चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम: सही विधि से मिलेगा शुभ फल

Updated at : 21 Mar 2026 4:50 PM (IST)
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Durga Saptashati Rules

दुर्गा सप्तशती पाठ विधि

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है. जानिए इसका सही तरीका, जरूरी नियम और कैसे श्रद्धा से किया गया पाठ जीवन की बाधाएं दूर करता है.

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च 2026 से शुरू हो रही है. नवरात्रि के आते ही पूरे देश में मां दुर्गा की पूजा-उपासना का माहौल बन जाता है. इन नौ दिनों में भक्त घरों और मंदिरों में माता की आराधना करते हैं. पूजा के दौरान हवन, आरती, चालीसा और विशेष रूप से दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का पाठ किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त पूरे नवरात्रि में श्रद्धा और नियमपूर्वक दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, उसे जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है. कहा जाता है कि इन दिनों देवी अपने भक्तों के कल्याण के लिए पृथ्वी पर विराजमान रहती हैं. ऐसे में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है.

नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का महत्व

दुर्गा सप्तशती को देवी शक्ति की महिमा का अत्यंत प्रभावशाली ग्रंथ माना गया है. इसमें देवी के विभिन्न रूपों और असुरों पर उनकी विजय का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि इसका पाठ करने से भय, शत्रु बाधा, मानसिक तनाव और जीवन की परेशानियां कम होने लगती हैं. इसी कारण नवरात्रि के दौरान इसका पाठ करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है.

दुर्गा सप्तशती पाठ की सही तैयारी

दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले पूजा स्थल को स्वच्छ करना जरूरी माना जाता है. इसके लिए एक साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर दुर्गा सप्तशती की पुस्तक स्थापित की जाती है. इसके बाद कुमकुम, अक्षत और फूल अर्पित कर देवी की पूजा की जाती है. पूजा के पश्चात ही श्रद्धा के साथ पाठ शुरू करना शुभ माना जाता है.

पाठ करते समय ध्यान रखने योग्य नियम

  • दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है.
  • पुस्तक को हाथ में पकड़कर नहीं पढ़ना चाहिए, बल्कि उसे चौकी पर स्थापित करके पढ़ना चाहिए.
  • पाठ शुरू करने से पहले और समाप्ति के बाद “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जाप करना चाहिए.
  • मंत्र और श्लोकों का उच्चारण स्पष्ट और शांत स्वर में करना चाहिए.

इन नियमों के साथ किया गया पाठ अधिक प्रभावी माना जाता है.

शुद्धता और एकाग्रता का विशेष महत्व

दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय साधक का तन और मन दोनों शुद्ध होना चाहिए. स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करके ही पाठ शुरू करना चाहिए. साथ ही मन को शांत और एकाग्र रखकर देवी का स्मरण करना चाहिए. धार्मिक विश्वास है कि जब श्रद्धा, नियम और भक्ति के साथ यह पाठ किया जाता है, तब मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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