राज्य में दवा की किल्लत, संकट में टीबी के मरीज

<P>झारखंड के सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटर में पर्याप्त मात्रा में दवाएं नहीं होने से क्षयरोग/ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के मरीज परेशान हैं. सबसे ज्यादा दिक्कत कंटीन्यूवेशनल फेज के मरीजों को हो
झारखंड के सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटर में पर्याप्त मात्रा में दवाएं नहीं होने से क्षयरोग/ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) के मरीज परेशान हैं. सबसे ज्यादा दिक्कत कंटीन्यूवेशनल फेज के मरीजों को हो रही है. डाॅट्स सेंटर पहुंच रहे टीबी के मरीजों को पर्याप्त स्ट्रीप की जगह कुछ दवाएं ही दी जा रही हैं. कहा जा रहा है कि दवाओं का स्टॉक जल्द आ जायेगा. उधर, केंद्र सरकार ने स्थानीय स्तर पर दवा की खरीद के आदेश दिये हैं. लेकिन, चुनाव आचार संहिता के कारण निविदा के माध्यम से दवा की खरीद में दिक्कत हो रही है. इधर, सूचना मिली है कि रांची जिले में मात्र तीन दिन की दवा उपलब्ध है. इसे देखते हुए स्टेट टीबी विभाग से कम से कम 10,000 स्ट्रिप की मांग की गयी है. स्टेट टीबी विभाग के सूत्रों ने बताया कि मौजूदा स्टॉक और मरीजों की संख्या के हिसाब से जिलों को टीबी की दवा उपलब्ध करायी जा रही है. हालांकि, कोई भी अधिकारी यह नहीं बता रहा कि यह संकट कब दूर होगा? लेकिन, अधिकारी इतना जरूर कहते हैं कि यह समस्या सिर्फ झारखंड में नहीं है, बल्कि पूरे देश में है.
राज्य में 12,908 और रांची में 1,452 नये मरीज मिले :
राज्य में इस साल (एक जनवरी से 28 मार्च तक) टीबी के 12,908 नये मरीज मिले हैं. इनमें सरकारी अस्पतालों के 8,919 और निजी अस्पतालों के 3,988 मरीज शामिल हैं. वहीं, रांची जिले में टीबी के 1,452 नये मरीज मिले हैं. इनमें सरकारी अस्पतालों के 577 और निजी अस्पतालों के 875 मरीज शामिल हैं.रांची सदर अस्पताल में कंटीन्यूवेशनल फेज के लिए मात्र 10 स्ट्रिप दवा :
रांची सदर अस्पताल के डाॅट्स सेंटर में भी टीबी दवाओं का संकट है. यहां कंटीन्यूवेशनल फेज वाले मरीजों को दी जानेवाली रिफैम्पिसिन, आइसोनियाजिड एंड एथंबुटोल हाइड्रोक्लोराइड की किल्लत है. मरीजों के वजन के हिसाब से दी जानेवाली इस दवा के मात्र 10 स्ट्रिप ही सेंटर में बचे हैं. हर मरीज को अमूमन एक महीने की दवा दी जाती है, लेकिन मौजूदा समय में मरीजों को स्ट्रिप से काटकर एक सप्ताह की दवा दी जा रही है.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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By Prabhat Khabar News Desk
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