भारतीय रिजर्व बैंक मौद्रिक समीक्षा की 10 मुख्य बातें
Author Prabhat khabar digital desk
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मुंबई : भारतीय रिजर्व ने आज द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा की. इसमें रिजर्व बैंक नेब्याज दरों में कोई कटौती नहीं कीहै, जिससे इएमआइ के कम होने की संभावना कम है. हालांकि महंगाई को नियंत्रित करना, अगले वित्तीय वर्ष में बेहतर विकास दर रहने जैसी कुछपॉजिटिव बातेंआरबीआइ ने कही है. आरबीअाइ ने 20 फरवरी से बैंक केबचत […]
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मुंबई : भारतीय रिजर्व ने आज द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा की. इसमें रिजर्व बैंक नेब्याज दरों में कोई कटौती नहीं कीहै, जिससे इएमआइ के कम होने की संभावना कम है. हालांकि महंगाई को नियंत्रित करना, अगले वित्तीय वर्ष में बेहतर विकास दर रहने जैसी कुछपॉजिटिव बातेंआरबीआइ ने कही है. आरबीअाइ ने 20 फरवरी से बैंक केबचत खाते की प्रति सप्ताह निकासी सीमा भी बढ़ा कर 50 हजार रुपये कर दी है, जबकि 13 मार्च से यह सीमा भी हटा ली जायेगी. बिंदुवार जानिए रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा कीआपके काम की दस खास बातें :
. नीतिगत ब्याज दर (रेपो) 6.25 प्रतिशत पर यथावत.
. आर्थिक वृद्धि दर 2016-17 का अनुमान घटा कर 6.9 प्रतिशत किया गया. वर्ष 2017-18 में वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान.
. अगले वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक वृद्धि में तेजी से सुधार की संभावना.
. वर्ष 2017-18 की पहली छमाही में मुद्रास्फीति 4-4.5 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 4.5-5.0 प्रतिशत रहने का अनुमान.
. कच्चेतेल की कीमतों में बढोतरी, विनिमय दर में उतार चढाव और 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बड़े प्रभाव से मुद्रास्फीति दबाव बढने का खतरा.
. वर्ष 2017 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी आने की संभावना. संरक्षणवादी रुझान तेज होने से वैश्विक व्यापार में मंदी का अनुमान.
. रिजर्व बैंक ने नीतिगत रख को ‘नरम’ की जगह ‘तटस्थ’ किया. मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव नोटबंदी के अस्थायी प्रभावों के कारण.
. पुराने की जगह नए नोटों की आपूर्ति बढने के साथ बैंकों के पास नकदी की बाढ कम होगी. बहर हाल नकदी की बाढ 2017-18 के शुरुआती महीनों में बने रहने की संभावना.
. जल्दी जल्दी आने वाले सामयिक आंकडों से सेवा क्षेत्र, की गतिविधियों, वाहनों की बिक्री, घरेलू हवाई माल परिवहन, रेल माल ढुलाई तथा सीमेंट उत्पादन के मद्धिम होने के संकेत. खाद्य और ईंधन को छोड़, मुद्रास्फीति सितंबर से 4.9 प्रतिशत पर अड़ी हुई है.
. नीतिगत समीक्षा में बैंकों के अवरद्ध ऋणों का समाधान तेजी से करने तथा बैंकों में नई पूंजी डालने का काम तेज करने पर जोर ताकि कर्ज की दरें और नीचे आ सकें. मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 5-6 अप्रैल 2017 को.
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