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हथियार बिक्री में बढ़ती धाक

Updated at : 09 Dec 2021 2:13 PM (IST)
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हथियार बिक्री में बढ़ती धाक

रक्षा क्षेत्र में शोध और विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, साथ ही निवेश को प्रोत्साहित करना होगा, तभी हम उच्च क्षमता और गुणवत्ता वाले हथियार बनाने में सफल हो पायेंगे.

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सैन्य उपकरण बनानेवाली शीर्ष 100 कंपनियों में भारत की तीन कंपनियां अपनी जगह बनाने में कामयाब रही हैं. स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीपरी) की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (42वें स्थान पर) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (66वें स्थान पर) हथियारों की बिक्री में क्रमश: 1.5 प्रतिशत और चार प्रतिशत की वृद्धि करने में सफल रही हैं. वहीं भारतीय आयुध कारखानों (60वें स्थान पर) के हथियारों की बिक्री में भी इजाफा दर्ज हुआ है.

वर्ष 2020 में भारतीय कंपनियों की हथियारों की बिक्री 48,750 करोड़ रुपये रही, जो बीते वर्ष की तुलना में 1.2 प्रतिशत से अधिक है, जबकि शीर्ष 100 कंपनियों की कुल बिक्री का यह 1.2 प्रतिशत है. हालांकि, रक्षा उत्पादन के मामले में शीर्ष 11 देशों में भारत की हिस्सेदारी न्यूनतम है. शीर्ष 100 कंपनियों में अमेरिका की सर्वाधिक 41 कंपनियां शामिल हैं, उनकी हथियारों की बिक्री में हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 13 प्रतिशत के साथ चीनी कंपनियां दूसरे स्थान पर हैं.

जिस तरह से चीन की पांच कंपनियों के हथियारों की कुल बिक्री में इजाफा दर्ज हुआ है, उससे स्पष्ट है कि चीन सैन्य हथियारों के प्रमुख उत्पादक के तौर पर उभर रहा है. वह महत्वाकांंक्षी आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन से हथियार उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर भी हो रहा है. शीर्ष 20 वैश्विक हथियार कंपनियों में चीन की पांच कंपनियां शामिल हैं. हालांकि, 2019 की तुलना में 2020 में भारतीय कंपनियों ने भी हथियारों की बिक्री में इजाफा दर्ज किया है.

महामारी काल में आर्थिकी के कठिन दौर में घरेलू स्तर पर खरीद को बढ़ावा देने की नीति के चलते भारतीय सैन्य उपकरणों के विनिर्माण में लगी कंपनियों को काफी मदद मिली. इससे पहले भारत सरकार ने घरेलू कंपनियों को समर्थन देने और हथियार उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर होने के उद्देश्य से हथियारों के आयात में निरंतर कटौती की घोषणा की थी.

पूर्व में हम स्थानीय स्तर पर तकनीकी दक्षता विकसित करने की बजाय हथियारों को आयात करने में लगे रहे, जिससे सैन्य उपकरणों के मामले में कभी आत्मनिर्भर ही नहीं हुए. सेटेलाइट और स्पेस रिसर्च में मिली कामयाबी के नक्शेकदम पर रक्षा क्षेत्र में भी शोध और विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, साथ ही निवेश को प्रोत्साहित करना होगा, तभी हम उच्च क्षमता और गुणवत्ता वाले हथियार बना पाने में सफल हो पायेंगे.

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