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Jharkhand Primitive Tribe News: चावल-नमक के सहारे जीने को मजबूर सबर आदिम जनजाति, नहीं मिलती पेंशन

Updated at : 21 Sep 2022 7:15 PM (IST)
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Jharkhand Primitive Tribe News: चावल-नमक के सहारे जीने को मजबूर सबर आदिम जनजाति, नहीं मिलती पेंशन

Jharkhand Primitive Tribe News: पूर्वी सिंहभूम के बड़ाम ब्लॉक में स्थित तामुकबेड़ा सबर टोला प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है. अधिकारियों की उदासीनता का गवाह है. इस टोले के 11 परिवार के लोग आर्थिक तंगी में जी रहे हैं. एक महिला को छोड़कर किसी और को पेंशन नहीं मिलती.

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Jharkhand Primitive Tribe News: झारखंड राज्य का गठन आदिवासियों के नाम पर हुआ था. यहां 30 फीसदी आबादी आदिवासियों की है. कई आदिम जनजातियां इस प्रदेश में निवास करती हैं. आदिवासियों के नाम पर राज्य में राजनीति तो खूब होती है, सरकारें घोषणाएं भी खूब करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर देखेंगे, तो आदिम जनजातियां बहुत ही बुरी दशा में जी रही हैं. इनके सिर पर छत नहीं है. सरकारी योजनाओं को लागू करने में प्रशासनिक अधिकारियों की कोई दिलचस्पी नहीं है. सबर जनजाति के लोगों को पेंशन भी नहीं मिल रही.

प्रशासनिक उदासीनता का सबूत है तामुकबेड़ा सबर टोला

पूर्वी सिंहभूम के बड़ाम ब्लॉक में स्थित तामुकबेड़ा सबर टोला प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है. अधिकारियों की उदासीनता का गवाह है. इस टोले के 11 परिवार के लोग आर्थिक तंगी में जी रहे हैं. एक महिला को छोड़कर किसी और को पेंशन नहीं मिलती. हालांकि, झारखंड सरकार की ओर से कई तरह की पेंशन योजना चलायी जा रही है. आदिम जनजाति के लोगों के लिए विशेष रूप से पेंशन योजना की व्यवस्था है, लेकिन इस टोले के लोगों को इसका लाभ नहीं मिलता.

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18 साल के बाद सबर को पेंशन देने की है व्यवस्था

यहां बताना प्रासंगिक होगा कि सबर जनजाति के लिए 18 साल के बाद पेंशन की व्यवस्था है. यानी 18 साल की उम्र का हर सबर पेंशन का हकदार है. लेकिन, तामुकबेड़ा सबर टोला में रह रहे लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इस टोला में लव सबर, कुश सबर, अर्जुन सबर, परेश सबर, नकुल सबर, शत्रुघ्न सबर, शामली सबर, सुफल सबर, अनीता सबर, लुकान सबर के परिवार रहते हैं.

कई तरह की पेंशन योजना चलाती है झारखंड सरकार

झारखंड में 1932 का खतियान लागू होने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक रामदास सोरेन ने सरकार की कई उपलब्धियां गिनायीं. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी की जब से राज्य में सरकार बनी है, हर वर्ग के लोगों का ख्याल रखा गया है. हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार ने तरह-तरह की पेंशन की व्यवस्था की है. इसमें वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन समेत कई तरह की पेंशन शामिल है.

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11 परिवारों में मात्र एक सबर महिला को मिलती है पेंशन

रामदास सोरेन के दावों के उलट एक सच्चाई यह भी है कि आदिम जनजाति, जो अब विलुप्त हो रही है, के लोगों के लिए सरकार ने पेंशन की व्यवस्था की है, लेकिन इसका लाभ उन्हें नहीं मिल रहा है. 11 परिवारों में मात्र एक महिला लुकान सबर को पेंशन मिलती है. वह भी हर महीने नहीं मिलती. तीन-चार महीने में एक बार पेंशन मिलती है. लुकान सबर अपनी बहू और पोती के साथ एक जर्जर आवास में रह रही है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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