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कोरोना से जंग लड़ते बैंकर

By सतीश सिंह
Updated Date
राजधानी पटना में SBI के एक ब्रांच में पसरा सन्नाटा
राजधानी पटना में SBI के एक ब्रांच में पसरा सन्नाटा
Prabhatkhabar

सतीश सिंह

मुख्य प्रबंधक, कॉरपोरेट

केंद्र (एसबीआइ, मुंबई)

satish5249@gmail.com

कोरोना मानव अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जिससे बचने के उपाय फिलहाल बहुत ही कम दिख रहे हैं. सुधारात्मक और निवारक उपायों को देर से अपनानेवाले देशों को धीरे-धीरे यह अपनी चपेट में ले रहा है. हमारा देश कोरोना के तीसरे चरण की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है. इस विपत्ति की घड़ी में स्वास्थ्यकर्मी पूरे जी-जान से जुटे हैं. उनके अलावा भी अनेक योद्धा हमारी दिनचर्या को सरल और सामान्य बनाये रखने की कोशिश कर रहे हैं. बैंकर तबका भी उन्हीं में से एक है, लेकिन बैंकरों के योगदान की चर्चा न तो सरकारें कर रही हैं और न ही आम आदमी. आज जरूरत इस लड़ाई में शामिल सभी लोगों की हौसलाआफजाई करने की है.

संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच भी सैकड़ों ग्राहक रोज बैंक आ रहे हैं. कस्बाई और ग्रामीण इलाकों की कई बैंक शाखाओं में सामान्य दिनों की तरह रोज ग्राहकों की भीड़ इकट्ठा हो रही है. नकदी की लेनदेन, पासबुक अपडेट कराने के अलावा वे अपने अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा कर रहे हैं. कोई ग्राहक कोरोना से संक्रमित न हो, इसके लिए बैंक शाखाओं में सैनिटाइजर का इंतजाम किया गया है. बैंक शाखाओं में साफ-सफाई का ध्यान भी रखा जा रहा है. ग्राहकों को एक-दूसरे से दूरी बनाये रखने के लिए भी कहा जा रहा है.

शहरों में लॉकडाउन होने के बाद भी बैंकर्स बैंक जा रहे हैं, जबकि वे जानते हैं कि उनके संक्रमित होने का खतरा बहुत ज्यादा है. अमूमन, कैशियर और सिंगल विंडो ऑपरेटर करेंसी का लेनदेन करते हैं. सिंगल विंडो ऑपरेटर पासबुक अपडेट करने और पैसों को अंतरित करने का काम भी कर रहे हैं. इन सारे कार्यों को करने में कोरोना से संक्रमित होने का डर बना रहता है, क्योंकि करेंसी में या पासबुक में कोरोना का वायरस चिपका हुआ हो सकता है. मामले में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बैंकर डॉक्टर नहीं हैं. उन्हें कोरोना से बचने के पूरे तरीके नहीं मालूम हैं. वे जो जानते हैं, उसका जरिया टीवी, अखबार, पोस्टर या होर्डिंग हैं.

सच कहा जाये, तो बैंकरों को उनके काम के लिए शाबासी नहीं मिली है. यह समझा जाना चाहिए कि वित्त से जुड़े कामकाज की बहुत अहमियत है, क्योंकि दैनिक जीवन में वित्तीय जरूरतों को पूरा किये बिना हम एक भी कदम आगे नहीं बढ़ सकते हैं.

प्रधानमंत्री जन-धन योजना को सफल बनाने के लिए बैंककर्मियों ने बिना पर्व-त्योहार में शामिल हुए और कोई अवकाश लिये रोज देर रात तक बैठकर लगभग 30 करोड़ से अधिक खाते खोले थे. वित्तीय समावेशन की संकल्पना को साकार करने के लिए मिनी बैंक खोले गये हैं. डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने के लिए सभी खाताधारकों को रुपे कार्ड दिये गये हैं. सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के खाते में सीधे पैसा अंतरित करने की संकल्पना को बैंककर्मियों ने ही साकार किया है, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आयी है और करोड़ों किसान, कामगार और मजदूर लाभान्वित हुए हैं.

जब प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का आगाज हुआ, तब भी बैंककर्मियों ने दिन-रात एक कर सरकार द्वारा दिये गये लक्ष्यों को हासिल किया. आज भी इस योजना को सफल बनाने के लिए बैंककर्मी लगातार मेहनत कर रहे हैं. बैंककर्मियों की मेहनत की वजह से ही देश में करोड़ों की संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं. वर्ष 2016 के नवंबर महीने में नोटबंदी की घोषणा के बाद बैंककर्मियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ा था. उस प्रक्रिया को भी सफल बनाने के काम में बैंककर्मी ही आगे रहे थे. याद करें, उन दो-तीन महीनों की कवायद को. लेकिन इसका श्रेय उन्हें शायद ही ठीक से दिया जा सका.

कोरोना वायरस से लड़ना आसान नहीं है. आगामी कुछ दिनों में ही भविष्य का कुछ अनुमान लगाया जा सकता है. दुनिया के अनेक देशों से आ रही खबरों ने भी आशंकाओं को बढ़ाया है. इस संदर्भ में संदिग्ध मामलों की जांच करने की प्रक्रिया को विस्तृत करना जरूरी है और उसमें समुचित तेजी भी लायी जानी चाहिए, ताकि किसी तरह कोई संक्रमित व्यक्ति वायरस से दूसरों को भी अनजाने में पीड़ित न बना दे. कोरोना के बारे में अभी भी जागरूकता की जरूरत है. बहुत सारे लोग, जिसमें पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हैं, इसकी गंभीरता को नहीं समझ रहे हैं.

जरूरत है कि हम कस्बाें, गांवों और दूरदराज इलाकों में रहनेवाले लोगों को इस आपदा के बारे में बतायें और जागरूक करें. सिर्फ सावधानी बरतकर ही हम इसकी धार को कुंद कर सकते हैं. चूंकि देश में आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है, इसलिए भी सावधानी ही बेहतर विकल्प है. आबादी के अनुसार देश में न तो पर्याप्त अस्पताल हैं और न ही जरूरी मेडिकल उपकरण.

आज बैंककर्मी कोरोना वायरस के खतरे को जानने के बावजूद भी सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उनका मनोबल बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही, हमें स्वास्थ्यकर्मियों, सफाईकर्मियों, दूरसंचार क्षेत्र के कर्मियों, पुलिस, प्रशासन, बिजली एवं जल आपूर्ति को सुनिश्चित करनेवाले कर्मियों आदि का भी शुक्रिया अदा करना चाहिए, जो अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी सेवा में तत्पर हैं. उनकी सुरक्षा का भी समुचित ध्यान रखा जाना चाहिए.

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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