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Chandra Grahan 2020, Date Timing in India: आज लगा था इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण, जानें ग्रहण से जुड़ी खास बातें...

By Prabhat Khabar Digital Desk
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Chandra Grahan 2020 Images : कल 05 जुलाई दिन रविवार को इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगेगा. कल गुरु पूर्णिमा भी है.
Chandra Grahan 2020 Images : कल 05 जुलाई दिन रविवार को इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगेगा. कल गुरु पूर्णिमा भी है.
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Chandra Grahan (Lunar Eclipse) 2020 Date, Timings in India, Grahan kab lagega, kitne baje se hai, kab padega, Live Updates : आज 05 जुलाई दिन रविवार को इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण लगेगा. कल गुरु पूर्णिमा भी है. इस खगोलीय घटना को ऑनलाइन जरूर आप देख सकते है. चंद्र ग्रहण की शुरुआत 05 जुलाई की सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर होगी. वहीं, इस ग्रहण की समाप्ति 11 बजकर 21 मिनट पर होगी. साल के तीसरे चंद्र ग्रहण से जुड़ी हर खबर के लिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर बने रहिए...

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ग्रहण काल के बाद मंदिर में दान करें

जिन राशियों पर चंद्रग्रहण का अशुभ प्रभाव पड़ेगा, उन्हें ग्रहण काल के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए. स्नान करने के बाद मंदिरों में दान करना चाहिए. गाय को भोजन कराएं और गरीबों की मदद करनी चाहिए.

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ग्रहण के बाद ये काम जरूर करें

- ग्रहण समाप्त होने पर स्नान करके उचित व्यक्ति को दान करने का विधान है.

- ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम जाप अवश्य करें, ग्रहण समाप्त होने के बाद पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.

- ग्रहण के बाद पुराना पानी और अन्न फेक देना चाहिए. नया भोजन पकाकर खाये और ताजा पानी भरकर पिए.

- सूर्य ग्रहण पूरा होने पर उसका शुद्ध बिम्ब देखकर ही भोजन करना चाहिए.

- ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरत मंदों को वस्त्र दान देने से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है.

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कई देशों में दिख रहा चंद्रग्रहण, आने लगी तस्वीरें

साल 2020 का तीसरा चंद्रग्रहण लग चुका है. यह ग्रहण यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिख रहा है. इसकी तस्वीरें अनेक माध्यमों से आनी शुरू हो गई है. भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण सुबह 8 बजकर 37 मिनट से शुरू हो गया है जो कि 11 बजकर 22 मिनट पर खत्म होगा.

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लग चुका है चंद्र ग्रहण, इन कामों को करने से बचें

- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के सीधे प्रभाव में नहीं आना चाहिए.

- ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को चाकू-छुरी या तेज धार वाले हथियार का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर नकारात्मक असर हो सकता है.

-ग्रहण की अवधि में सिलाई-कढ़ाई का कार्य भी न करें और न ही किसी प्रकार की चीज़ों का सेवन करें.

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ग्रहण के दौरान करें यह काम, मिलेगा लाभ

चंद्र ग्रहण लगने के पहले खाने पीने वाली चीजों में तुलसी दल या तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए. इससे खाना दूषित होने से बच जाता है और ग्रहण की समाप्ति पर इसका उपयोग किया जा सकता है. लेकिन याद रहे कि ग्रहण लगने के समय तुलसी का पौधा नहीं छूना चाहिए और नहीं तुलसी का पत्ता तोड़ना चाहिए.

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गर्भवती महिलाएं रखें विशेष सावधानी

ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है. ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के हानिकारक प्रभाव से गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर उसका नकारात्मक असर होता है. इस लिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बहुत जरूरी न हो तो घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.

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चंद्र ग्रहण कुछ मिनटों के बाद हो जाएगा प्रारंभ

चंद्र ग्रहण अब कुछ ही मिनटों के बाद शुरू हो जाएगा. 08 बज कर 54 मिनट में शुरू होगा और 11 बजकर 21 मिनट में समाप्त हो जाएगा, चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 54 सेकेंड की होगी.

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चंद्र ग्रहण के दौरान ये 5 कार्य भूलकर भी न करें.

- ग्रहण के दौरान भोजन न करें, भोजन पकाएं भी नहीं.

- गर्भवती महिला घर के अंदर ही रहें, बाहर न निकलें.

- चंद्र ग्रहण के दौरान मन में नकारात्मक विचार न लाएं.

- चंद्र ग्रहण के दौरान किसी की बुराई और बाणी को खराब न करें.

- चंद्र ग्रहण के दौरान किसी जानवर को चोट न पहुंचाएं.

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चंद्रग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा होती है दूर

ग्रहण चाहे सूर्य हो या चंद्र दोनों ही अशुभकाल माने जाते हैं. ग्रहण के दौरान धरती पर बुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए ग्रहणकाल के समय तुलसी का प्रयोग घर की शुद्धि करने में किया जाता है. तुलसी होने से सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है. तुलसी का इस्तेमाल नकारात्मक ऊर्जा खत्म करने के लिए किया जाता है.

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चंद्र यंत्र का प्रयोग कर बच सकते हैं अशुभ प्रभावों से

वैसे तो ग्रहण के प्रभावों से बचने के लिए कई सारे कार्य किए जाते हैं, पर चंद्र यंत्र की पूजा करने से भी ग्रहण के अशुभ प्रभावों से छुटकारा मिलता है.

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चंद्रग्रहण में कब लगता है सूतक

चंद्र ग्रहण में यह नौ घंटे पहले लगता है. सूतक काल ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है. हालांकि उपच्छाया चंद्र ग्रहण में सूतक मान्य नहीं होता है.

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क्या होता है सूतक काल

जब- जब ग्रहण लगता है तब-तब सूतक की चर्चा जरूर होती है. आखिरकार ग्रहण और सूतक का क्या होता है संबंध. शास्त्रों में सूतक का समय अशुभ माना गया है. मान्यता है कि जब सूतक काल आरंभ होता है तो इस दौरान सभी देवी-देवता कष्ट में रहते हैं. ग्रहण के दौरान राहू सूर्य और चंद्रमा का कुछ देर के लिए उन्हें अपना ग्रास बना लेता है. इसी कारण से जब भी ग्रहण पड़ता तो ग्रहण के प्रभाव को कम करने के लिए मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं.

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क्या है चंद्र ग्रहण का प्रभाव

21 जून को लगे सूर्य ग्रहण का प्रभाव 21 दिनों तक रहेगा और साथ में 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण लगने की वजह से स्थितियां थोड़ी बिगड़ सकती हैं लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है. भले ही एक महीने के अंदर तीन ग्रहण लगे हों लेकिन इन्हें एक ही माना जाएगा क्योंकि इन तीनों ग्रहण में सिर्फ सूर्य ग्रहण ही पूर्ण रूप से लगा था.

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कहां दिखेगा चंद्र ग्रहण?

5 जुलाई लगने वाला ये चंद्र ग्रहण अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप में दिखाई देगा. ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा और उसका सूतक भी भारत में मान्य नहीं होगा. सूतक के सारे नियम पूर्ण ग्रहण में माने जाते हैं.

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ग्रहण के बाद स्नान का है विशेष महत्व

गुरु पूर्णिमा का यह पर्व भिन्न-भिन्न लोगों में विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है. इनमें से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत नदी, सरोवरों में स्नान और पूजा पाठ से करते हैं. लोग अपने अध्यात्मिक गुरुओं के दर्शन भी करते हैं. शाम को अंत में मंगल आरती की जाती है.

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ग्रहण के दौरान भगवान के नाम का स्मरण करें

5 जुलाई का चंद्रग्रहण एक मांद्य ग्रहण है, जिस कारण से इसका किसी भी राशि पर कोई असर नहीं होगा. चंद्र ग्रहण भारत में सुबह 8:37 बजे से 11:22 बजे रहेगा. हालांकि ग्रहण के दौरान लोग मंदिरों में पूजा पाठ नहीं करते बल्कि भगवान के नाम का स्मरण करते हैं.

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ग्रहण के दौरान बाहर निकलने से करना चाहिए परहेज

ग्रहण के दौरान, यह माना जाता है कि पृथ्वी पर हानिकारक किरणें फैल जाती हैं. इसलिए घर के अंदर रहना चाहिए और सीधे ग्रहण देखने से बचना चाहिए.

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मानसिक रोगी दूर रहें ग्रहण से

चंद्र ग्रहण के देखने के बाद लोगों पर कई तरह के प्रभाव पड़ते हैं. ग्रहण के दौरान आप उद्विग्न, विचलित या क्रोधित रह सकते हैं. चंद्र ग्रहण देखने से सिर में भारीपन की शिकायत हो सकती है. मानसिक बीमारियों से ग्रस्त लोगों को चंद्र ग्रहण से दूर रहने की सलाह दी जाती है.

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ग्रहण के दौरान बचें वाद-विवाद से

ग्रहण के दौरान वाद-विवाद से बचना चाहिए. वाद-विवाद होने से पितृगण की कृपा नहीं बनती. पितृगणों के नाम पर दान भी करना चाहिए.

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ग्रहण के दौरान करें ये काम

गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय भगवान का ध्यान करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में मंत्र का जाप करना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को अपने पास एक नारियल रखना चाहिए. नारियल रखने से ग्रहण का नकारात्मक उर्जा का प्रभाव नहीं पड़ता है.

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ग्रहण के दौरन घर की खिड़कियों को रखें बंद

ग्रहण के दौरन घर की सभी खिड़कियों को ढक देना चाहिए, ताकि ग्रहण की कोई भी किरण घर में प्रवेश न कर सके. ग्रहण के दौरान या पहले भोजन बना हुआ है तो उसे फेंकना नहीं चाहिए. बल्कि उसमें तुलसी के पत्ते डालकर उसे शुद्ध कर लेना चाहिए. ग्रहण के समाप्ति के बाद स्नान-ध्यान कर घर में गंगाजल छिड़कना चाहिए.

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ग्रहण के दौरान बरतें सावधानी

ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के सीधे प्रभाव में आने से बचना चाहिए. ग्रहण के समय चाकू-छुरी व तेज धार वाले हथियार का प्रयोग नहीं करना चाहिए. क्योंकि ऐसा करने से गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर उसका बुरा असर पड़ता है. इसके साथ ही ग्रहण की अवधि में सिलाई-कढ़ाई का कार्य भी नहीं करना चाहिए और न ही किसी प्रकार की चीजों का सेवन करना चाहिए.

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गर्भवती महिलाएं रखें विशेष सावधानी

कल सुबह चंद्र ग्रहण लगेगा. ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी होती है. माना जाता है कि गर्भ में पल रहे शिशु के शरीर पर ग्रहण का नकारात्मक असर पड़ता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान बाहर नहीं निकलने की सलाह दी जाती है.

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ग्रहण के दौरान इस मंत्र का करें जाप

ग्रहण के समय में व्यक्ति को भगवान वासुदेव या फिर श्रीकृष्ण मंत्र का जाप करना चाहिए. इस दिन आप ओम नमो भगवते वासुदेवाय या श्रीकृष्णाय श्रीवासुदेवाय हरये परमात्मने, प्रणत: क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नम: मन्त्र का जाप करना चाहिए.

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ग्रहण के दौरान तुलसी के पत्ते का खास महत्व

ग्रहण के दौरान सूतक शुरू होने से पहले लोगों को खाने-पीने की चीजों में खासकर अचार, मुरब्बा, दूध, दही और अन्य खाद्य पदार्थों में कुश तृण या तुलसी का पत्ता रख देना चाहिए. ऐसा करने से खाने की चीजों पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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ग्रहण के दौरान नहीं है कोई पाबंदी

कल गुरु पूर्णिमा है. इस दौरान चंद्र ग्रहण लग रहा है. यह सामान्य तौर से दिखने वाला चंद्रग्रहण होगा. पूर्णिमा की रात अगर आसमान साफ रहा तो चांदनी रात में चांद को देखते हुए खाना भी खा सकते हैं क्योंकि इस ग्रहण के दौरान किसी भी प्रकार की धर्म संगत पाबंदी नहीं रहेगी.

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चंद्र ग्रहण का समय

कल चंद्र ग्रहण लग रहा है. यह उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. चंद्र ग्रहण कल सुबह 8 बजकर 38 मिनट से शुरू हो जाएगा और 11 बजकर 21 मिनट तक इस खगोलीय घटना को देखा जा सकता है. ग्रहण सुबह 9 बजकर 59 मिनट पर चंद्र ग्रहण अपने चरम पर होगा. इस चंद्र ग्रहण का पूरा समय 2 घंटे 45 मिनट तक रहेगा. इस चंद्र ग्रहण को यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा.

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गुरु पूर्णिमा और आषाणी पूर्णिमा भी 5 जुलाई के दिन

साल का तीसरा चंद्र ग्रहण भारत में न तो दिखाई देगा और न ही प्रभावशाली रहेगा. इसलिए खगोलीय दृष्टि से या फिर ज्योतिष मान्यता के अनुसार इस ग्रहण का महत्व होगा.यही वजह है कि इस ग्रहण का कोई सूतक काल नहीं होगा. कल चंद्र ग्रहण के अलावा आषाढ़ी पूर्णिमा का दिन है. आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के दिन गुरु पूर्णिमा भी मनाने का चलन है. 5 जुलाई 2020 दिन रविवार को चंद्र ग्रहण, आषाण पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा का पर्व है. इस बार चंद्र ग्रहण अमेरिका, अफ्रीका और यूरोप में ही दिखाई देगा.

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यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा

यह चंद्र ग्रहण दक्षिण एशिया के कुछ हिस्से अमेरिका, यूरोप व अस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों में दिखाई देगा. यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. एंजिल्स में 4 जुलाई की रात 8 बजकर 5 मिनट से शुरू होकर 10 बजकर 52 मिनट तक दिखाई देगा. यह ग्रहण पौने तीन घंटे तक देखा जा सकेगा. केपटाउन में 5 जुलाई को सुबह 5 बजे तक खत्म होगा. इसके बाद 5 महीने 25 दिन बाद 30 नवंबर को चंद्रग्रहण व जब 14 दिसंबर को सूर्यग्रहण होगा. इसे भी हम भारत से नहीं देख सकेंगे

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चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा

चंद्र ग्रहण लगने के 09 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. लेकिन 05 जुलाई को लगने वाले चंद्र ग्रहण में सूतक काल मान्य नहीं होगा. ग्रहण में लगने वाला सूतक काल एक अशुभ समयावधि होती है. जो चंद्र ग्रहण लगने के 09 घंटे पहले शुरू होता है और ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होता है. इस दौरान कई शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है.

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