चैत्र नवरात्रि 2026: घर पर ऐसे करें कलश स्थापना, जानें पूजा की सही तिथि और नियम
Published by : Neha Kumari Updated At : 16 Mar 2026 9:53 AM
कलश स्थापना सांकेतिक तस्वीर (एआई निर्मित)
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 को कलश स्थापना के साथ शुरू हो जाएगा. अगर आप भी अपने घर में माता की आराधना करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए है. आइए ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा से जानते हैं घर पर घटस्थापना की विधि और मुर्हूत. साथ ही हम घटस्थापना से संबंधित जरूरी नियमों के बारे में भी जानेंगे.
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है. नवरात्रि के इन नौ दिनों के दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है, जिसे देवी शक्ति के आगमन का प्रतीक माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, अगर कलश स्थापना सही विधि और शुभ मुहूर्त में की जाए तो मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. घर में स्थापित किया गया कलश सौभाग्य, सुख, समृद्धि, शांति और उन्नति का प्रतीक है.
चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत होती है. साल 2026 में यह तिथि 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है. इसी दिन कलश स्थापना के साथ नवरात्रि का प्रारंभ होगा. घटस्थापना का मुहूर्त प्रातःकाल का सबसे शुभ माना जाता है. शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्योदय के बाद और अभिजीत काल से पहले घटस्थापना करना विशेष फलदायी होता है. इस समय की गई स्थापना देवी दुर्गा के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है.
- प्राथमिक मुहूर्त: 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे से 7:53 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: 19 मार्च 2026, दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
साल 2026 में कलश स्थापना करते समय ध्यान रखें ये चीज
कई लोग नवरात्रि में देवी के पूजन के लिए कलश स्थापित करते हैं. वर्ष 2026 में मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है. कई लोग सुबह से ही पूजा-पाठ आरंभ कर देते हैं, लेकिन बसंत नवरात्रि 2026 में तिथि को लेकर भ्रम हो सकता है. अमावस्या तिथि 19 मार्च 2026 सुबह 6:52 तक रहेगी, उसके बाद चैत्र प्रतिपदा आरंभ होगी. इसलिए कलश स्थापना और माता के पूजन की शुरुआत प्रतिपदा आरंभ होने के बाद करें.
क्यों किया जाता है कलश स्थापना ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को सृष्टि, समृद्धि और देवी शक्ति का प्रतीक माना जाता है. पुराणों में वर्णन मिलता है कि कलश में सभी देवताओं का निवास माना जाता है. नवरात्रि के पहले दिन जब कलश स्थापित किया जाता है, तो यह देवी दुर्गा के आह्वान का प्रतीक होता है. इसी कलश के पास अखंड ज्योति जलाई जाती है और नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की जाती है. माना जाता है कि इस दौरान देवी मां घर में निवास करती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. नवरात्रि में मां भगवती की पूजा से स्वास्थ्य अनुकूल रहता है और ऊर्जा का संचार होता है.
घर पर कलश स्थापना की विधि
- सबसे पहले पूजा स्थान को अच्छी तरह से साफ करें.
- पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
- मिट्टी से एक छोटा पात्र भरकर उसमें जौ (जवारे) बो दें.
- इसके ऊपर पानी से भरा हुआ तांबे या मिट्टी का कलश रखें. कलश में गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालना शुभ माना जाता है.
- कलश के मुंह पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें. नारियल को लाल चुनरी से लपेटना शुभ होता है.
- मां दुर्गा का ध्यान करते हुए विधिपूर्वक पूजा करें और दीपक जलाकर नवरात्रि की शुरुआत करें.
कलश स्थापना के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम
- पूजा स्थान साफ और शांत होना चाहिए.
- कलश स्थापना के बाद वहां अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है.
- नवरात्रि के दौरान सात्विक भोजन करें और पूजा स्थल की नियमित सफाई करें.
- प्रतिदिन मां दुर्गा की आरती और मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है.
नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश
चैत्र नवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और शक्ति की आराधना का समय भी है. इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान करते हैं. माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और नियमों का पालन करने से देवी मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष, वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594 / 9545290847
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