Women Empowerment: ग्रामीण शिल्प व महिला सशक्तिकरण का दिखेगा अद्भुत संगम

‘सरस आजीविका मेला-2026’ गुरुग्राम में शुरू हो गया है. इस साल सरस मेले में देश के 28 राज्यों की लगभग 900 से अधिक महिला उद्यमी भाग ले रही हैं, जो विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं. मेला परिसर में 450 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं. स्टॉल पर कश्मीर के पश्मीना से लेकर तमिलनाडु के सिल्क, राजस्थान की कढ़ाई से लेकर असम के बांस शिल्प तक सब एक ही छत के नीचे मौजूद है.
Women Empowerment: देश की ग्रामीण परंपराओं, लोक कलाओं और महिला उद्यमिता के रंगों से सराबोर ‘सरस आजीविका मेला-2026’ गुरुग्राम में शुरू हो गया. इस साल सरस मेले में देश के 28 राज्यों की लगभग 900 से अधिक महिला उद्यमी भाग ले रही हैं, जो विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं. मेला परिसर में 450 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं. स्टॉल पर कश्मीर के पश्मीना से लेकर तमिलनाडु के सिल्क, राजस्थान की कढ़ाई से लेकर असम के बांस शिल्प तक सब एक ही छत के नीचे मौजूद है. यह मेला 26 फरवरी तक चलेगा. गौर करने वाली बात है कि ‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत मौजूदा समय में देश की 10 करोड़ महिलाएं संगठित हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 करोड़ लखपति दीदी बनने का लक्ष्य रखा है और दिसंबर 2025 तक 2.9 करोड़ दीदी लखपति दीदी बन चुकी है.
जल्द ही तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पूरा हो जाएगा.सरस मेले की जानकारी देते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्वाति शर्मा ने कहा कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ईमानदारी और आर्थिक उन्नति के कारण बैंकिंग सेक्टर में उनका विश्वास बढ़ा है. विभिन्न राज्यों में स्वयं सहायता समूहों का एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घटकर 2 फीसदी से कम हो गया है. यह दिखाता है कि ग्रामीण महिलाएं अपने ऋण का भुगतान समय पर कर रही हैं और वित्तीय प्रबंधन में कुशल हो रही हैं. मेला प्रशासन ने दर्शकों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा है. खासकर छोटे बच्चों के लिए एक भव्य ‘किड्स जोन’ बनाया गया है, जहां कला गतिविधियों और कहानी सुनाने के सत्र के जरिये बच्चों को भारत की ग्रामीण संस्कृति से परिचित कराया जाएगा.
सरस मेले में इस बार क्या है खास
इस बार सरस मेले का एक मुख्य आकर्षण ‘नॉलेज एंड लर्निंग पवेलियन’ है. इसमें केवल उत्पादों की बिक्री नहीं हो रही, बल्कि महिला उद्यमियों के लिए रोजाना विशेष कार्यशाला आयोजित की जा रही हैं. इस दौरान महिलाओं को पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बिजनेस प्रपोजल तैयार करने और सोशल मीडिया मार्केटिंग के गुर भी सिखाए जाएंगे. मेले में विशेष तौर पर ‘लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन मैनेजमेंट’ पर प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जा रहा है. इसका मकसद ग्रामीण महिलाओं को यह सिखाना है कि वे अपने उत्पादों को कम लागत में और बिना नुकसान के देश-विदेश के बाजारों तक कैसे पहुंचा सकती हैं. इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ टाइअप के जरिये ‘ई-सरस’ पोर्टल के प्रति भी जागरूकता बढ़ाई जा रही है, ताकि मेले के बाद भी इन महिलाओं के उत्पादों की बिक्री होती रहे.
मेले में आने वाले दर्शकों के लिए ‘डेमो एवं लाइव लर्निंग एरिया’ एक अलग अनुभव मुहैया कराएगा. इसके जरिये लोग केवल सामान खरीद ही नहीं रहे, बल्कि उन्हें बनते हुए भी देख सकेगें. मिट्टी के बर्तनों को चाक पर आकार देते कुशल शिल्पकार बच्चों और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने का काम करेंगे. पारंपरिक सुई-धागे और शीशों के काम से कपड़े पर उकेरी जाने वाली कला का सीधा प्रदर्शन भी किया जाएगा. प्राकृतिक रेशों और बांस से बनाई जाने वाली ईको-फ्रेंडली टोकरी और घरेलू सामानों का लाइव डेमो भी होगा. मेले में विभिन्न राज्यों की महिलाओं ने अपने क्षेत्रीय स्वादों के साथ ‘लाइव फूड स्टॉल’ भी लगाया है.
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