शुरू होने वाला है आर्द्रा नक्षत्र, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों का विशेष संयोग

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आर्द्रा नक्षत्र का ज्योतिष शास्त्र में महत्व

Ardra Nakshatra 2026: 22 जून से आर्द्रा नक्षत्र शुरू होगा. इस दौरान विशेष पूजा, भगवान विष्णु को भोग, खीर सेवन और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आरोग्यता प्राप्ति का महत्व माना जाता है.

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Ardra Nakshatra 2026: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है. सूर्य को ऊर्जा, आरोग्य, प्रकाश, आत्मबल और जीवन में सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है. सूर्य के राशि और नक्षत्र परिवर्तन का मानव जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है. आर्द्रा नक्षत्र 27 नक्षत्रों में छठा नक्षत्र है, जो मृगशिरा और पुनर्वसु नक्षत्र के बीच स्थित है.

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राहु और बुध के प्रभाव से जुड़ा नक्षत्र

आर्द्रा नक्षत्र के स्वामी राहु माने जाते हैं, जबकि इसका संबंध मिथुन राशि से होने के कारण बुध ग्रह का प्रभाव भी इस पर रहता है. यह नक्षत्र उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है और बुद्धि, अनुसंधान, परिवर्तन तथा नई संभावनाओं का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे जीवन में बदलाव और नए अवसरों का संकेतक भी माना गया है.

22 जून से शुरू होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान

ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार 22 जून की रात 08:27 बजे सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 6 जुलाई रात 09:48 बजे तक इसी नक्षत्र में रहेंगे. इस अवधि में सनातन धर्मावलंबी विशेष रूप से खीर और दाल वाली पूरी बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाते हैं.

खीर और वर्षा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महिलाएं अपने बच्चों की अच्छी सेहत और आरोग्यता की कामना करते हुए खीर बनाकर खिलाती हैं. ऐसा भी माना जाता है कि इस नक्षत्र के दौरान वर्षा होने की संभावना अधिक रहती है तथा इस बारिश में स्नान करने से त्वचा संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है.

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