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उच्चतम न्यायालय के स्थगनादेश से तमिलनाडु में शराब की दुकानें खुलने का रास्ता साफ

Updated at : 15 May 2020 6:39 PM (IST)
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उच्चतम न्यायालय के स्थगनादेश से तमिलनाडु में शराब की दुकानें खुलने का रास्ता साफ

उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु में शराब की सरकारी दुकानों को खोलने का मार्ग प्रशस्त करते हुये शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के आठ मई के आदेश पर रोक लगा दी. उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान सामाजिक दूरी बनाये रखने संबंधी दिशा निर्देशों के उल्लंघन के आधार पर इन दुकानों को बंद करने का आदेश राज्य सरकार को दिया था.

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु में शराब की सरकारी दुकानों को खोलने का मार्ग प्रशस्त करते हुये शुक्रवार को मद्रास उच्च न्यायालय के आठ मई के आदेश पर रोक लगा दी. उच्च न्यायालय ने कोविड-19 महामारी के दौरान सामाजिक दूरी बनाये रखने संबंधी दिशा निर्देशों के उल्लंघन के आधार पर इन दुकानों को बंद करने का आदेश राज्य सरकार को दिया था.

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूति बी आर गवई की पीठ ने सरकारी फर्म तमिलनाडु राज्य विपणन निगम की अपील पर वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के आठ मई के आदेश पर रोक लगायी. तमिलनाडु राज्य विपणन निगम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इस मामले में बहस करते हुये कहा कि शराब की बिक्री के बारे में उच्च न्यायालय को अपनी शर्ते नहीं लगानी चाहिए थीं.

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उनका तर्क था कि यह राज्य सरकार के नीति निर्धारण का विषय है और उच्च न्यायालय को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था. उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराब की बिक्री के तरीके पर निर्णय लेना राज्य सरकार का विषय है और इस संबंध में उच्च न्यायालय निर्णय नहीं कर सकता है. शराब की दुकानें खोलने के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती देने वाली याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पीवी योगेश्वरन ने कहा कि शराब की बिक्री करना मौलिक अधिकार नहीं है और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ऐहतियाती कदम उठाये जाना जरूरी है.

उन्होने पीठ से इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का अनुरोध किया. कोविड-19 महामारी की वजह से 43 दिन के लॉकडाउन के बाद सरकार ने जब शराब की दुकानें खोलने की अनुमति देने का निर्णय लिया तो इन दुकानों पर जबर्दस्त भीड़ हो गयी और लोगों ने सामाजिक दूरी बनाये रखने के नियमों का भी पालन नही किया था. उच्च न्यायालय के आठ मई के आदेश के खिलाफ दायर अपील में तमिलनाडु सरकार ने दलील दी है कि पूरे राज्य में शराब की ऑन लाइन बिक्री करना और होम डिलिवरी की व्यवस्था करना संभव नहीं है

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