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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने तीन इंजीनियरों के खिलाफ दिया अभियोजन स्वीकृति का आदेश, ये है गंभीर आरोप

Updated at : 24 Dec 2022 8:36 PM (IST)
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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने तीन इंजीनियरों के खिलाफ दिया अभियोजन स्वीकृति का आदेश, ये है गंभीर आरोप

रामगढ़ जिले में महिला आईटीआई के निर्माण के लिए प्राक्कलित राशि 80, 77,160 रुपये के विरूद्ध प्राथमिकी अभियुक्तों को 50,00,000 रुपये निर्माण के लिए भुगतान किया गया था. योजना की जांच के क्रम में कार्य की गुणवत्ता एवं मापी में कमी पायी गयी. पुरुष आईटीआई निर्माण में भी वित्तीय गड़बड़ी की गयी है.

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रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने तीन इंजीनियरों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का आदेश दिया है. रामगढ़ थाना कांड संख्या (208/11) के प्राथमिकी अभियुक्त गुमानी रविदास (तत्कालीन कार्यपालक अभियंता), देवदर्शन सिंह (सेवानिवृत प्रभारी कार्यपालक अभियंता), सुनील कुमार (तत्कालीन सहायक अभियंता) के खिलाफ भारतीय दंड विधान 1860 की धारा 406/419/420/467/468/471/34 के तहत अभियोजन स्वीकृति का आदेश दिया है. इन पर आईटीआई निर्माण में पद का दुरुपयोग कर सरकारी राशि गबन करने का आरोप है. इनके खिलाफ सुनियोजित ढंग से वित्तीय अनियमितता करते हुए सरकारी राशि गबन करने का आरोप गठित किया गया है.

जांच में पायी गयी गड़बड़ी

रामगढ़ जिले में महिला आईटीआई के निर्माण के लिए प्राक्कलित राशि 80, 77,160 रुपये के विरूद्ध प्राथमिकी अभियुक्तों को 50,00,000 रुपये निर्माण के लिए भुगतान किया गया था. योजना की जांच के क्रम में कार्य की गुणवत्ता एवं मापी में कमी पायी गयी. इसके बाद योजना की तकनीकी जांच सहायक अभियंता एवं इनके द्वारा की गयी. जांच के क्रम में काफी वित्तीय अनियमितता पायी गयी. कुल प्राप्त 50,00,000 रुपये के खिलाफ अधिकतम मूल्यांकन 34,00,000 रुपये पाया गया, जबकि कार्य के विरूद्ध पूरी राशि के व्यय होने की बात दशार्यी गयी थी.

सरकारी राशि का किया गबन

इस कार्य के क्रियान्वयन में लगभग 15,00,000 रुपये प्राथमिकी अभियुक्तों द्वारा गबन किये जाने की बात परिलक्षित होती है. इसी प्रकार पुरूष आईटीआई रामगढ़ के निर्माण की प्राक्कलित राशि 3,35,39,453 रूपये थी, जिसके विरुद्ध कुल 3,15,39,453 रुपये निर्माण के लिए भुगतान किया गया. ये कार्य कनीय अभियंता माधव प्रसाद सिंह, हरिहर चौधरी एवं वासुदेव प्रसाद द्वारा कराया गया एवं मापी पुस्तिका में दर्ज की गई. इस योजना की जांच के क्रम में कराए गए कार्यों एवं मापी पुस्तिका में दर्ज मापी में अंतर पायी गयी. इस प्रकार इन प्राथमिकी अभियुक्तों द्वारा सरकारी पद का दुरुपयोग, आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी एवं प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए सुनियोजित ढंग से वित्तीय अनियमितता करते हुए सरकारी राशि गबन करने का आरोप गठित किया गया है.

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