ePaper

संक्रांति खिसकी एक दिन आगे, सूर्य का प्रवेश होगा 14 की रात्रि में

Updated at : 10 Jan 2015 9:40 AM (IST)
विज्ञापन
संक्रांति खिसकी एक दिन आगे, सूर्य का प्रवेश होगा 14 की रात्रि में

ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 1.19 मिनट से प्रारंभ महावीर पंचांग के अनुसार रात्रि 1.20 मिनट तक मिथिला पंचांग के अनुसार रात्रि 1.00 बजे से आसनसोल : मकर संक्रांति का विशेष पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जायेगा. क्योंकि सभी पंचांगों के अनुसार सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की […]

विज्ञापन
ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 1.19 मिनट से प्रारंभ
महावीर पंचांग के अनुसार रात्रि 1.20 मिनट तक
मिथिला पंचांग के अनुसार रात्रि 1.00 बजे से
आसनसोल : मकर संक्रांति का विशेष पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जायेगा. क्योंकि सभी पंचांगों के अनुसार सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात्रि 1.20 मिनट पर हो रहा है. स्थानीय शनि मंदिर के पंडित तुलसी तिवारी के अनुसार ऋषिकेश पंचांग के अनुसार 14 जनवरी की रात्रि 1.19 मिनट पर, महावीर पंचांग के अनुसार 1.20 मिनट पर व मिथिला पंचांग के अनुसार रात्रि एक बजे से प्रवेश हो रहा है. शास्त्र के अनुसार 12 बजे रात्रि के बाद जब भी मकर संक्रांति होती है, तो उसका पूर्णकाल अगले दिन मनाया जाता है. इससे 14 जनवरी को मकर संक्रांति न मना कर अगले दिन 15 जनवरी ( गुरुवार) को मनायी जायेगी.
निवासियों के लिए होगा मंगल
मकर संक्रांति का यह पर्व अलग-अलग प्रदेशों में विविध रूपों में मनाया जाता है. हिंदू धर्म के अनुसार, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है. तब मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है, जो इस वर्ष बुधवार की रात्रि 1.20 मिनट पर प्रवेश कर रहा है. इस दिन मंदाकिनी नामक योग का सृजन हो रहा है, जो सरकार के लिए शुभ है. साथ ही वाणिज्य नामक करण में होने से कृषि के लिए उत्तम वर्ष है, जो पैदावार में इच्छा मुताबिक फल देगा.
वहीं स्वाति नक्षत्र में होने से आम आदमी के लिए सामान्य फलदायक रहेगा. इसी दिन से सभी शुभ व मांगलिक कार्यो की शुरुआत होती है. दान का विशेष महत्व सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने पर इस दिन स्नान दान कर मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. इस दिन किये गये दान-पुण्य का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार शिशिर ऋतु में अग्नि को अमृत समान माना गया है. ऐसे में अंगीठी का दान करना शुभ माना गया है. इस दिन सभी स्नान कर चावल, उड़द दाल, तिल, घी, मिठाई, अगिA व गरम वस्त्रों का दान करें. इससे शुभ फल की प्राप्ति होती है.
तिलकुट बाजार ने पक ड़ा जोर
मकर संक्रांति नजदीक आते ही तिलकुट बाजार ने जोर पकड़ लिया है. थोक व्यापारी निर्माण कार्य में जोर-शोर से लग गये हैं. ग्राहकों को लुभाने के लिए तिलकुट के तरह-तरह के वेरायटीज भी बाजार में हैं. बाजार में खोआ से लेकर नारियल युक्त तिलकुट उपलब्ध हैं. इसके अलावा बाजार में पिड़िकिया तिलकुट,गुड़ व खोआ तिलकुट उपलब्ध है. तिलकुट बनाने का काम नवंबर से ही शुरूहो जाता है,जो मकर संक्रांति तक चलता है. जाड़े में तिलकुट की अच्छी बिक्री होती है. बिक्रेताओं के अनुसार ऐसे तो सभी तिलकुट की बिक्री ठीक-ठाक होती है, लेकिन खोआ तिलकुट की डिमांड है.
डायबिटीज के रोगियों के लिए सुगर फ्री तिलकुट तैयार किया गया है. बाजार में तिल का लड्डू व रेवड़ी भी डिमांड में है. वहीं गजक और स्पेशल तिलपापड़ी चीनी और गुड़ दोनों में उपलब्ध है. मालभोग चूड़ा बाजार में 80 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola