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बिम्सटेक का औचित्य

Updated at : 31 Mar 2022 10:09 AM (IST)
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बिम्सटेक का औचित्य

बिम्सटेक चार्टर अपनाने से यह संगठन वैश्विक मंचों पर प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ अन्य क्षेत्रीय समूहों से सहयोग बढ़ा सकेगा.

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सात देशों- भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड और श्रीलंका- के समूह बिम्सटेक की स्थापना के पच्चीस साल पूरे हो गये हैं. इसके पांचवें शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय सहयोग के विस्तार का आह्वान किया है. दो साल से अधिक समय से जारी महामारी, आपूर्ति शृंखला से संबंधित समस्याओं, रूस-यूक्रेन संकट समेत विभिन्न भू-राजनीतिक हलचलों की पृष्ठभूमि में इस आह्वान का महत्व बहुत बढ़ जाता है.

इस क्रम में वर्तमान शिखर सम्मेलन में बिम्सटेक चार्टर को अपनाया जाना एक बड़ी पहल है. इससे यह संगठन वैश्विक मंचों पर अधिक प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ अन्य क्षेत्रीय समूहों से सहयोग बढ़ा सकेगा. समूह के सचिवालय के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने दस लाख डॉलर मुहैया कराने का वादा भी किया है. बिम्सटेक के तीन मूल संस्थापक देशों में एक होने के नाते भारत के लिए यह समूह हमेशा महत्वपूर्ण रहा है.

इस सम्मेलन को जहां प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया है, वहीं इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर श्रीलंका में हैं. बिम्सटेक देशों और इनसे जुड़े एशियाई क्षेत्रों के लिए अतिवाद और आतंकवाद लंबे समय से बड़ी चुनौती हैं तथा इनसे विकास कार्यों में बड़ा अवरोध उत्पन्न होता है. भारतीय विदेश मंत्री ने इन समस्याओं से जूझने पर जोर दिया है. इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच सड़क और समुद्र मार्ग से जुड़ाव बढ़ाना एक मुख्य मुद्दा है.

बीते कुछ वर्षों से पड़ोसियों को महत्व देने तथा पूर्व से व्यापार बढ़ाने के संकल्प के साथ भारत इन देशों से संपर्क मजबूत करने में लगा हुआ है. सदस्य देश आपस में भूमि और समुद्र से जुड़े हुए हैं. यदि आवागमन बेहतर होता है, तो वस्तुओं की ढुलाई सुगम होगी, इन देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक पहुंचना आसान होगा तथा लोगों की आवाजाही बढ़ने से पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति आदि क्षेत्रों में भी सहभागिता बढ़ेगी.

सामुद्रिक सहयोग से ये देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र से भी जुड़ सकेंगे. बिम्सटेक देशों का परस्पर सहकार बंगाल की खाड़ी को वैश्विक आपूर्ति शृंखला में एक बड़े बिंदु के रूप में स्थापित कर सकता है, जो भारत के प्रयासों से पहले से ही एक सक्रिय क्षेत्र बन चुका है. ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था में हो रहे तीव्र परिवर्तनों में बिम्सटेक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है.

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