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5.8 लाख पेंशनभोगी कोयलाकर्मियों के हक में कोल इंप्लाईज फोरम ने सीएमपीएफ ऑफिस पर किया आंदोलन

Updated at : 14 Aug 2023 8:08 PM (IST)
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5.8 लाख पेंशनभोगी कोयलाकर्मियों के हक में कोल इंप्लाईज फोरम ने सीएमपीएफ ऑफिस पर किया आंदोलन

देश में बड़े पैमाने पर आज भी ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं, जिनको पेंशन के रूप में 49 रुपये मिलते हैं. जी हां. 1.26 लाख कोयलाकर्मी ऐसे हैं, जिनकी पेंशन की राशि आज भी 1,000 रुपये से कम है. पेंशन बढ़ाने के लिए कोयलाकर्मी आंदोलन कर रहे हैं. उन्होंने आज भी सीएमपीएफ कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा.

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देश के करीब छह लाख पेंशनभोगी कोयलाकर्मियों और उनके आश्रितों के लिए एफसीआईआरईए से जुड़े कोल इंप्लाईज फोरम ने आंदोलन तेज कर दिया है. स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार (14 अगस्त) को झारखंड की राजधानी रांची समेत देश के अलग-अलग शहरों में स्थित सीएमपीएफ कार्यालयों के सामने प्रदर्शन किया और अपनी मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा. एफसीआईआरईए नागपुर के रिजनल वाइस प्रेसिडेंट और कोल इंप्लाईज फोरम के अध्यक्ष बिमान मित्रा ने यह जानकारी दी.

इन शहरों में पेंशनभोगियों ने किया आंदोलन

बिमान मित्रा ने बताया कि कोल इम्प्लाईज फोरम के बैनर तले बड़ी संख्या में लोगों ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता और आसनसोल, झारखंड के धनबाद और रांची, ओडिशा के संबलपुर, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा और सिंगरौली, महाराष्ट्र के नागपुर, तेलंगाना के गोदावरीखानी और दिल्ली में प्रदर्शन किया. हर जगह सीएमपीएफओ के जिम्मेदार पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया.

5.8 लाख पेंशनभोगियों से जुड़ा है मामला

उन्होंने बताया कि कोयला क्षेत्र में काम करने वाले 5.8 लाख पेंशनभोगी हैं, जो झारखंड, पश्चिम बंगाल समेत देश के अलग-अलग हिस्से में रहते हैं. कोल माइंस पेंशन स्कीम 1998 के तहत उन्हें जो पेंशन मिलती है, उसमें लंबे अरसे से वृद्धि नहीं की गयी है. इसकी वजह से आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनको सिर्फ 49 रुपए पेंशन मिलती है. देशभर में एक लाख 26 हजार ऐसे रिटायर्ड कोयला कर्मी हैं, जिनको 1000 रुपए से भी कम पेंशन मिलती है.

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8 साल बाद भी कमेटी की अनुशंसा नहीं हुई लागू

बिमान मित्रा ने बताया कि सब-कमेटी ने एक जनवरी 2014 से पेंशन में वृद्धि करने की अनुशंसा की थी, लेकिन आज तक पेंशन में सरकारी अंशदान में वृद्धि नहीं हुई है. इसलिए हमने एक बार फिर सीएमपीएफओ से आग्रह किया है कि वर्तमान बेसिक पे के आधार पर पेंशन फंड में प्रति टन 15 रुपये का भुगतान 16 अगस्त 2022 के प्रभाव से शुरू किया जाए. फोरम ने यह भी आग्रह किया है कि सीएमपीएफओ यह बताए कि इसके लिए कितने फंड की जरूरत होगी. इसके लिए 30 नवंबर 2023 तक का समय दिया गया है.

सीईएफ ने की संशोधित पीपीओ जारी करने की मांग

फोरम ने यह भी आग्रह किया है कि एक जनवरी 2024 से उन लोगों के लिए संशोधित पीपीओ जारी करें, जो अक्टूबर 2022 से पहले रिटायर हो गए. फोरम के अध्यक्ष ने कहा कि सीएमपीएफ कमिश्नर धनबाद के साथ 29 सितंबर 2022 और 17 मार्च 2023 को हुई बैठक में आग्रह किया गया था. इसमें यह भी अपील की गई थी कि संशोधित पीपीओ में ज्वाइंट फोटोग्राफ की भी व्यवस्था की जाए. लेकिन, अब तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है.

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कर्मियों के परिजनों के क्लेम को स्वीकार करे सीएमपीएफओ

फोरम की तीसरी मांग यह है कि एक जनवरी 2024 से बैंक के जरिये पेंशन देने की व्यवस्था की जाए और पति या पत्नी की ओर से किए गए क्लेम को स्वीकार किया जाए चौथी मांग यह है कि 15 अगस्त 2023 से सीएमपीएफ पोर्टल को एक्टिवेट किया जाये, ताकि कोल पेंशनर और उनके आश्रित अपने क्लेम का स्टेटस देख सकें. उनकी जो समस्या है, उसका समाधान हुआ या नहीं, वह देख सकें.

कोयला सचिव को भी सीईएफ ने लिखा खत

कोल इम्प्लाईज फोरम के अध्यक्ष ने कहा कि हमने कोयला मंत्रालय के सचिव को भी इस संबंध में पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और सकारात्मक संदेश दें. साथ ही सीएमपीएफओ के अधिकारियों को एक तय समय सीमा के भीतर कोयला पेंशनर्स की समस्या का समाधान करने के लिए निर्देशित करें, क्योंकि 5.8 लाख कोयला पेंशनर और उनके परिजन बेहद परेशान हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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