1. home Hindi News
  2. opinion
  3. prabhat khabar article on supreme court pending cases latest news srn

हलकान होती अदालत

By संपादकीय
Updated Date
हलकान होती अदालत
हलकान होती अदालत
सांकेतिक तस्वीर

इंसाफ के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाया जाता है. सर्वोच्च न्यायालय तो देश की सबसे बड़ी अदालत है, सो वहां पहुंचनेवाले मामलों की अहमियत भी ज्यादा होती है. लेकिन न्यायाधीश डीवाइ चंद्रचूड़ ने यह कहकर चौंका दिया है कि ओछे मामलों की वजह से बड़ी संख्या में लंबित राष्ट्रीय महत्व के मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है. मंगलवार को यह टिप्पणी करते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि उस दिन सूचीबद्ध मामलों में 95 फीसदी बेमतलब थे. यदि सर्वोच्च न्यायालय में ऐसी स्थिति है,

तो यह बड़ी चिंता की बात है. ऐसा भी नहीं है कि ऐसी बात पहली बार हो रही है. अनेक ऐसी घटनाएं हैं, जब न्यायाधीशों को वरिष्ठ वकीलों को कहना पड़ा है कि वे अचानक से विशेष श्रेणी में ऐसे मामले सामने ला देते हैं, जिनकी आकस्मिक सुनवाई की जरूरत नहीं होती. ऐसे मामलों में जिंदगी और मौत का भी कोई सवाल नहीं होता. चर्चित लोगों से संबंधित कुछ उदाहरण भी हैं,

जब अदालत को कहना पड़ा कि आप या तो निचली अदालत जाएं या किसी अन्य अदालत में उसी मसले की सुनवाई पूरी होने का इंतजार करें. लेकिन न्यायाधीश चंद्रचूड़ का ताजा बयान अदालत की व्यवस्था पर भी टिप्पणी है. ऐसा नहीं है कि कोई भी व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में याचिका डाले और उसे सुनवाई के लिए कुछ ही दिन के भीतर खंडपीठ के सामने रख दिया जाता है. याचिकाओं की अहमियत को परखने और सूचीबद्ध करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में पंजीकरण कार्यालय है.

सर्वोच्च न्यायालय के सामने अनेक ऐसे मामले हैं, जो संवैधानिक पीठ बनने का इंतजार कर रहे हैं. अदालतों के सुधार के अनेक निर्देशों पर अमल नहीं हो पा रहा है. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के पद खाली हैं. ऐसे में अगर देश की सबसे बड़ी अदालत गंभीर चुनौतियों के बारे में सुनवाई नहीं कर पा रही है, तो सुधार के लिए उपाय तुरंत किये जाने चाहिए.

यह भी याद रखा जाना चाहिए कि भयावह महामारी के मौजूदा दौर में भी अगंभीर मसलों पर अदालतें बैठती रही हैं. न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने भी कहा है कि वे कोरोना से जुड़े मुद्दे पर सुनवाई करना चाहते थे, लेकिन उनके सामने गैर-जरूरी विषय रख दिया गया. उम्मीद है कि न्यायाधीश की यह चिंता केवल एक खीझ बनकर भुलायी नहीं जायेगी और सर्वोच्च न्यायालय अपने कामकाज और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए ठोस कदम उठायेगा.

Share Via :
Published Date

संबंधित खबरें

अन्य खबरें