सीढ़ियों से लेकर सेप्टिक टैंक तक, घर बनाते समय किन दिशाओं का रखें खास ध्यान?

Updated:
विज्ञापन

नए घर में सीढ़ियो से लेकर सेप्टिक टैंक के लिए सही वास्तु है जरूरी

भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को भवन निर्माण और सकारात्मक ऊर्जा का महत्वपूर्ण विज्ञान माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर बनाते समय दिशा, कमरों की स्थिति और निर्माण संबंधी नियमों का ध्यान रखने से सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनता है. इसलिए इन्हें धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों के रूप में समझना उचित है तथा भवन निर्माण से पहले योग्य वास्तु विशेषज्ञ और तकनीकी विशेषज्ञ दोनों की सलाह लेना लाभदायक हो सकता है.

विज्ञापन

Vastu Tips: भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका उल्लेख अथर्ववेद में मिलता है और इसे भवन निर्माण एवं निवास से जुड़ा महत्वपूर्ण शास्त्र माना जाता है. पंडित पुरनेंदु पाठक बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि यदि घर का निर्माण दिशा और वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किया जाए तो परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. वहीं, वास्तु दोष होने पर जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इन मान्यताओं के पक्ष में आधुनिक विज्ञान के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इन्हें धार्मिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए.

क्या वास्तु दोष से बढ़ सकती हैं पारिवारिक समस्याएं?

वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि भवन का निर्माण गलत दिशा या दोषयुक्त तरीके से किया गया हो, तो परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, आपसी मतभेद, मानसिक अशांति और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं. पारंपरिक मान्यता यह भी कहती है कि घर में लगातार नकारात्मक घटनाएं होना या परिवार में तालमेल की कमी कभी-कभी वास्तु दोष से भी जुड़ी मानी जाती है. इसी कारण भवन निर्माण से पहले भूमि परीक्षण और विधिपूर्वक भूमि पूजन की सलाह दी जाती है.

घर बनाते समय इन दिशाओं का रखें ध्यान

वास्तु मान्यताओं के अनुसार सीढ़ियां उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में नहीं बनानी चाहिए. इन्हें अन्य दिशाओं में बनाना अधिक शुभ माना जाता है. वहीं सेप्टिक टैंक का आउटलेट उत्तर या पश्चिम दिशा की ओर होना उचित माना गया है. उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण-पश्चिम दिशा में सेप्टिक टैंक बनाने से बचने की सलाह दी जाती है.

कार्यालय और अध्ययन कक्ष की सही दिशा

वास्तु शास्त्र के अनुसार कार्यालय प्रमुख या व्यवसाय संचालक का बैठने का स्थान दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए और उनका मुख उत्तर या पूर्व की ओर होना शुभ माना जाता है. कुर्सी के पीछे दरवाजा या खिड़की न होने की भी सलाह दी जाती है. विद्यार्थियों के लिए अध्ययन कक्ष उत्तर-पूर्व दिशा में उपयुक्त माना गया है. पढ़ाई करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखने की परंपरागत मान्यता है.

अतिथि कक्ष और ड्राइंग रूम की दिशा

वास्तु के अनुसार अतिथि कक्ष पश्चिम, उत्तर या वायव्य (उत्तर-पश्चिम) दिशा में बनाना शुभ माना जाता है. वहीं ड्राइंग रूम पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलित वातावरण बना रहता है.

आस्था के साथ व्यावहारिकता भी जरूरी

वास्तु शास्त्र भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा करोड़ों लोग इसकी मान्यताओं का पालन करते हैं. यदि आप नया घर बना रहे हैं या खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो वास्तु संबंधी सुझावों के साथ-साथ भवन की संरचनात्मक सुरक्षा, इंजीनियरिंग गुणवत्ता और कानूनी पहलुओं का भी ध्यान रखें. संतुलित दृष्टिकोण अपनाना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है.


विज्ञापन
शौर्य पुंज

लेखक के बारे में

By शौर्य पुंज

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola