परिवर्तिनी एकादशी पर करें इस व्रत कथा का पाठ, भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में आएंगी खुशियां
व्रत कथा का पाठ करते श्रद्धालुओं की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करना बहुत ही शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि व्रत कथा का पाठ करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं.
Parivartini Ekadashi Vrat Katha: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार के दिन रखा जाएगा. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. हर साल यह भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान करवट लेते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को करने से पाप और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं. साथ ही, जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है.
परिवर्तिनी एकादशी की पौराणिक व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मान्धाता नाम के एक राजा थे. वे अपनी प्रजा का पालन-पोषण संतान की तरह करते थे. उनके राज्य में सभी लोग सुखी और समृद्ध थे. प्रजा अपने धर्म का पालन करती थी और राज्य में किसी तरह का संकट नहीं था.
लेकिन एक समय ऐसा आया, जब राजा मान्धाता के राज्य में लगातार तीन वर्षों तक बारिश नहीं हुई. बारिश न होने के कारण भयंकर सूखा पड़ गया. खेत सूख गए और अन्न-जल की कमी होने लगी. प्रजा भूख और प्यास से परेशान हो गई. राज्य के लोग राजा मान्धाता के पास पहुंचे और अपनी समस्या बताई. प्रजा की परेशानी देखकर राजा मान्धाता भी चिंतित हो गए. उन्होंने संकट का कारण जानने और उसका समाधान खोजने का निर्णय लिया. इसके बाद वे जंगल की ओर निकल पड़े.
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अंगिरा ऋषि ने बताया एकादशी व्रत का उपाय
जंगल में घूमते हुए राजा मान्धाता की मुलाकात महर्षि अंगिरा से हुई. राजा ने ऋषि को प्रणाम किया और अपने राज्य में पड़े अकाल के बारे में बताया. उन्होंने ऋषि से संकट का कारण और उससे मुक्ति का उपाय पूछा.
राजा की बात सुनकर अंगिरा ऋषि ने कहा कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली परिवर्तिनी एकादशी आने वाली है. इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और संकट दूर होते हैं. ऋषि ने राजा को भी यह व्रत करने की सलाह दी.
ऋषि की बात सुनकर राजा मान्धाता अपने राज्य लौट आए. उन्होंने परिवर्तिनी एकादशी के दिन अपनी प्रजा, परिवार और मंत्रियों के साथ मिलकर विधि-विधान से व्रत रखा और भगवान विष्णु की पूजा की.
व्रत के प्रभाव से दूर हुआ अकाल
भगवान विष्णु की कृपा से राज्य में बारिश हुई और दोबारा हरियाली लौट आई. खेतों में फसलें लहलहाने लगीं और राज्य में अन्न-जल की कमी दूर हो गई. इस तरह राजा मान्धाता का राज्य फिर से सुख और समृद्धि से भर गया.
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