बारिश में ट्रेन चलती रहती है तो फिर कैंसिल क्यों हो जाती है फ्लाइट?

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बारिश के दौरान ट्रेन और फ्लाइट पर मौसम का अलग असर होता है

बारिश में ट्रेनें चलती रहती हैं, फिर फ्लाइट क्यों कैंसिल हो जाती है? वजह सिर्फ बारिश नहीं, बल्कि रनवे पर पानी, कम विजिबिलिटी, तेज हवाएं और थंडरस्टॉर्म जैसी परिस्थितियां हैं. जानिए ट्रेन और विमान पर बारिश का असर इतना अलग क्यों होता है.

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दिल्ली में भारी बारिश और गरज-चमक वाले तूफान के कारण फ्लाइट ऑपरेशन प्रभावित हुआ.खबरें आईं की खराब मौसम के कारण कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं जबकि कुछ को दूसरे एयरपोर्ट पर भेजना पड़ा. हालांकि इस दौरान किसी खराब मौसम के कारण किसी ट्रेन के रद्द होने की खबरें नहीं आई.

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ऐसे में एक बिल्कुल जायज सवाल है कि जब बारिश के दौरान ट्रेनें चलती रहती हैं, तो फिर फ्लाइट क्यों कैंसिल हो जाती है?

क्या विमान बारिश में उड़ नहीं सकता?

ऐसा बिल्कुल नहीं है, विमान बारिश में आसानी से उड़ सकता है.

  • दरअसल असली दिक्कत तब शुरू होती है, जब बारिश के साथ तेज हवाएं, थंडरस्टॉर्म, कम विजिबिलिटी और रनवे पर पानी जमने जैसी स्थितियां बन जाती हैं.
  • खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के वक्त ये चीजें बहुत मायने रखती हैं. लेकिन आसमान में उड़ते समय बारिश से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता?
  • हालांकि जब विमान काफी ऊंचाई पर पहुंच जाता है, तो सामान्य बारिश उसके लिए कोई बड़ी परेशानी नहीं होती, पायलट बाहर देखकर विमान नहीं उड़ाते. कॉकपिट में मौजूद इंस्ट्रूमेंट, नेविगेशन सिस्टम और मौसम से जुड़ी जानकारी उनकी मदद करती है.
  • आधुनिक कमर्शियल विमान बारिश और दूसरी खराब मौसम की स्थितियों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं. इंजन बारिश में काम करने के लिए प्रमाणित होते हैं और विमान की बॉडी को बिजली गिरने जैसी स्थिति को झेलने के हिसाब से डिजाइन किया जाता है.
  • मतलब की बारिश के दौरान मुश्किल आसमान में उड़ना नहीं, बल्कि जमीन से उड़ना और वापस जमीन पर आना होता है.

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रनवे पर पानी जमा हो जाए तो क्या होती है दिक्कत?

  • भारी बारिश में रनवे पर पानी जमा हो जाता है. ऐसे में एक भारी विमान का तेज रफ्तार से रनवे पर उतरना और फिर कुछ ही सेकंड में रुक कर सीधी दिशा में रखना मुश्किल हो जाता है.
  • क्योंकि विमान के टायर और रनवे के बीच पानी की वजह से पकड़ यानी ग्रिप कम हो सकती है. बहुत ज्यादा पानी होने पर हाइड्रोप्लानिंग भी हो सकती है.
  • आसान भाषा में कहें तो टायर और रनवे के बीच पानी की एक परत आ जाती है, जिससे टायर की पकड़ कम हो सकती है.
  • ऐसे में विमान को रोकने के लिए लंबी दूरी वाली रनवे की जरूरत पड़ सकती है.

खराब विजिबिलिटी के दौरान कैसे होती है टेक ऑफ और लैंडिंग

  • फ्लाइट के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि रनवे खाली है या नहीं. यह भी देखा जाता है कि रनवे की हालत विमान को सुरक्षित तरीके से उतारने और रोकने लायक है या नहीं.
  • कई बार बारिश के दौरान रनवे देखना मुश्किल हो जाता है क्योंकि भारी बारिश में पायलट को रनवे की लाइट और मार्किंग साफ दिखाई नहीं देती है.
  • इसे मापने के लिए एविएशन में RVR यानी रनवे विजुअल रेंज का इस्तेमाल होता है. आरवीआर यह बताता है कि रनवे की लाइट या मार्किंग कितनी दूरी तक दिखाई दे रही है.
  • खराब विजिबिलिटी में विमान को रनवे तक लाने के लिए ILS यानी इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम जैसी तकनीक मदद करती है.
  • लेकिन आईएलएस होने का मतलब यह नहीं है कि विमान किसी भी हालत में उतर सकता है, क्योंकि हर एयरपोर्ट, विमान और पायलट की अपनी ऑपरेशनल सीमाएं होती हैं.

फ्लाइट के टेक ऑफ और लैंडिंग में क्या होती है दिक्कत

  • असली परेशानी तब होती है जब बारिश के साथ थंडरस्टॉर्म भी हो, यानी कि भारी बारिश अपने आप में उतनी बड़ी समस्या नहीं है, जितनी थंडरस्टॉर्म यानी गरज-चमक वाला तूफान.
  • थंडरस्टॉर्म के साथ अचानक बहुत तेज हवा चलती है, हवा की दिशा और रफ्तार कुछ ही पलों में बदल सकती है. इसे विंड शीयर कहते हैं.
  • कई बार तेज हवा ऊपर से नीचे की ओर तेजी से आती है, जिसे डाउन बर्स्ट या माइक्रोबर्स्ट कहा जाता है. इसके अलावा बिजली, ओले और तेज टर्बुलेंस भी हो सकते हैं.
  • टेक ऑफ और लैंडिंग के समय ऐसी अचानक बदलती हवाएं विमान के लिए बड़ी चुनौती होती हैं. इसलिए अगर रनवे के पास थंडरस्टॉर्म है, तो विमान को लैंड कराने के बजाय कुछ समय इंतजार कराया जाता है या उसे दूसरे एयरपोर्ट भेजा जाता है.

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फिर बारिश के दौरान ट्रेन क्यों चलती है?

ट्रेन और विमान के बीच फर्क होता है.

  • ट्रेन का रास्ता पहले से तय होता है. वह ट्रैक पर चलती है. बारिश में ट्रैक पर पानी भरना, मिट्टी खिसकना, सिग्नलिंग में दिक्कत या विजिबिलिटी कम होना समस्या बन सकता है. लेकिन जरूरत पड़ने पर ट्रेन की स्पीड कम की जा सकती है.

लेकिन विमान के साथ ऐसा नहीं है.

  • उसे हवा में उड़ना है और फिर एक तय रनवे पर सही गति और सही दिशा के साथ उतरना है. इस दौरान हवा की दिशा, हवा की रफ्तार, रनवे पर पानी और विजिबिलिटी सब कुछ एक साथ मायने रखता है. खासकर क्रॉसविंड, यानी रनवे के बगल से आने वाली तेज हवा, लैंडिंग को मुश्किल बना सकती है.

बारिश में फ्लाइट कैंसिल होने का मतलब क्या है

  • अगर इस पूरी बात को एक लाइन में समझना हो तो कह सकते हैं कि बारिश ट्रेन और विमान दोनों को प्रभावित करती है, लेकिन दोनों की मुश्किलें अलग हैं.
  • ट्रेन के लिए बारिश में ट्रैक और सिग्नलिंग बड़ी चिंता हो सकती है. वहीं विमान के लिए खासकर टेक ऑफ और लैंडिंग के समय रनवे की हालत, विजिबिलिटी, तेज हवा, विंड शीयर और थंडरस्टॉर्म महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
  • इसलिए बारिश के दौरान फ्लाइट कैंसिल या डायवर्ट होना जरूरी नहीं कि विमान में कोई खराबी है. कई बार इसका मतलब सिर्फ इतना होता है कि उस वक्त का मौसम फ्लाइट के लिए सुरक्षित ऑपरेशनल लिमिट के अंदर नहीं था.
  • और विमानन में यह सबसे जरूरी नियम है कि मौसम से मुकाबला करना जरूरी नहीं है,बल्कि मौसम सुरक्षित होने का इंतजार करना ज्यादा जरूरी है. पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर


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