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स्ट्रॉबेरी की खेती ने बदल दी प्रेमनाथ महतो की जिंदगी, उषा मार्टिन के सहयोग से कर रहे हैं अच्छी कमाई

Updated at : 28 Apr 2023 9:26 AM (IST)
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स्ट्रॉबेरी की खेती ने बदल दी प्रेमनाथ महतो की जिंदगी, उषा मार्टिन के सहयोग से कर रहे हैं अच्छी कमाई

प्रेमनाथ महतो पहले सरोजनी ITI में काम करते थे. उन्हें सात हजार रुपये मिलते थे. इस पैसे से वे परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पाते थे. लेकिन, आज वे सफल व आत्मनिर्भर किसान हैं.

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Strawberry farming in Jharkhand: मासू के किसान प्रेमनाथ महतो उषा मार्टिन कंपनी के सहयोग से स्ट्रॉबेरी की खेती कर अच्छी कमाई कर रहे हैं. पिछले तीन माह में डेढ़ लाख रुपये की स्ट्रॉबेरी बेच चुके हैं. पिछले साल नवंबर में प्रेमनाथ ने सात डिसमिल जमीन पर स्ट्रॉबेरी के एक हजार पौधे लगाये थे. अभी बाजार में लगातार इसकी बिक्री की जारी है. प्रेमनाथ 90 हजार रुपये की मिर्ची भी बेच चुके हैं. इसमें भी कंपनी का सहयोग रहा.

पुराने दिनों को याद करते हुए प्रेमनाथ महतो कहते हैं कि वर्ष 2020 के पहले धान की खेती से किसी तरह गुजर-बसर करते थे. पानी की सुविधा नहीं होने के कारण खाने का संकट उत्पन्न हो जाता था. खेती-बारी अच्छी थी, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं दिखता था. इसके बाद पत्नी ममता देवी कोरोना के शुरुआती दौर में उषा मार्टिन फाउंडेशन के सुपरवाइजर से मिली. इसके बाद धान की उन्नत तकनीक श्रीविधि से खेती कर पैदावार बढ़ाया. इसके बाद मैं भी एक प्रशिक्षण में गया, तो मुझे लगा कि खेती को ही आत्मनिर्भरता का हथियार बनाना होगा. इसके बाद पानी बचाने के लिए ड्रिप सिंचाई पद्धति का सहारा लिया. ताकि, कम पानी में खेती हो सके.

उषा मार्टिन ने इसमें सहयोग किया. इस दौरान फाउंडेशन के अधिकारियों ने कहा कि इतनी जमीन है तो फिर मालिक बनिये. यह बात लग गयी. फिर 2021 में खेती को बढ़ाने लगा. उषा मार्टिन के सहयोग से 30 डिसमिल तथा कुल दो एकड़ में तरबूज की खेती की. इससे एक लाख से अधिक की कमाई हुई. पिछले साल 20 टन तरबूज बेचकर साढ़े तीन लाख की कमाई की. 2023 में तीन एकड़ में तरबूज की खेती की. इसका बीज व प्रशिक्षण उषा मार्टिन के सहयोग से मिल रहा है.

गांव के अन्य किसानों को भी कर रहे हैं प्रेरित

प्रेमनाथ महतो पहले सरोजनी आइटीआइ में काम करते थे. उन्हें सात हजार रुपये मिलते थे. इस पैसे से वे परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पाते थे. लेकिन, आज वे सफल व आत्मनिर्भर किसान हैं. उनका कहना है कि खेती-बारी ने मुझे सफल उद्यमी बनाया है. अब गांवों के प्रगतिशील किसानों को भी आजीविका व आय संवर्द्धन के लिए प्रेरित करते हैं.

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कंपनी के सहयोग से किसानों का बना संगठन

उषा मार्टिन फाउंडेशन के सहयोग से पहली बार टाटीसिलवे के इर्द-गिर्द के गांवों में नकदी फसल के लिए किसानों का संगठन बनाया गया है. इनमें से आठ किसानों को स्ट्रॉबेरी, ड्रैगन फ्रूट्स व अन्य लाभकारी फलों की खेती से जोड़ा गया है. मासू के प्रेमनाथ के अलावा महिलौंग के भदया महतो, जानुम के आसाराम महतो व अनगड़ा के किसानों को इन फसलों की खेती से जोड़ा गया है.

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