अमेरिका के बंकर बस्टर ने ईरान के 3 परमाणु ठिकानों को किया बर्बाद, 200 फीट की गहराई तक जाकर विस्फोट करने में सक्षम
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 22 Jun 2025 6:28 PM
ईरान पर अमेरिकी हमले की जानकारी देता एक अधिकारी
America Attack On Iran : अंतत: अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है. पिछले दस दिनों से जिस तरह की स्थिति ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष में दिख रही थी, उससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि अमेरिका अपने Credibility Doctrine यानी अपने वादों और समझौतों की नीति से पीछे हटने लगा है और इजरायल को अकेला छोड़ दिया है.लेकिन अमेरिका ने ईरान को रोकने के लिए हमला शुरू कर दिया है. अमेरिका यह नहीं चाहता है कि मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की होड़ शुरू हो.
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America Attack On Iran : ईरान और इजरायल के युद्ध में अमेरिका ने बंकर-बस्टर, एमओपी और बी-2 के साथ एंट्री की है. अमेरिका ने इस संघर्ष में एंट्री इसलिए की है क्योंकि वह ईरान के भूमिगत परमाणु संयंत्रों को तबाह करना चाहता था, ताकि ईरान परमाणु बम ना बना सके. अबतक इजरायल ने ईरान पर लगातार हमले किए हैं, लेकिन वह भूमिगत परमाणु संयंत्रों को तबाह करने में समर्थ नहीं है, जिसकी वजह से अंतत: अमेरिका ने युद्ध में एंट्री की है.
अमेरिका ने कहां-कहां हमला किया और क्यों?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट किया है कि अमेरिका ने ईरान के तीन जगहों पर सफलतापूर्वक हवाई हमले किए हैं, जिनमें ईरान के उन क्षेत्रों को ध्वस्त कर दिया गया जहां यूरेनियम को संरक्षित और संवर्धित किया जा रहा था. बताया जा रहा है कि फोर्डो में एक पहाड़ के नीचे 300 फीट की दूरी पर यूरेनियम को रखा गया था. इसके बाद नातान्ज और इस्फहान पर भी हमला किया गया है. इन दोनों जगहों पर इजरायल ने भी हमला किया था, लेकिन वह जमीन के नीचे स्थित संवर्धन स्थल को नुकसान नहीं पहुंचा पाया. अमेरिका के इस हमले का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है.
बंकर-बस्टर, एमओपी और बी-2 की क्या है खासियत
| विशेषता | Bunker Buster | MOP | B‑2 Spirit Bomber |
|---|---|---|---|
| उपयोग उद्देश्य | भूमिगत बंकरों को भेदना | गहरे परमाणु बंकर नष्ट करना | चुपके से बम पहुंचाना |
| वजन | 2,000–5,000 पाउंड | 30,000 पाउंड | 160,000 किलोग्राम (विमान) |
| गहराई में भेदन क्षमता | 10–30 मीटर | 60 मीटर तक | नॉन-पेनेट्रेटर, लेकिन कैरियर |
| हथियार गाइडेंस | GPS/लेज़र | GPS + स्मार्ट फ्यूज़ | स्वचालित नेविगेशन सिस्टम |
| लॉन्च प्लेटफॉर्म | F-15, F-16, B-52 | सिर्फ B-2 से संभव | अकेला स्टील्थ लॉन्ग-रेंज बॉम्बर |
बंकर-बस्टर बम(Bunker Buster Bomb) : बंकर बस्टर बम का उपयोग आमतौर पर दुश्मन द्वारा बनाएं गए बंकरों और भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने के लिए किया जाता है. इस बम की खासियत यह है कि यह धरती की गहराई में जाकर फटता है. यह बम कठोर कंक्रीट, चट्टा और स्टील को भी मात देकर विस्फोट करता है. बंकर बस्टर बम को लेजर या जीपीएस के जरिए सूचना मिलती है ताकि निशाना बिलकुल सटीक बैठे.
MOP (Massive Ordnance Penetrator) विशाल आयुध भेदक : एमओपी को सबसे घातक बंकर बस्टर माना जाता है. इसका वजन 13,600 किलोग्राम और लंबाई 20.5 फीट है. यह बंकर बस्टर जीपीएस द्वारा निर्देशित होता है और जमीन के अंदर 200 फीट की गहराई तक जाकर विस्फोट करता है. एमओपी का उपयोग सिर्फ B‑2 Spirit बॉम्बर से ही किया जा सकता है.
B‑2 Spirit Stealth Bomber बी-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर : यह अमेरिका का सबसे गुप्त बम वर्षक विमान है. इसका आकार एक छोटे पक्षी के समान है. यह दुश्मनों के रडार से आसानी से बच जाता है.यह विमान 11,000 किमी बिना रिफ्यूलिंग के उड़ान भर सकता है. यह विमान परमाणु और पारंपारिक दोनों प्रकार के हथियार को लेकर जा सकता है. यह विमान 40,000 पाउंड (18 टन) के आसपास हथियारों को ढो सकता है. इसकी गति 1,010 किमी/घंटा है. इसका प्रयोग अधिकतर परमाणु संयंत्र, एयरबेस और कमांड सेंटर को तबाह करने के लिए किया जाता है.
MOP का क्यों किया गया प्रयोग
अमेरिका ने एमओपी का इस्तेमाल 2003 में इराक पर आक्रमण के दौरान किया था. लेकिन उस दौर में एमओपी सीमित हमले कर सकते थे. बाद में इसे और विकसित किया गया और जहां परमाणु हमले नहीं होते हैं, लेकिन बड़ा हमला करना होता है उसके लिए एमओपी का निर्माण किया गया है. चूंकि अमेरिका ईरान में इसी तरह का हमला चाहता था इसलिए उसने एमओपी का प्रयोग किया. यह बहुत ही खतरनाक प्रभाव डालने वाला बम है. ईरान पर अमेरिका ने जिस तरह के बम से हमला किया है, वह सिर्फ अमेरिका के पास ही है किसी और देश के पास इस तरह के ताकतवर बम नहीं हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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