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तमिलनाडु: बेरियम नाइट्रेट पर प्रतिबंध से पटाखा व्यापारियों को भारी नुकसान, प्रोडक्शन में 40% की गिरावट

Updated at : 20 Oct 2022 9:01 AM (IST)
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तमिलनाडु: बेरियम नाइट्रेट पर प्रतिबंध से पटाखा व्यापारियों को भारी नुकसान, प्रोडक्शन में 40% की गिरावट

रासायनिक बेरियम नाइट्रेट के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद से प्रोडक्शन में भारी कमी आई है. क्योंकि बेरियम नाइट्रेट पटाखें बनाने के लिए एक प्रमुख पदार्थ है, जो पटाखों को लंबी शेल्फ लाइफ देता है.

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तमिलनाडु के शिवकाशी में बड़ी मात्रा में पटाखों का प्रोडक्शन किया जाता है. यहां से देश के सभी राज्यों में पटाखों की सप्लाई की जाती है. लेकिन बीते कुछ सालों से पटाखा निर्माताओं में निराशा देखने को मिली है. क्योंकि कोरोना महामारी और उसके बाद कई राज्यों द्वारा पटाखे पर बैन लगाने के फैसले से पटाखों की ब्रिक्री पर भारी असर पड़ा है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेरियम नाइट्रेट पर प्रतिबंध से निर्माताओं को भारी नुकसान पहुंचा है. निर्माताओं ने कहा कि पहले 6000 करोड़ तक पटाखा का कारोबार हुआ करता था. लेकिन कई राज्यों में बैन लगाए जाने के फैसले से करीब 40 फीसदी तक कमी आई है.


जानिए ग्रीन पटाखें क्यों होते है महंगे?

बाताते चले कि पिछले कुछ सालों में कई राज्यों ने त्योहारों पर पटाखे जलाने पर रोक लगा दी है. वहीं, ग्रीन पटाखों को मंजूरी दी गई है. शिवकाशी के पटाखा निर्माताओं ने मीडिया को बताया कि राज्य सरकारों के फैसले उचित हैं. लेकिन ग्राीन पटाखों में काफी खर्च आता है. उन्होंने बताया, ग्रीन पटाखे बनाने में जो केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है वह भारत में आसनी से उपलब्ध नहीं होते. केमिकल को विदेशों से आयात करना पड़ता है, जिसकी वजह से ग्रीन पटाखों की कीमत ज्यादा है.

बेरियम नाइट्रेट पर कोर्ट ने लगाया प्रतिबंध

शिवकाशी के पाटाखा निर्मताओं ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा रासायनिक बेरियम नाइट्रेट के प्रयोग पर रोक लगाने के बाद से प्रोडक्शन में भारी कमी आई है. क्योंकि बेरियम नाइट्रेट पटाखें बनाने के लिए एक प्रमुख पदार्थ है, जो पटाखों को लंबी शेल्फ लाइफ देता है. वहीं, अय्यन आतिशबाजी के मालिक अबीरुबन ने एएनआई को बताया, “सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में स्ट्रिंग पटाखों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया है. स्ट्रिंग पटाखे आमतौर पर शिवकाशी में अधिकांश बेचे जाने वाले पटाखों में से एक है. उन्होंने बताया कि शिवकाशी में करीब 1 हजार से अधिक पंजीकृत पटाखा इकाइयां हैं, जो लगभग 8 लाख लोगों को राजगारी देती है.

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पर्यावरण मंत्रालय ने कोर्ट को दिया सुझाव

पर्यावरण वन मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने सुप्रीम कोर्ट को सुझाव दिया है कि बेरियम नाइट्रेट और आतिशबाजी के निर्माण के लिए एडिटिव्स के इस्तेमाल पर से प्रतिबंध हटा दिया जाए. लेकिन कोर्ट में अभी मामला लंबित है. पटाखा निर्माताओं की माने तो पटाखों फैसले जल्द न होने के कारण लाखों का नुकसान हो रहा है. वहीं पिछले 10 दिनों से शिवकाशी में बारिश हुई थी, जिस कारण भी पटाखों का निर्माण नहीं हो सका है.

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Piyush Pandey

लेखक के बारे में

By Piyush Pandey

Senior Journalist, tech enthusiast, having over 10 years of rich experience in print and digital journalism with a good eye for writing across various domains.

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