संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर घमासान, अमित शाह ने विपक्ष को बताया पाकिस्तान का हितैषी; खरगे ने कहा- अहंकार में सरकार
संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस
Operation Sindoor: संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस जारी है. बहस के दौरान एक ओर जहां सरकार यह दावा कर रही है कि उसने ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव के जरिए पहलगाम हमले के दोषियों को सजा दी है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरते हुए यह कह रहा है कि पहलगाम हमले के लिए मोदी सरकार और उसका अहंकार दोषी है. विपक्ष यह दावा कर रहा है कि सरकार आम जनता को सुरक्षा नहीं दे पा रही है, जबकि सरकार यह कह रही है कि उसने आतंकवाद को मिटा दिया है, इसलिए पाकिस्तान को अपने देश से यहां आतंकी भेजने पड़ रहे हैं.
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Operation Sindoor: पहलगाम में 26 निर्दोषों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून देने वाले आतंकियों को उनके किए की सजा मिल गई है. गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर आयोजित बहस के दौरान यह जानकारी दी कि ऑपरेशन महादेव के दौरान इन तीनों आतंकियों को सोमवार 28 जुलाई को मार गिराया गया. उन्होंने संसद को यह भी बताया कि इन तीनों आतंकियों की पहचान की अच्छी तरह जांच की गई है, ताकि किसी भी तरह की कोई शंका ना रहे. इस मौके पर अमित शाह ने कहा कि हमें अपनी सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा सफलतापूर्वक चलाए गए इस ऑपरेशन पर गर्व करना चाहिए,लेकिन विपक्ष का चेहरा उतरा हुआ है, क्या विपक्ष इस मामले में पाकिस्तान को क्लीनचिट दे रहा है? वहीं विपक्ष पहलगाम हमले के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहा है और यह कह रहा है कि उसकी कूटनीति फेल हुई है.
अमित शाह ने पी चिंदबरम पर उठाया सवाल
लोकसभा में ऑपरेशन महादेव की जानकारी देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्ष को निशाने पर लिया. उन्होंने कहा कि मुझे लगा था कि मैं जब संसद को यह बताऊंगा कि पहलगाम के दोषी मारे गए हैं तो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के लोग खुश होंगे, लेकिन विपक्ष का चेहरा स्याह है. उन्होंने अखिलेश यादव को कहा कि आप आतंकियों का धर्म देखकर दुखी ना हों. इतना ही नहीं उन्होंने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम पर हमला करते हुए कहा कि कल उन्होंने कहा था कि आतंकी कहां से आएं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है. मैं उन्हें यह बताना चाहता हूं कि जिम्मेदारी तो हमारी है क्योंकि हम सरकार में हैं और आज मैं इस स्थिति में हूं कि उन्हें बता सकूं कि आतंकी पाकिस्तानी थे. हमारे पास प्रूफ हैं कि वो तीनों पाकिस्तानी थे. तीन में से दो के पाकिस्तानी वोटर नंबर भी हमारे पास उपलब्ध हैं. उनके हथियार पाकिस्तान में बने हुए हैं, इसके बावजूद चिदंबरम ये कहते हैं कि वो पाकिस्तानी नहीं थे, इसका मतलब है कि देश का एक पूर्व गृह मंत्री पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को क्लीनचिट दे रहा है.
अहंकार में है मोदी सरकार : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार सच सुनना नहीं चाहती, वह अहंकार में जी रही है. पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए. आखिर वहां आतंकी कैसे आए? यह हमारी एजेंसियों की विफलता है. गृहमंत्री को पद त्याग देना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. 1962 में जब विपक्ष ने संसद के विशेष सत्र की मांग की थी, तो नेहरू जी विशेष सत्र बुलाया था और उसमें उनकी बहुत आलोचना भी हुई थी, लेकिन पीएम मोदी को सच सुनने का साहस नहीं है. वे आलोचना नहीं सुन सकते हैं. खरगे ने कहा कि सरकार पहाड़ खोदकर चूहा निकालती है. वे हमें पाकिस्तान का हितैषी बता रहे हैं जबकि हमने पाकिस्तान के दो टुकड़े किए थे.खरगे ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि देशभक्ति का ठेका सिर्फ आपने नहीं लिया है. खरगे ने सरकार से सवाल पूछा है कि आखिर सीजफायर क्यों हुआ, वह भी तब जब हमारी सेना ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया था. प्रियंका गांधी ने भी बहस में भाग लेते हुए सरकार की तीखी आलोचना की और पहलगाम हमले के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार आम जनता को सुरक्षा देने में विफल रही है.
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आलोचना से मजबूत होता है लोकतंत्र
संसद में आज जिस तरह की बहस हो रही थी उसपर पत्रकार रशीद किदवई ने कहा कि आलोचना से लोकतंत्र मजबूत होता है, इतने साल से हमारे देश में इतनी विचारधारा के लोग रहते हैं और वे एक दूसरे की आलोचना करते हैं. लेकिन आलोचना सार्थक होनी चाहिए. भारत एक गणराज्य के प्रति सबकी जिम्मेदारी है, सरकार के कार्यों की आलोचना और प्रशंसा दोनों होती है. लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि आलोचना किस तरह हो रही है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भाषा आज के समय में मर्यादित नहीं है, यह व्यक्तिगत छींटाकशी अधिक हो गई है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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