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बड़ी लड़ाई की तैयारी

By संपादकीय
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर पूरे देश ने रविवार को घरों में रह कर और शाम को जरूरी सेवाएं दे रहे लोगों का आभार जता कर यह संदेश दिया है कि भारत कोरोना वायरस से जूझने के लिए प्रतिबद्ध है. देश और बाकी दुनिया में जिस तेजी से वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है, उसे रोकने के लिए घरों में रहने और मेलजोल व यात्राएं बंद करने के अलावा फिलहाल कोई कारगर उपाय नहीं है. इसी वजह से रेलगाड़ियों और बसों की आवाजाही रोकने के साथ-साथ अनेक राज्यों में तमाम गतिविधियों पर पाबंदी लगायी जा रही है.

जिस तरह से देश ने ‘जनता कर्फ्यू’ में अनुशासन और एकजुटता का परिचय दिया है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि लोग आनेवाले दिनों में घरों में बैठ सकते हैं और वहीं से सामाजिक संपर्कों को जारी रख सकते हैं. केंद्र और राज्य सरकार युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटी हैं तथा संदिग्धों की जांच हो रही है और संक्रमितों का उपचार हो रहा है. इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकारी अस्पतालों में जरूरी साजो-सामान और सुविधाओं की कमी है तथा अब भी जांच केंद्रों की संख्या बहुत कम है, लेकिन संकट के प्रसार को देखते हुए जांच से जुड़े संसाधनों, सांस देने की मशीनों (वेंटीलेटरों) और बीमारों के लिए बिस्तरों का बंदोबस्त किया जा रहा है.

ऐसे माहौल में आशंकाओं की वजह से लोगों में बेचैनी बढ़ना स्वाभाविक है, किंतु धीरज, संयम और सहयोग से ही संक्रमण को रोका जा सकता है. रविवार के अनुभव से लोगों को हौसला भी मिला है और आगे आनेवाले मुश्किल दिनों के लिए एक तरह से तैयारी भी हुई है. यह बड़े संतोष की बात है कि देश में खाने-पीने की चीजों, दवाओं और आम तौर पर इस्तेमाल होनेवाले सामानों की कतई कमी नहीं है तथा उनकी समुचित आपूर्ति पहले की तरह ही सुचारु रूप से हो रही है.

संक्रमण बढ़ने और बिना संपर्क या यात्रा की पृष्ठभूमि के कुछ लोगों के संक्रमित होने से चिंताएं गहन हुई हैं. इसलिए ठीक इंतजाम के साथ ठोस पाबंदियों की जरूरत बढ़ गयी है. सामान्य गतिविधियों और कामकाज बंद होने या आंशिक रूप से चलने से आर्थिक स्तर पर काफी नुकसान हो चुका है और इसमें भारी बढ़ोतरी की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. सरकारें इससे वाकिफ हैं और प्रधानमंत्री के संबोधन में भी इसे रेखांकित किया है.

वित्त मंत्री की अगुआई में कोरोना संक्रमण से पैदा हुई स्थितियों से निबटने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी बनाया गया है. व्यापक और दीर्घकालिक आर्थिक व वित्तीय उपायों पर सोच-विचार करने के साथ कुछ तात्कालिक पहलकदमी भी की जानी चाहिए. केरल और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने गरीब, निम्न आय और मजदूर तबके के लिए तुरंत मदद की पेशकश की है. ऐसे उपाय राष्ट्रीय स्तर पर भी हों तथा इस कोशिश में उद्योग जगत और बैंकिंग सेक्टर सरकार का पूरा सहयोग करें. इस भयावह आपदा का सामना सामूहिक रूप से ही संभव है.

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