जुलाई में कब है संकष्टी चतुर्थी? जानें व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

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Sankashti Chaturthi

भगवान गणेश

Sankashti Chaturthi 2026: संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक प्रमुख व्रत है. जुलाई महीने की संकष्टी चतुर्थी 3 जुलाई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी. यदि आप भी यह व्रत रखने की सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए है. यहां संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और भगवान गणेश की पूजा विधि के बारे में बताया गया है.

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Sankashti Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है. आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली इस चतुर्थी को ‘कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा सुख-शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 3 जुलाई 2026, सुबह 11:21 बजे से
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 4 जुलाई 2026, दोपहर 12:40 बजे तक
  • चंद्रोदय: रात 09:51 बजे (स्थान के अनुसार समय में थोड़ा बदलाव संभव है)

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में रात्रि के समय चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देना अनिवार्य माना जाता है. चूंकि 3 जुलाई की रात को चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए यह व्रत 3 जुलाई 2026 को ही रखा जाएगा.

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के ‘कृष्णपिंगल’ स्वरूप की पूजा की जाती है. इस स्वरूप का वर्ण भूरा और काला माना जाता है. मान्यता है कि इस विशेष दिन भगवान गणेश स्वयं अपने भक्तों के सभी दुखों और विघ्नों को दूर करने के लिए पृथ्वी पर विचरण करते हैं. जो भक्त इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत रखते हैं, उन्हें भय, भ्रम और मानसिक अशांति से मुक्ति मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है.

कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  • सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद हाथ में जल लेकर भगवान गणेश के समक्ष व्रत का संकल्प लें. दिनभर फलाहार करें या अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करें.
  • पूजा स्थल पर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. उन्हें लाल पुष्प, अक्षत, चंदन और प्रिय दूर्वा अर्पित करें. गणपति बप्पा को मोदक या बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं.
  • इसके बाद ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें. संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें. अंत में भगवान गणेश की आरती करें.
  • रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल और दूध से अर्घ्य अर्पित करें. चंद्र देव की पूजा करने के पश्चात ही अपना व्रत खोलें.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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