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'कुछ हद तक वादे पूरे किये, 10 हजार से अधिक मामलों का निपटारा', प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने कही ये बात

Updated at : 08 Nov 2022 8:19 AM (IST)
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'कुछ हद तक वादे पूरे किये, 10 हजार से अधिक मामलों का निपटारा', प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित ने कही ये बात

**EDS: SCREENGRAB FROM VIDEO POSTED BY Supreme Court Bar Association YOUTUBE CHANNEL** New Delhi: Chief Justice of India (CJI) Justice Uday Umesh Lalit speaks during a farewell ceremony organised for him by Supreme Court Bar Association, at Supreme Court in New Delhi, Monday, Nov. 7, 2022. (PTI Photo)(PTI11_07_2022_000153B)

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि जिस दिन से उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला, शीर्ष अदालत में 10,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया और लंबित पड़ीं अतिरिक्त 13,000 दोषपूर्ण याचिकाओं का भी निस्तारण किया गया.

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‘कुछ हद तक वादे पूरे किये’ यह बात निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित ने सोमवार को कही. उन्होंने कहा कि वह अपने वादों को कुछ हद तक पूरा करने में सफल रहे जिनमें हर समय कम से कम एक संविधान पीठ को क्रियाशील बनाना, सुनवाई प्रणाली को सुव्यवस्थित करना और उच्चतम न्यायालय में लंबित मामलों को कम करना शामिल है. आपको बता दें कि न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में 74 दिनों के कार्यकाल के बाद न्यायमूर्ति ललित आठ नवंबर को 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. आठ नवंबर को यानी आज अदालत की छुट्टी है.

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित विदाई समारोह में न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि जिस दिन से उन्होंने प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला, शीर्ष अदालत में 10,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया और लंबित पड़ीं अतिरिक्त 13,000 दोषपूर्ण याचिकाओं का भी निस्तारण किया गया. उन्होंने कहा कि आज आपके सामने मुझे वे वादे याद हैं जो मैंने भारत के प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालने के दौरान किये थे. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मैंने कहा था कि मैं सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की कोशिश करूंगा, मैं देखूंगा कि कम से कम एक संवैधानिक पीठ पूरी तरह से काम कर रही हो और नियमित मामलों को जल्द एक तारीख मिले. मुझे यह कहना होगा कि एक हद तक मैं उन वादों को पूरा करने में सफल रहा हूं.

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आज हम 28, कल हम 27 हो सकते हैं

न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि जिस दिन उन्होंने प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ ली थी, उन्होंने अन्य सभी न्यायाधीशों के साथ एक पूर्ण अदालत की बैठक की थी और उन्होंने 34 स्वीकृत पद के मुकाबले 30 न्यायाधीशों के साथ शुरुआत की थी. उन्होंने कहा कि आज हम 28 (न्यायाधीश) हैं, कल हम 27 हो सकते हैं. इसलिए मैंने सिर्फ 30 को संख्या 5 से विभाजित किया और कहा कि छह संविधान पीठ संभव हैं, एक से छह तक, हमने तय किया कि सभी 30 न्यायाधीश किसी न किसी संविधान पीठ का हिस्सा होंगे और कम से कम संभव समय में हम छह पीठों को चालू कर सकते हैं. न्यायमूर्ति ललित 27 अगस्त को 49वें प्रधान न्यायाधीश बने थे.

एक साथ तीन संविधान पीठें काम कर रही थीं

न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि मैंने यही सोचा था कि इस अदालत में हमें हर समय कम से कम एक संविधान पीठ का काम करना होगा और मुझे कहना होगा कि एक विशेष दिन अदालतों में एक साथ तीन संविधान पीठें एक साथ काम कर रही थीं और तभी हमने लाइव स्ट्रीमिंग कार्यप्रणाली शुरू की. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने उच्चतम न्यायालय में 37 साल बिताए हैं, जिसमें से 29 साल वकील के रूप में और पिछले आठ साल न्यायाधीश के रूप में रहे हैं तथा यह उनके लिए बहुत ही संतोषजनक और सुखद यात्रा रही है. विदाई समारोह में अगले प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, उच्चतम न्यायालय के अन्य न्यायाधीश, कानून अधिकारी, न्यायमूर्ति ललित के परिवार के सदस्य, एससीबीए के पदाधिकारी और अधिवक्ता भी शामिल थे.

शीर्ष अदालत में 10,000 से अधिक मामलों का निपटारा

शीर्ष अदालत में अपनी पहली पेशी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ के पिता तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश यशवंत विशु चंद्रचूड़ के समक्ष तत्काल सुनवाई के लिए एक मामले का उल्लेख करने के लिए उच्चतम न्यायालय आए थे. न्यायमूर्ति ललित ने कहा कि 27 अगस्त से आज तक के प्रधान न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान, वे शीर्ष अदालत में 10,000 से अधिक मामलों का निपटारा करने में सक्षम रहे हैं, जबकि लगभग 8,700 मामले दायर हुए हैं. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान तीन-न्यायाधीशों की संयोजन पीठें भी शुरू की गईं. न्यायमूर्ति ललित का जन्म 9 नवंबर, 1957 को हुआ था। वह 13 अगस्त 2014 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त होने से पहले वरिष्ठ अधिवक्ता थे. उन्हें जून 1983 में एक वकील के रूप में नामांकित किया गया था और दिसंबर 1985 तक बंबई उच्च न्यायालय में वकालत की थी. वह जनवरी 1986 में दिल्ली में वकालत करने लगे और अप्रैल 2004 में उन्हें शीर्ष अदालत द्वारा एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया.

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