु दोष करें दूर, ऐसी मूर्तियों को घर से हटाएं

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

घर के मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित करते समय वास्तु शास्त्र और धार्मिक परंपराओं के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं. विभिन्न संप्रदायों और क्षेत्रों में इन नियमों में भिन्नता भी हो सकती है. इसलिए पूजा या मूर्ति स्थापना से पहले योग्य आचार्य या पुरोहित से परामर्श लेना उचित माना जाता है.

विज्ञापन

Vastu Tips: सनातन परंपरा में घर के मंदिर का विशेष महत्व माना गया है. वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी-देवताओं की मूर्तियों की दिशा, संख्या और स्वरूप का ध्यान रखना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं इससे जुड़े प्रमुख नियम.

विज्ञापन

धार्मिक मान्यता और वास्तु का महत्व

हिंदू धर्म में सुबह स्नान के बाद भगवान के दर्शन करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है. वास्तु शास्त्र भी पूजा स्थल को घर का सबसे पवित्र स्थान मानता है. इसलिए मूर्तियों की स्थापना करते समय शास्त्रीय नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:

  • सुबह स्नान के बाद भगवान के दर्शन करना शुभ माना जाता है.
  • इससे मन में सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है.
  • पूजा स्थल को घर का सबसे पवित्र स्थान माना गया है.
  • मूर्ति स्थापना में शास्त्रीय नियमों का पालन करना उचित माना जाता है.

कैसी मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए?

वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर के मंदिर में खंडित या टूटी हुई मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए. यदि किसी प्रतिमा को क्षति पहुंच जाए तो उसे श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र जलाशय में विसर्जित करने या स्थानीय परंपरा एवं योग्य पुरोहित की सलाह के अनुसार उचित स्थान पर स्थापित करने की परंपरा है. साथ ही भगवान के रौद्र, युद्ध या संहार रूप की प्रतिमाओं के स्थान पर सौम्य और आशीर्वाद मुद्रा वाली प्रतिमा को अधिक शुभ माना जाता है.

इन बातों का रखें ध्यान:

  • खंडित या टूटी हुई मूर्तियां पूजा घर में न रखें.
  • क्षतिग्रस्त प्रतिमा का सम्मानपूर्वक विसर्जन या उचित स्थान पर स्थापना करें.
  • भगवान के रौद्र या संहार रूप की प्रतिमाओं की बजाय सौम्य स्वरूप को प्राथमिकता दें.
  • मूर्तियों का हमेशा सम्मानपूर्वक रखरखाव करें.

मूर्ति की संख्या, दिशा और आकार का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा घर में एक ही देवता की अनेक मूर्तियां या तस्वीरें एक साथ रखने से बचना चाहिए. मूर्तियां इस प्रकार स्थापित हों कि उनका सम्मान बना रहे. इसके अलावा घर के मंदिर में बहुत बड़ी प्रतिमाओं के बजाय छोटी प्रतिमाएं स्थापित करने की परंपरा भी प्रचलित है. विभिन्न ग्रंथों और परंपराओं में इसके अलग-अलग निर्देश मिलते हैं.

मूर्ति स्थापना के प्रमुख नियम:

  • एक ही देवता की कई मूर्तियां या तस्वीरें एक साथ रखने से बचें.
  • मूर्तियों को सम्मानजनक स्थान पर स्थापित करें.
  • घर के मंदिर में अपेक्षाकृत छोटी प्रतिमाएं रखना अधिक प्रचलित माना जाता है.
  • स्थानीय परंपरा और शास्त्रीय निर्देशों का पालन करें.

विशेष सावधानी

वास्तु शास्त्र से जुड़े ये नियम धार्मिक आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं. यदि आप घर में नया मंदिर बना रहे हैं या मूर्ति स्थापित करने जा रहे हैं, तो स्थानीय परंपरा और किसी योग्य आचार्य के मार्गदर्शन का पालन करना बेहतर माना जाता है. श्रद्धा, स्वच्छता और नियमित पूजा को ही घर में सकारात्मक वातावरण का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना गया है.


ये भी पढ़ें: ज्योतिष के अनुसार ये आदतें बढ़ा सकती हैं ग्रहों का अशुभ प्रभाव, समय रहते बदलें अपनी दिनचर्या


अंत में ध्यान रखें:

  • श्रद्धा और स्वच्छता को सर्वोच्च महत्व दें.
  • नियमित पूजा-अर्चना करें.
  • मूर्ति स्थापना से पहले योग्य आचार्य से सलाह लेना लाभकारी हो सकता है.
  • स्थानीय धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें.



विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola