Gemstone Astrology: शुभ समझकर पहना रत्न कहीं उल्टा असर न कर दे, पहनने से पहले जरूर जानें ये बातें
रत्न की सांकेतिक तस्वीर (एआई)
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर रत्न हर किसी के लिए शुभ नहीं होता. कोई भी रत्न पहनने से पहले अपनी जन्म कुंडली का गहन विश्लेषण कराना महत्वपूर्ण है. जानें क्यों और कैसे चुनें सही रत्न.
Gemstone Astrology: ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का विशेष महत्व बताया गया है. कहते हैं कि हर रत्न में अपनी दैवी शक्ति होती है. रत्न को जन्म कुंडली के अनुसार धारण किया जाता है. मान्यता है कि अलग-अलग रत्नों का संबंध अलग-अलग ग्रहों से होता है और सही रत्न धारण करने से संबंधित ग्रह के शुभ प्रभाव मजबूत होते हैं. ज्योतिषाचार्य न. के. वेरा जी के अनुसार, हर रत्न हर व्यक्ति के लिए शुभ नहीं होता. इसलिए कोई भी रत्न पहनने से पहले कुंडली में ग्रहों की स्थिति को समझना जरूरी माना जाता है.

कुंडली देखकर ही रत्न चुनें
जन्म कुंडली में जो ग्रह शुभ और कारक हो, उसी ग्रह से संबंधित रत्न धारण करना चाहिए. खासकर उस ग्रह का रत्न पहनने की सलाह दी जाती है, जो कुंडली में शुभ स्थिति में हो और जिसकी दशा या अंतरदशा चल रही हो. यदि कोई शुभ ग्रह कुंडली में कमजोर या अस्त हो, तो ज्योतिष में उसका रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है. वहीं, भाग्येश कमजोर या अस्त हो, तो उसका रत्न भी धारण करना लाभकारी माना जाता है.
अशुभ ग्रह का रत्न पहनना चाहिए या नहीं?
रत्न धारण करने को लेकर ज्योतिष विद्वानों की अलग-अलग राय है. कुछ विद्वानों के अनुसार, कुंडली में पीड़ित ग्रह का रत्न धारण करने से उसके फल में सुधार हो सकता है. वहीं, कुछ का मानना है कि अशुभ ग्रह का रत्न पहनने से उसकी नकारात्मकता बढ़ सकती है. इसलिए बिना कुंडली की जांच किए केवल किसी की सलाह, राशि या पसंद के आधार पर रत्न पहनने से बचना चाहिए.
कौन सा रत्न किस ग्रह से जुड़ा है?

ज्योतिष शास्त्र में नौ प्रमुख रत्नों को नौ ग्रहों से जोड़ा जाता है. ये नौ ग्रह और उनसे जुड़े रत्न इस प्रकार हैं:
- सूर्य — माणिक
- चंद्रमा — मोती
- मंगल — मूंगा
- बुध — पन्ना
- गुरु — पीला पुखराज
- शुक्र — हीरा
- शनि — नीलम
- राहु — गोमेद
- केतु — लहसुनिया
कितने रत्न हाथ में पहनने चाहिए?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, एक साथ मित्र ग्रहों के रत्न धारण किए जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए भी कुंडली में ग्रहों की स्थिति शुभ होना जरूरी है.
उदाहरण के लिए, सूर्य, मंगल और गुरु को मित्र ग्रह माना जाता है. ऐसे में कुंडली अनुकूल होने पर माणिक, मूंगा और पुखराज साथ पहनने की सलाह दी जा सकती है.
इसी तरह शनि, बुध और शुक्र को भी मित्र ग्रह माना जाता है. इनसे जुड़े नीलम, पन्ना और हीरा भी साथ धारण किए जा सकते हैं.
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क्या राशि के अनुसार रत्न धारण करना चाहिए?
रत्न को कभी भी केवल राशि के आधार पर धारण नहीं करना चाहिए. रत्न धारण करने के लिए कुंडली में ग्रह किस भाव में है, उसकी स्थिति कैसी है और उसकी दशा या अंतरदशा चल रही है या नहीं, इन सभी बातों का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है.
रत्न कब धारण करना चाहिए?
रत्न को शुभ मुहूर्त, तिथि और नक्षत्र के अनुसार धारण करने की सलाह दी जाती है. प्रत्येक रत्न के लिए शुभ दिन और मुहूर्त अलग होते हैं. इसलिए अपनी इच्छा से किसी भी दिन रत्न धारण करना उचित नहीं है. ऐसा करने से व्यक्ति को अशुभ परिणाम मिल सकते हैं.
रत्न धारण करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूरी
रत्न धारण करने से पहले किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी माना जाता है. गलत रत्न धारण करने से शुभ फल प्राप्त होने के बजाय अशुभ परिणाम मिलने की संभावना होती है. इसलिए रत्न खरीदने या पहनने से पहले अपनी जन्म कुंडली का विश्लेषण जरूर करवाना चाहिए.
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