केरल में यूडीएफ ने लेफ्ट के गढ़ों में सेंध लगाकर जीत हासिल की

Published by :Amitabh Kumar
Published at :05 May 2026 9:10 AM (IST)
विज्ञापन
Kerala Election Result 2026

केरल में जीत का जश्न मनाते कांग्रेस कार्यकर्ता (Photo: PTI)

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं. कांग्रेस 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है. यूडीएफ गठबंधन को भी साफ बहुमत मिल गया है, जिससे सरकार बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. यूडीएफ की जीत पर पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार प्रथापन केंद्रथिल का लेख.

विज्ञापन

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ गए हैं. कांग्रेस 63 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है. यूडीएफ गठबंधन को भी साफ बहुमत मिल गया है, जिससे सरकार बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. यूडीएफ की जीत पर पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार प्रथापन केंद्रथिल का लेख.

विधानसभा चुनाव के परिणाम केरल की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ साबित हुए हैं. माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के दस वर्षों के शासन के बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की है. भाजपा ने भी राज्य में वापसी दर्ज की, और नेमम, चथन्नूर और कझाकूट्टम जैसे तीन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की.

यूडीएफ ने सभी क्षेत्रों में बढ़त बनाई, पारंपरिक एलडीएफ के गढ़ों में सेंध लगायी और मध्य व उत्तरी केरल में अपने वोट आधार को मजबूत किया. इस चुनाव का एक प्रमुख निष्कर्ष मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की ‘कैप्टन’ वाली छवि का टूटना है. एलडीएफ के अधिकांश मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. पिनराई विजयन का मजबूत गढ़ धर्मदम भी डगमगाता दिखा. कन्नूर जैसे माकपा के पारंपरिक गढ़ में भी दरार दिखाई पड़ी, जो पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को दर्शाती हैं. यूडीएफ की जीत का सबसे महत्वपूर्ण कारण उसके पारंपरिक आधार-ईसाई और मुस्लिम समुदाय-की वापसी करना रहा.

वर्ष 2026 से पहले एलडीएफ ने इन समुदायों को आकर्षित करने के लिए काफी प्रयास किये, पर यह रणनीति उलटी पड़ गयी. खासकर ईसाई समुदाय, जो पहले एलडीएफ के साथ था, बड़ी संख्या में यूडीएफ की ओर लौट आया. मध्य केरल में यूडीएफ ने ईसाई वोटों का बड़ा हिस्सा वापस हासिल किया. सबरीमाला मंदिर से जुड़े कथित सोना चोरी/प्लेटिंग विवाद ने भी खासकर हिंदू मतदाताओं को प्रभावित किया. स्वास्थ्य क्षेत्र में गिरावट, मानव-वन्यजीव संघर्ष और महंगाई जैसे मुद्दों ने भी एलडीएफ की लोकप्रियता घटाई. भाजपा ने तीन सीटें जीतकर वोट काटने वाली पार्टी की छवि से आगे बढ़कर नयी पहचान बनायी.

एलडीएफ की सबसे बड़ी ताकत उसकी मजबूत कल्याणकारी योजनाएं रही हैं. यूडीएफ ने इन्हें और बेहतर बनाने का वादा किया. यूडीएफ के सामने कई चुनौतियां हैं. सबसे पहले, विभिन्न गुटों के बीच सहमति से नया मुख्यमंत्री चुनना होगा. फिर खाली खजाने के बीच अपने वादे पूरा करना बड़ी परीक्षा होगा.

(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

विज्ञापन
Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola