चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन है आज, करें मां चंद्रघंटा की चालीसा का पाठ 

Updated at : 21 Mar 2026 5:30 AM (IST)
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Maa Chandraghanta Chalisa

मां चंद्रघंटा (एआई-निर्मित तस्वीर)

Maa Chandraghanta Chalisa: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए. कहा जाता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं. यहां माता चंद्रघंटा की चालीसा के लिरिक्स प्रस्तुत किए गए हैं.

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Maa Chandraghanta Chalisa: चैत्र नवरात्रि के पावन त्योहार का आज (21 मार्च) तीसरा दिन है. आज का दिन आदि शक्ति मां चंद्रघंटा के स्वरूप को समर्पित है. माता को शक्ति, साहस और वीरता का प्रतीक माना जाता है. कहा जाता है कि माता की आराधना से डर और भय का नाश होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. इस दिन पूजा के दौरान चालीसा का पाठ करने का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा के फलस्वरूप शुभ प्रभाव पड़ता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

मां चंद्रघंटा चालीसा

दोहा

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नमः।।

चौपाई

नमो नमो दुर्गे सुख करनी।

नमो नमो अंबे दुःख हरनी।।

निराकार है ज्योति तुम्हारी।

तिहूं लोक फैली उजियारी।।

शशि ललाट मुख महा विशाला।

नेत्र लाल भृकुटी विकराला।।

रूप मातुको अधिक सुहावे।

दरश करत जन अति सुख पावे।।

तुम संसार शक्ति मय कीना।

पालन हेतु अन्न धन दीना।।

अन्नपूरना हुई जग पाला।

तुम ही आदि सुंदरी बाला।।

प्रलयकाल सब नासन हारी।

तुम गौरी शिव शंकर प्यारी।।

शिव योगी तुम्हरे गुण गावैं।

ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावै।।

रूप सरस्वती को तुम धारा।

दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा।।

धरा रूप नरसिंह को अम्बा।

परगट भई फाड़कर खम्बा।।

रक्षा करि प्रहलाद बचायो।

हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो।।

लक्ष्मी रूप धरो जग माही।

श्री नारायण अंग समाहीं।।

क्षीरसिंधु मे करत विलासा।

दयासिंधु दीजै मन आसा।।

हिंगलाज मे तुम्हीं भवानी।

महिमा अमित न जात बखानी।।

मातंगी धूमावति माता।

भुवनेश्वरी बगला सुख दाता।।

श्री भैरव तारा जग तारिणी।

क्षिन्न भाल भव दुःख निवारिणी।।

केहरि वाहन सोहे भवानी।

लांगुर वीर चलत अगवानी।।

कर मे खप्पर खड्ग विराजै।

जाको देख काल डर भाजै।।

सोहे अस्त्र और त्रिशूला।

जाते उठत शत्रु हिय शूला।।

नगर कोटि मे तुमही विराजत।

तिहुं लोक में डंका बाजत।।

शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।

रक्तबीज शंखन संहारे।।

महिषासुर नृप अति अभिमानी।

जेहि अधिभार मही अकुलानी।।

रूप कराल काली को धारा।

सेन सहित तुम तिहि संहारा।।

परी गाढ़ संतन पर जब-जब।

भई सहाय मात तुम तब-तब।।

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

प्रभात खबर डिजिटल के जरिए मैंने पत्रकारिता की दुनिया में अपना पहला कदम रखा है. यहां मैं धर्म और राशिफल बीट पर बतौर जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हूं. इसके अलावा मुझे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से जुड़े विषयों पर लिखने में रुचि है.

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