कैसे शिक्षित होगा बिहार, शिक्षक व जमीन की कमी से जूझ रहा कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, 10 की जगह 2 स्टाफ

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Mar 2023 2:12 AM

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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से अलग-अलग चार हजार पदों के लिए विज्ञापन जरूर निकाला गया है, लेकिन आवेदन से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया में अभी लंबा सफर बाकी है.

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बिहार के सभी 38 जिलों को मिलाकर 619 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं. कई ब्लॉक में एक तो कई ब्लॉक में दो से तीन कस्तूरबा बालिका विद्यालय हैं. दरअसल कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की अवधारणा छात्राओं को पढ़ाई के साथ-साथ रहने और खाने-पीने की सुविधा भी देना है. इसी लिहाज से देशभर में साल 2004 में इसकी शुरुआत हुई. पटना में फुलवारीशरीफ ब्लॉक को छोड़कर बाकी 20 ब्लॉक में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय चल रहे हैं. हालांकि, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय कर्मचारी और जमीन की कमी से जूझ रहे हैं.

चार हजार पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया है

कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से अलग-अलग चार हजार पदों के लिए विज्ञापन जरूर निकाला गया है, लेकिन आवेदन से लेकर नियुक्ति प्रक्रिया में अभी लंबा सफर बाकी है. एक आवासीय विद्यालय में लेखापाल, प्रहरी, वार्डन, मुख्य रसोईया, वार्डन सह शिक्षिका सहित 10 पदों के लिए सात से 15 तक की कर्मचारियों की संख्या होती है.

पटना सदर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में सिर्फ दो स्टाफ

पटना सदर ब्लॉक में चल रहे कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में क्लास छह से लेकर आठ तक की 98 छात्राएं रहती हैं. यहां शिवचंद्र मध्य विद्यालय की छात्रांए पढ़ती हैं. नियम के मुताबिक, वैसे स्कूल, जो कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की मौजूदा दूसरी से 500 मीटर के अंदर हों, उस स्कूल की छात्राओं को रहने की इजाजत मिलती है. शिवचंद्र मध्य विद्यालय को कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय टाइप-1 में रखा गया है. नियमों के हिसाब से टाइप-1 आवासीय विद्यालय में 10 स्टाफ की जरूरत होती है, लेकिन यहां सिर्फ दो ही स्टाफ काम कर रहे हैं. एक सहायक शिक्षिका हैं और दूसरी वार्डन. सहायक शिक्षिका हों या वार्डन कर्मचारियों के अभाव में ये बिना किसी छुट्टी के काम करती हैं. स्कूल के प्रधानाचार्य शशि कुमार के मुताबिक,आवासीय विद्यालय में रहने के लिए कई के आवेदन लंबित हैं, अगर जमीन हो, तो आवासीय विद्यालय का निर्माण होगा.

जमीन नहीं मिलने से छह ब्लॉक में आवासीय विद्यालय नहीं

पटना में फुलवारीशरीफ को छोड़कर सभी 21 ब्लॉक में आवासीय विद्यालय हैं. 11 ब्लॉक में (टाइप-4) और 4 ब्लॉक में (टाइप-3) आवासीय विद्यालय हैं, जबकि इन ब्लॉकों में (टाइप-1) कैटेगरी का भी आवासीय विद्यालय होना चाहिए था. लेकिन जमीन का अभाव आवासीय विद्यालय के निर्माण को रोक रहा है. जानकारी के लिए बता दें कि (टाइप -1) में क्लास छह से आठ, (टाइप -3) में क्लास छह से आठ और क्लास छह से 12, जबकि (टाइप -4) में क्लास नौ से 12 तक की छात्राएं पढ़ती हैं. पटना में पालीगंज, दुल्हिनबाजार, मनेर, मसौढ़ी, दानापुर, पुनपुन, संपतचक, खुसरूपुर, बेलछी और बाढ़ सहित 11 प्रखंडों में टाइप-4 के आवासीय विद्यालय हैं, जबकि विक्रम, नौबतपुर, घोसवरी और दनियावां में टाइप-3 के आवासीय विद्यालय हैं.

तीनों टाइप के आवासीय विद्यालय के लिए कवायद

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की जिम्मेदारी बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की होती है. बिहार में 146 और कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का निर्माण होना है. इसके लिए परिषद की तरफ से बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत सरंचना विकास निगम लिमिटेड को 134.49 लाख रुपये दिये गये हैं

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क्या कहते हैं शीर्ष अधिकारी

कई ब्लॉक में जगह नहीं मिलने की वजह से कस्तूरबा आवासीय विद्यालय का निर्माण रुका है. एक कमी फंड की भी है, लेकिन इसके लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से पैसे जारी किये गये हैं.

श्याम नंदन, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (बिहार शिक्षा परियोजना)

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