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इसरो के हर स्वदेशी मिशन के लिए जरूरी है एचईसी, बना रहा है एक और लांच पैड व क्रेन

Updated at : 02 Sep 2023 1:25 PM (IST)
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इसरो के हर स्वदेशी मिशन के लिए जरूरी है एचईसी, बना रहा है एक और लांच पैड व क्रेन

इसरो नित-नये कीर्तिमान गढ़ रहा है. मंगल, चांद और अब सूर्य की ओर उसके कदम बढ़ चले हैं. इसरो के हर अभियान में रांची की कंपनी एचईसी की भूमिका रही है. बड़े-बड़े उपकरण उसने बनाकर दिए हैं.

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आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थापित इसरो का प्रक्षेपण केंद्र किसी मिशन की लांचिंग के लिए जितना महत्वपूर्ण है, झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा में स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन (एचईसी) का महत्व उससे कम नहीं है. एचईसी की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसरो के हर लांचिंग मिशन में ‘मदर ऑ‍फ ऑल इंडस्ट्रीज’ के बनाए लांचिंग पैड का इस्तेमाल होता है. सबसे बड़े रॉकेट प्रक्षेपण के लिए जिस यान का निर्माण हुआ था, उसमें मेकॉन के 50 इंजीनियर्स की टीम ने अहम भूमिका निभाई थी. इसके उपकरण बनाने की जिम्मेदारी टाटा स्टील और एचईसी के अलावा देश के 50 से ज्यादा संस्थानों ने बनाकर दिए थे. सबसे बड़े उपकरण एचईसी में ही बने थे. एचईसी दो लांच पैड इसरो को सप्लाई कर चुका है. तीसरे लांच पैड का यहां निर्माण चल रहा है.

इसरो को हर बड़े उपकरण के लिए एचईसी की जरूरत

एचईसी के वैज्ञानिक सुभाष ने बताया कि एचईसी ने सामरिक क्षेत्र में कई अहम योगदान दिए हैं. वर्ष 2019 में इसरो की ओर से एचईसी को मोबाइल लांच पेडेस्टल का ऑर्डर मिला था. उस पर काम चल रहा है. उन्होंने कहा कि आज एचईसी की माली हालत भले खस्ताहाल हो, उसके इंजीनियर्स एवं कर्मचारियों को 18 महीने से वेतन न मिला हो, लेकिन इसरो को आज भी जब कोई स्वदेशी उपकरण बनाना होता है, तो उसे सबसे पहले एचईसी की ही याद आती है. हाल ही में इसरो की टीम ने एचईसी का दौरा किया और कंपनी को व्हील बोगी सिस्टम बनाने का ऑर्डर दिया. व्हील बोगी सिस्टम एक प्रकार का वाहन है, जो रॉकेट को असेंबली बिल्डिंग से लांचिंग पैड तक ले जाता है. रॉकेट के सुरक्षित और सफल प्रक्षेपण के लिए यह उपकरण बेहद जरूरी होता है. भारत में पहली बार एचईसी ने व्हील बोगी सिस्टम का निर्माण किया है.

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रॉकेट को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है व्हील बोगी

बता दें कि व्हील बोगी सिस्टम में एक या अधिक बोगियां होती हैं. इसमें से हर एक बोगी में चार पहिए लगे होते हैं. बोगियां एक फ्रेम से जुड़ी होती हैं, जो रॉकेट को एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाती है. फ्रेम को एक ट्रैक्टर या अन्य वाहन द्वारा खींचा जाता है. इसके निर्माण के लिए एचईसी का चयन इसलिए किया गया है, क्योंकि एचईसी ने इसरो के लिए अब तक जो भी उपकरण बनाकर दिए हैं, वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के मानक पर खड़े उतरे हैं. व्हील बोगी सिस्टम को बहुत मजबूत और टिकाऊ होना चाहिए.

रॉकेट के प्रक्षेपण में होता है इस्तेमाल

इसमें रॉकेट के भारी वजन को सहन करने की क्षमता होनी चाहिए, क्योंकि रॉकेट की असेंबलिंग लांच पैड पर ही होती है. इतना ही नहीं, रॉकेट को सुरक्षित रूप से और आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में इसको सक्षम होना चाहिए. व्हील बोगी सिस्टम का उपयोग इसरो के विभिन्न रॉकेटों के प्रक्षेपण के लिए किया जाता है. यह प्रणाली इसरो के प्रक्षेपण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

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व्हील बोगी सिस्टम के लाभ

  • यार्ड से लांचिंग पैड तक ले जाता है.

  • रॉकेट को सुरक्षित और कुशलता से लॉन्चिंग पैड तक ले जाएगा.

  • रॉकेट के प्रक्षेपण की तैयारी में मदद करेगा.

  • रॉकेट के प्रक्षेपण में शामिल कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है.

  • व्हील बोगी सिस्टम एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति है, जो इसरो के प्रक्षेपण कार्यक्रम को और अधिक कुशल और सुरक्षित बनाने में मदद करेगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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