इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर को लेकर अमेरिकी कंपनी से MoU, देश में बनेंगे आधुनिक हथियार, झारखंड में लगेगा प्लांट
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2022 10:14 PM
समय के साथ सेना की जरूरतें बदली हैं. अब पारंपरिक हथियार की बजाय ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रडार सिस्टम, सर्विलांस और अन्य आधुनिक हथियारों की मांग बढ़ी है. भारत सरकार हथियारों पर दूसरे देशों पर आत्मनिर्भरता कम करने के लिये मेक इन इंडिया के तहत देश में इसके निर्माण को बढ़ावा दे रही है.
Jharkhand News: प्रेरणा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री ने अमेरिका की सैंट्री व्यू सिस्टम के साथ शनिवार को एमओयू पर समझौता किया. इस समझौते से भारत की सीमा सुरक्षा मजबूत होगी और दुश्मनों की निगरानी सही तरीके से हो सकेगी. यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के मामले में अनूठा समझौता है. प्रेरणा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री के सीईओ सिद्दार्थ दासगुप्ता ने कहा कि देश में आधुनिक युद्ध में प्रयोग होने वाले हथियार का निर्माण देश में हो सकेगा. झारखंड में प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है.
आधुनिक हथियारों की बढ़ी है मांग
समय के साथ सेना की जरूरतें बदली हैं. अब पारंपरिक हथियार की बजाय ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, रडार सिस्टम, सर्विलांस और अन्य आधुनिक हथियारों की मांग बढ़ी है. भारत सरकार हथियारों पर दूसरे देशों पर आत्मनिर्भरता कम करने के लिये मेक इन इंडिया के तहत देश में इसके निर्माण को बढ़ावा दे रही है. इस कड़ी में एंटी ड्रोन सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से निर्मित हथियारों का निर्माण करने के लिये प्रेरणा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री ने अमेरिका की सैंट्री व्यू सिस्टम के साथ शनिवार को एक एमओयू पर समझौता किया. यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के मामले में एक अनूठा समझौता है.
देश की सीमा सुरक्षा होगी मजबूत
इस समझौते से भारत की सीमा सुरक्षा मजबूत होगी और दुश्मनों की निगरानी सही तरीके से हो सकेगी. समझौते की जानकारी देते हुए प्रेरणा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री के सीईओ सिद्दार्थ दासगुप्ता ने कहा कि देश में आधुनिक युद्ध में प्रयोग होने वाले हथियार का निर्माण देश में हो सकेगा. यह ऐसा पहला समझौता है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में काम आने वाले हथियार का निर्माण देश में होगा.
झारखंड में प्लांट लगाने पर विचार
प्रेरणा ग्रुप ऑफ इंडस्ट्री के सीईओ सिद्दार्थ दासगुप्ता ने कहा कि सिर्फ हथियारों का निर्माण ही नहीं, बल्कि सेमी कंडक्टर के निर्माण की दिशा में बातचीत हो रही है. उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में लगभग एक हजार करोड़ के निवेश की संभावना है, लेकिन यह निवेश हजारों करोड़ का होने की उम्मीद है. इसके लिये गुजरात, उत्तर प्रदेश और झारखंड में प्लांट लगाने पर विचार किया जा रहा है.
रिपोर्ट : ब्यूरो, नयी दिल्ली
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