Gen Z के आंदोलन पर Supreme Court क्यों सख्त? 20 जुलाई को आखिर हुआ क्या था, अब खुलेगा पूरा राज

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जंतर मंतर की तस्वीर (Photo- PTI)

एक परीक्षा का पेपर लीक हुआ, छात्रों का गुस्सा सड़क पर उतरा और देखते ही देखते यह आंदोलन देश की राजनीति के बड़े संकट में बदल गया. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी बना दी है. सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया या नहीं. सवाल यह भी है कि लोकतंत्र में छात्रों के विरोध, राज्य की शक्ति और जवाबदेही की सीमा क्या होनी चाहिए.

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20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. इसके बाद पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षा बलों पर कथित हमलों- दोनों को लेकर आरोप लगे.

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सुप्रीम कोर्ट ने अब इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए समिति बनाई है.

जंतर-मंतर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी
जंतर-मंतर के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मी

1. आखिर Gen Z सड़क पर क्यों उतरी?

इस पूरी कहानी की शुरुआत सिर्फ एक प्रदर्शन से नहीं हुई. इसके पीछे NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, परीक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी और युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ती बेचैनी थी.

जुलाई में शुरू हुआ छात्र आंदोलन धीरे-धीरे व्यापक युवा आंदोलन में बदल गया. दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र और युवा संसद की ओर मार्च करने पहुंचे. अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के दौरान सामने आए सबसे बड़े राजनीतिक संकटों में से एक के रूप में रिपोर्ट किया.

यहां एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है- शिक्षा से शुरू हुआ मुद्दा धीरे-धीरे शासन और जवाबदेही का सवाल बन गया.

युवाओं का सवाल था: अगर प्रतियोगी परीक्षाएं ही भरोसेमंद नहीं रहेंगी, तो उनकी वर्षों की मेहनत का क्या होगा?

2. संसद मार्च के दिन क्या हुआ?

20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की. पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे और मार्च को रोकने की कोशिश की. इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हुई और झड़पें हुईं.

प्रदर्शनकारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया. दूसरी तरफ पुलिस का कहना रहा कि प्रदर्शनकारियों के हिंसक होने के बाद बल प्रयोग किया गया और सुरक्षा बलों के जवान भी घायल हुए.

यानी इस मामले में एकतरफा कहानी नहीं है.

इसीलिए सुप्रीम कोर्ट की जांच खास महत्व रखती है- क्योंकि अदालत ने सिर्फ पुलिस कार्रवाई की जांच का आदेश नहीं दिया, बल्कि प्रदर्शनकारियों की ओर से सुरक्षा बलों पर हुई कथित हिंसा को भी जांच के दायरे में रखा है.

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3. सुप्रीम कोर्ट ने अब क्या किया?

सुप्रीम कोर्ट ने पांच सदस्यीय High-Powered Enquiry Committee बनाई है. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे.

समिति में पूर्व न्यायाधीशों और वरिष्ठ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है. अदालत ने समिति से कहा है कि वह पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की ओर से हुई हिंसा के आरोपों की भी जांच करे.

खास बात यह है कि जांच केवल एक बार की औपचारिक कवायद नहीं होगी. अदालत ने समिति से निरंतर और समय-समय पर आकलन करने तथा अंतरिम रिपोर्ट देने को कहा है.

जंतर मंतर की तस्वीर (Photo- PTI)
जंतर मंतर की तस्वीर (Photo- PTI)

4. महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर आरोप क्यों गंभीर हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ आरोपों को विशेष प्राथमिकता देने को कहा है. इनमें महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित टारगेटेड हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़/यौन दुर्व्यवहार के आरोप भी शामिल हैं.

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों को लगी गंभीर चोटों और सुरक्षा बलों के खिलाफ कथित हिंसा की भी जांच होगी.

यही वह बिंदु है जहां यह मामला सिर्फ NEET या छात्र आंदोलन का नहीं रह जाता.

यह सवाल बन जाता है कि लोकतांत्रिक विरोध के दौरान राज्य की पुलिस शक्ति की सीमा क्या है और भीड़ के हिंसक होने की स्थिति में सुरक्षा बलों की जवाबदेही कैसे तय होगी?

5. क्या Gen Z आंदोलन खत्म हो गया या नई राजनीति शुरू हुई?

यह शायद इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है.

आंदोलन की शुरुआत परीक्षा और युवाओं की समस्याओं से हुई थी, लेकिन इसके बाद इसने राजनीतिक जवाबदेही का रूप ले लिया. आंदोलन के दबाव के बीच तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घटना ने इसे और बड़ा राजनीतिक प्रतीक बना दिया.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की जांच एक नया अध्याय खोलती है.

अब बहस सिर्फ यह नहीं होगी कि छात्र सही थे या सरकार?

बहस यह होगी कि-

क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र की बुनियादी ताकत है?

कब प्रदर्शन कानून-व्यवस्था की समस्या बन जाता है?

और जब पुलिस तथा प्रदर्शनकारी दोनों पर हिंसा के आरोप हों, तो निष्पक्ष जवाबदेही कैसे तय की जाए?

Gen Z से आगे की कहानी

इस आंदोलन की एक और खासियत है, इसकी डिजिटल प्रकृति.

सोशल मीडिया ने युवाओं को तेजी से संगठित किया और आंदोलन को अलग-अलग शहरों तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई. National/International media ने भी आंदोलन को डिजिटल माध्यमों से ताकत पाने वाले युवा राजनीतिक उभार के रूप में रेखांकित किया है.

इसलिए सुप्रीम कोर्ट की जांच को केवल 20 जुलाई की झड़प तक सीमित करके देखना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी.

यह भारत की नई पीढ़ी और राज्य के बीच बदलते रिश्ते की भी कहानी है.

NEET पेपर लीक से शुरू हुआ सवाल अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच चुका है- और अगला सवाल यह है कि इस जांच के बाद भारतीय लोकतंत्र में छात्र आंदोलनों और पुलिस कार्रवाई के लिए कौन-सी नई सीमाएं तय होती हैं.

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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 33 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. Winning Bengal: Inside West Bengal’s Electoral War of 2026 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  4. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  5. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  6. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  7. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  8. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  9. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  10. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  11. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  12. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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