पारस के लिए आसान नहीं अध्यक्ष की कुर्सी, चिराग की रणनीति पर अब है सबकी नजर
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Jun 2021 12:19 PM
रामविलास पासवान के बेट चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच की कुर्सी की लड़ाई का पटाक्षेप इतनी जल्दी और आसानी से खत्म होता नहीं दिख रहा है.
पटना. रामविलास पासवान के बेट चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच की कुर्सी की लड़ाई का पटाक्षेप इतनी जल्दी और अासानी से खत्म होता नहीं दिख रहा है. पशुपति कुमार पारस के एक्शन के बाद अब चिराग पासवान भी रिएक्शन के मोड में आ गये हैं. पिछले दो दिनों से पारस गुट केंद्रीय चुनाव आयोग के पास जा कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दावेदारी पेश करने में अब तक सफल नहीं हुआ है.
दो दिनों से पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों व अन्य पदाधिकारियों से समर्थन जुटा कर दावेदारी की कोशिश अब तक नाकाम रही है. अब पारस गुट को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर नयी कार्यकारिणी का गठन करना होगा. इसके बाद ही केंद्रीय चुनाव आयोग में राष्ट्रीय अध्यक्ष के दावेदारी के लिए आवेदन किया जा सकता है.
इधर, चिराग पासवान ने पार्टी संविधान के अनुसार तकनीक पूर्ण दाव चला है. बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष की हैसियत से पारस सहित सभी बागी सांसदों को प्राथमिक सदस्यता से ही हटा दिया गया है. अब अगर पारस गुट राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर केंद्रीय चुनाव आयोग में अपनी दावेदारी पेश करता है, तो चिराग पासवान की ओर से इस बात पर काउंटर किया जायेगा कि जब ये लोग पार्टी के प्राथमिक सदस्य ही नहीं है, तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक या गठन कैसे कर सकते हैं. इनकी बैठक ही पार्टी संविधान के खिलाफ है.
इधर, लोजपा संसदीय दल के नये अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस अपने भतीजे चिराग पासवान से खासे नाराज हैं. एक समाचार चैनल के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें दल से निकालने के आदेश में कुछ भी नहीं है. लोकसभा के अध्यक्ष ने मुझे लोजपा के छह सांसदों के दल के नेता की मान्यता दी है. इसे संविधान मानेगा, सुप्रीम कोर्ट मानेगी और दुनिया मानेगी.
पारस ने कहा कि किसी के कुछ बोलने से कुछ नहीं हाेता, लोजपा एनडीए का पार्ट है और भविष्य में भी रहेगा. पारस ने कहा कि पार्टी तोड़ने या जबरन नेता बनने की उनकी कोई मंशा नहीं है. यह स्वभाविक परिवर्तन है. नेता परिवर्तन सभी दलों में होता है. पारस ने कहा कि दल में डेमोक्रेसी की कमी हुई.
99 प्रतिशत वर्कर, सभी सांसद व विधायक एनडीए के साथ बिहार विधानसभा के चुनाव में जाना चाहते थे. लोजपा के गलत चुनाव लड़ने के कारण विवाद गहराया. हमारी पार्टी जीरो पर आउट हो गयी. जहां तक चिराग के दावे की बात है तो सभी लोग ऐसा दावा करता है. लोकसभा सर्वोपरि है. लोकसभा के अध्यक्ष द्वारा नोटिफेकेशन करवाया गया. हम नेता चुने गये.
रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति में अब कब्जे की लड़ाई शुरू हो चुकी है. पशुपति कुमार पारस ने जहां पार्टी पर कब्जा जमा लिया है, तो वहीं उनके भजीते चिराग अब पार्टी दफ्तर पर कब्जा जमाने की कोशिश में लगे हैं.
सूचना है कि बुधवार को पारस कार्यकारिणी की बैठक करेंगे. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आखिर बैठक कहां होती है. दूसरी तरह सूचना है कि जल्द ही चिराग भी पटना आने वाले हैं. चिराग की ओर से भी क्षेत्र में घूम कर जनमत जुटाने की अभी कोशिश बाकी है.
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